महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई एक दिल दहला देने वाली त्रासदी ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। जालना के खवड्या डोंगर पर हुई एक दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई, जिसके बाद अब इस खौफनाक अंत के पीछे छिपे गहरे पारिवारिक तनाव और विवादों की परते खुलने लगी हैं। इस वीभत्स हादसे में 19 वर्षीय कुणाल, उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता की मौत ने यह साबित कर दिया है कि किस तरह बरसों से सुलग रहा अंदरूनी क्लेश किसी हंसते-खेलते परिवार को पल भर में नेस्तनाबूद कर सकता है।
बुआ के तीखे खुलासे और बरसों का अलगाव
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब कुणाल की बुआ और मुरलीधर की सगी बहन ने अपनी चुप्पी तोड़ी। उनके बयानों से उस दर्द और कड़वाहट का खुलासा हुआ जिसे अब तक सामाजिक मर्यादाओं के नाम पर दबाकर रखा गया था। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि मुरलीधर ने अपनी पसंद से विवाह किया था, लेकिन उस फैसले के बाद से ही उनके अपने परिवार से रास्ते लगभग कट गए थे। आरोप है कि संगीता का अपने पति पर ऐसा प्रभाव था कि मुरलीधर अपने बूढ़े माता-पिता और बहनों से पूरी तरह कट चुके थे। यहाँ तक कि जब मुरलीधर अपनी बहन के घर शादी का निमंत्रण देने पहुँचे थे, तब भी उनकी पत्नी के न आने का फरमान और एक भाई की बेबसी साफ झलक रही थी।
दादाजी का दर्द और प्रायश्चित के वे पल
दूसरी तरफ, परिवार के मुखिया यानी कुणाल के दादाजी का दर्द भी इन खुलासों के साथ सामने आ गया। उन्होंने बताया कि जिस बेटे ने वर्षों तक अपनी पत्नी के दबाव में आकर अपने ही खून के रिश्तों से दूरी बनाए रखी, वह अपने जीवन के अंतिम दिनों में जब अपने पुराने घर लौटा तो अपनी बीमार माँ की लाचारी देखकर उसका दिल पसीज गया। उस दौरान मुरलीधर ने चुपचाप घर के बर्तन माँजे और अपने हाथों से सब्जी बनाकर अपने माता-पिता को भोजन कराया। ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपने बरसों के अलगाव और अपनी गलतियों का प्रायश्चित कर रहा था। लेकिन इस घरेलू घुटन और तनाव का सबसे बड़ा मानसिक शिकार उनका युवा बेटा कुणाल बन चुका था, जिसकी जिद और मानसिक स्थिति ने इस खौफनाक अंजाम की इबारत लिख दी।
खवड्या डोंगर की उस काली सुबह का सच
खवड्या डोंगर की उस वीरान और काली सुबह जो कुछ हुआ, उसने किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह को कंपा दिया। मानसिक उथल-पुथल से गुजर रहा 19 वर्षीय कुणाल जब खाई के मुहाने पर खड़ा था, तो उसे बचाने के लिए उसके पिता मुरलीधर ने तुरंत कदम बढ़ाया। इस बीच संतुलन बिगड़ने से पिता और पुत्र दोनों ही गहरी खाई में जा गिरे। अपनी आँखों के सामने अपने पूरे संसार को इस तरह उजड़ते हुए देख माता संगीता ने भी सदमे में आकर उसी खाई में छलांग लगा दी। इस तिहरे हादसे ने केवल एक परिवार को ही खत्म नहीं किया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि रिश्तों में आने वाली खटास कितनी घातक साबित हो सकती है। शुरुआत में परिवार के बुजुर्गों को इस भीषण सच्चाई से दूर रखा गया और केवल यही बताया गया कि पोते के पैर में चोट आई है, लेकिन जब घर में एक साथ तीन अर्थियाँ पहुँचीं तो सच का यह भयानक पर्दाफाश हुआ।


















