उत्तर प्रदेश के बरेली में गरीब नागरिकों को मुफ्त इलाज का झांसा देकर नकली आयुष्मान भारत कार्ड तैयार करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। भोजीपुरा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में शामिल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सीधे-साधे और जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाकर उनके महत्वपूर्ण व्यक्तिगत दस्तावेज एकत्र करता था और फिर उनमें हेरफेर करके फर्जी कार्ड तैयार कर लेता था। इस गोरखधंधे के जरिए सरकारी खजाने और आम लोगों दोनों को भारी चपत लगाई जा रही थी।
दस्तावेजों में हेरफेर और अस्पतालों के साथ सांठगांठ
पुलिस की शुरुआती जांच में इस फर्जीवाड़े की पूरी कार्यप्रणाली सामने आई है। गिरोह के सदस्य जरूरतमंद लोगों तक पहुंचते थे और उन्हें योजना के तहत मुफ्त चिकित्सा सुविधा दिलाने का लालच देते थे। इस बहाने वे पीड़ितों से उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य आवश्यक पहचान पत्र हासिल कर लेते थे। इसके बाद इन आधिकारिक दस्तावेजों में जालसाजी कर फर्जी आयुष्मान कार्ड तैयार किए जाते थे।
मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू कुछ निजी और सरकारी सूचीबद्ध अस्पतालों की भूमिका है। जांचकर्ताओं को पता चला है कि गिरोह के सदस्यों की कुछ अस्पतालों के साथ मिलीभगत थी। इस सांठगांठ के तहत उन मरीजों के नाम पर भी इलाज के फर्जी दावे और बिल तैयार किए जाते थे, जिन्होंने वास्तव में अस्पताल में कभी कदम ही नहीं रखा था। इन जाली दावों के सहारे सरकार से आयुष्मान भारत योजना के तहत लाखों रुपये का भुगतान प्राप्त करने की कोशिश की जाती थी।
लाखों रुपये की वसूली और पुलिस की गहन तफ्तीश
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों से गिरोह के व्यापक नेटवर्क की महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल हुई हैं। यह बात भी सामने आई है कि आरोपियों ने फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने के बदले पीड़ितों से प्रति कार्ड हजारों रुपये की अवैध वसूली भी की थी। भोजीपुरा पुलिस अब इस बात की विस्तृत जांच कर रही है कि गिरोह ने अब तक कुल कितने फर्जी कार्ड तैयार किए हैं और इनके माध्यम से सरकार से कितनी रकम ऐंठी गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। संदिग्ध अस्पतालों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजना के तहत फर्जी दावों का कितना हिस्सा पास कराया गया था। दोषी पाए जाने वाले अस्पताल प्रबंधकों और चिकित्सा कर्मियों पर भी सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग का जागरूकता अभियान और हेल्पलाइन व्यवस्था
इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने के बाद बरेली का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है। आम जनता को धोखाधड़ी से बचाने के लिए बरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. विश्राम सिंह के निर्देश पर विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। जिले के सभी सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों के मुख्य प्रवेश द्वारों तथा रिसेप्शन काउंटरों पर बड़े-बड़े जागरूकता बैनर लगाए जा रहे हैं ताकि मरीज या उनके परिजन किसी के झांसे में न आएं।
इन बैनरों पर राज्य सरकार की हेल्पलाइन संख्या 1800-1800-4444 और केंद्र सरकार की टोल-फ्री हेल्पलाइन संख्या 14555 को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। इसके अतिरिक्त, जिला नोडल अधिकारी, डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर और जिला शिकायत निवारण अधिकारी के सीधे संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं ताकि लोग किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर तुरंत सूचना दे सकें।
सीएमओ की अपील: बिचौलियों से रहें सावधान
स्वास्थ्य विभाग ने लाभार्थियों से अपील की है कि वे आयुष्मान भारत योजना का लाभ पाने के लिए किसी भी बिचौलिए, दलाल या अनजान व्यक्ति के बहकावे में बिल्कुल न आएं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने कहा है कि नागरिक बिना उचित सत्यापन के अपने आधार कार्ड, राशन कार्ड या अन्य कोई भी निजी दस्तावेज किसी अज्ञात व्यक्ति को न सौंपें।
विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि यदि योजना का कार्ड बनाने या इलाज की सुविधा देने के नाम पर कोई व्यक्ति पैसे मांगता है, अथवा कोई संदिग्ध कॉल आती है, तो नागरिक बिना किसी देरी के जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराएं।



















