अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में कीमती धातुओं का कारोबार करने वाले निवेशक अमेरिका की केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के भविष्य को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। इस माहौल के बीच स्पॉट चांदी यानी XAG/USD का भाव $69.00 प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहा है। बाजार प्रतिभागी अगले महीने होने वाली फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण नीतिगत बैठक से पहले नए आर्थिक आंकड़ों का सूक्ष्मता से विश्लेषण कर रहे हैं। बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई महीने का पर्सनल कंजप्शन एक्सपेंडिचर यानी PCE मूल्य सूचकांक मासिक आधार पर 0.2% बढ़ा है। यह आंकड़ा बाजार के 0.1% वृद्धि के अनुमान से अधिक रहा है, जिसके कारण वार्षिक आधार पर PCE मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 3.7% पर पहुंच गई है। स्टिकी इंफ्लेशन के इन आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने की संभावनाओं को जिंदा रखा है, जिससे कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श के संबोधन पर टिकी हैं दुनिया भर की निगाहें
कीमती धातुओं के कारोबारियों के लिए इस सप्ताह का सबसे बड़ा आकर्षण Wyoming के जैक्सन होल में आयोजित होने वाला वार्षिक आर्थिक संगोष्ठी यानी Jackson Hole Symposium है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श शुक्रवार को इस ऐतिहासिक मंच से अपना पहला संबोधन देने जा रहे हैं। बाजार सहभागी इस भाषण का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इससे यह संकेत मिल सकता है कि सितंबर की नीतिगत समीक्षा में ब्याज दरें बढ़ाई जाएंगी या उन्हें स्थिर रखा जाएगा। मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण के अलावा, निवेशक अमेरिकी डॉलर की क्रय शक्ति में आ रही गिरावट और सरकारी कर्ज के बढ़ते जोखिमों के खिलाफ बचाव के रूप में भी चांदी और सोने की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस स्थिति को वित्तीय बाजारों में डिबेसमेंट ट्रेड कहा जाता है, जहां निवेशक मुद्रा के अवमूल्यन और अमेरिकी राजकोषीय घाटे के खतरों से अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए भौतिक संपत्तियों में पूंजी लगाते हैं।
हरित तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से मिल रही औद्योगिक मांग
पारंपरिक रूप से सोने की तुलना में चांदी को एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु माना जाता है। वर्तमान समय में हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और आधुनिक तकनीकों के विस्तार के कारण चांदी को मजबूत मौलिक समर्थन मिल रहा है। सौर फोटोवोल्टिक पैनलों के निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के इलेक्ट्रॉनिक घटकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटरों के लिए बनाए जा रहे विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। चांदी की विद्युत चालकता पृथ्वी पर मौजूद सभी धातुओं में सबसे अधिक है, जो तांबे और सोने से भी बेहतर मानी जाती है। इसी अद्वितीय भौतिक गुण के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में इसकी जगह किसी अन्य विकल्प को देना बेहद मुश्किल है। जब औद्योगिक विनिर्माण में तेजी आती है, तो चांदी की मांग में भारी उछाल दर्ज किया जाता है, जो इसकी कीमतों को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखने में मदद करता है।
अमेरिका, चीन और भारत के आर्थिक समीकरण का धातु बाजार पर प्रभाव
चांदी की वैश्विक कीमतों को निर्धारित करने में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है। संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विनिर्माण प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में चांदी का उपभोग करते हैं। चीन में विनिर्माण गतिविधियों की गति और अमेरिका में औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े सीधे तौर पर चांदी की वैश्विक खपत को प्रभावित करते हैं। वहीं दूसरी ओर, भारत में उपभोक्ताओं द्वारा आभूषणों, धार्मिक अवसरों और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए चांदी की खरीदारी की जाती है। भारतीय बाजार में भौतिक चांदी की मजबूत उपभोक्ता मांग अंतरराष्ट्रीय हाजिर कीमतों को आधार प्रदान करने में सहायक साबित होती है। इस प्रकार, जहां एक तरफ पश्चिमी और पूर्वी देशों की औद्योगिक जरूरतें मूल्य वृद्धि को प्रेरित करती हैं, वहीं भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की खुदरा मांग वैश्विक बाजार को स्थिरता देती है।
सुरक्षित निवेश का जरिया और सोने के साथ चांदी का संबंध
इतिहास के पन्नों को देखें तो चांदी हमेशा से मूल्य संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में इस्तेमाल होती रही है। हालांकि आम निवेशक सुरक्षात्मक निवेश के लिए सोने को प्राथमिक विकल्प मानते हैं, लेकिन अपने पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करने और उच्च मुद्रास्फीति के दौर में हेजिंग के लिए चांदी भी एक लोकप्रिय जरिया है। निवेशक सिक्के और सिल्ली के रूप में भौतिक चांदी खरीद सकते हैं या फिर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के माध्यम से वित्तीय बाजारों में इसका व्यापार कर सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के हाजिर भाव का ट्रैक रखते हैं। चांदी बिना ब्याज देने वाली संपत्ति होने के कारण आमतौर पर कम ब्याज दर के माहौल में बेहतर प्रदर्शन करती है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर (USD) के मूल्य में बदलाव का इस पर सीधा असर पड़ता है क्योंकि यह धातु डॉलर में आंकी जाती है। कमजोर डॉलर चांदी की कीमतों को ऊपर धकेलता है, जबकि मजबूत डॉलर इसकी तेजी पर अंकुश लगाता है।
गोल्ड/सिल्वर रेशियो और सापेक्षिक मूल्यांकन का गणित
तकनीकी विश्लेषक और निवेशक दोनों धातुओं के बीच तुलनात्मक मूल्यांकन को समझने के लिए गोल्ड/सिल्वर अनुपात यानी Gold/Silver Ratio का उपयोग करते हैं। यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने के बाजार मूल्य के बराबर पहुंचने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। ऐतिहासिक रूप से चांदी की कीमतें सोने के रुख का अनुसरण करती हैं। जब सोने में तेजी आती है, तो चांदी भी आमतौर पर उसी दिशा में आगे बढ़ती है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि जब गोल्ड/सिल्वर रेशियो बहुत अधिक स्तर पर पहुंच जाता है, तो यह संकेत देता है कि चांदी का मूल्यांकन उसकी वास्तविक क्षमता से कम है या फिर सोने की कीमत जरूरत से ज्यादा बढ़ गई है। इसके विपरीत, एक निचला अनुपात यह दर्शाता है कि चांदी की तुलना में सोना सस्ता हो सकता है। खनन आपूर्ति के मामले में भी चांदी सोने से कहीं अधिक प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, और इसकी रीसाइक्लिंग दरें भी बाजार आपूर्ति को प्रभावित करती हैं।
फॉरेक्स और कमोडिटी बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राओं की हलचल
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में केवल चांदी ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ों और संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ब्रिटिश पाउंड बनाम अमेरिकी डॉलर यानी GBP/USD में बुधवार को गिरावट का सिलसिला फिर से शुरू हो गया, जिससे मंगलवार को दर्ज की गई तेजी निरस्त हो गई और यह जोड़ी 1.3600 के स्तर से नीचे चली गई। अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के कारण पाउंड पर दबाव देखा गया। इसी तरह, EUR/USD में भी बिकवाली का नया दौर देखने को मिला, जिससे एशियाई सत्र की शुरुआत से पहले यह जोड़ी 1.1600 के मध्य स्तर तक फिसल गई। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा गुरुवार को अपनी बैठक के मिनट्स जारी किए जाने हैं, जिससे पहले यूरोपीय मुद्रा में सतर्कता का माहौल है।
सोने की कीमतों में सुधार और वैश्विक अनिश्चितता का माहौल
कमोडिटी बाजार में सोने ने निचले स्तरों से रिकवरी दर्ज की है। एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान सोना एक बार फिर $4,600 प्रति औंस के स्तर को हासिल करने में सफल रहा, जिससे पिछले सत्र में साप्ताहिक निचले स्तर तक हुई गिरावट की कुछ भरपाई हो सकी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उत्पन्न परिस्थितियों के बीच सोने को निचले स्तरों पर खरीदार मिले हैं। हालांकि, अमेरिका के गर्म PCE मुद्रास्फीति आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज नहीं होने दिया है। इस कारण अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिल रहा है, जिसने बिना यील्ड वाली धातुओं की बढ़त को सीमित करने का काम किया है। कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितता, औद्योगिक खपत और केंद्रीय बैंक की नीतियों का संगम चांदी की कीमतों को $69.00 के मजबूत धरातल पर टिके रहने में मदद कर रहा है।


















