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वाराणसी में 116 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत चार गिरफ्तारअपराध
23 अग॰ 2026, 9:39 pm (46 दिन पहले)· 2

वाराणसी में 116 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत चार गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में साइबर सेल और चेतगंज पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 116.86 करोड़ रुपये की बड़ी साइबर ठगी का खुलासा किया है। इस मामले में गैंग के सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी फर्म और बैंक खातों के जरिए धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ा मामला सामने आया है। वाराणसी की साइबर क्राइम सेल और थाना चेतगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने मिलकर 116.86 करोड़ रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में गिरोह के सरगना समेत कुल चार आरोपियों को धर दबोचा है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह शातिर गिरोह कमीशन का लालच देकर भोले-भाले लोगों के नाम पर फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाता था। इन खातों का इस्तेमाल बाद में बड़े पैमाने पर साइबर ठगी, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और बेटिंग ऐप के जरिए अवैध लेनदेन के लिए किया जाता था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े 41 बैंक खातों की जांच की गई है, जिनमें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर कुल 143 शिकायतें दर्ज पाई गईं। इन सभी मामलों को मिलाकर कुल 116.86 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आंकड़ा सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है।

ऐसे काम करता था ठगों का यह जालसाज गिरोह

पुलिस पूछताछ और तकनीकी जांच में पता चला है कि यह संगठित गिरोह बेहद शातिर तरीके से अपनी वारदातों को अंजाम देता था। आरोपी मोबाइल फोन में XePay APK के जरिए एसएमएस फॉरवर्डिंग की सुविधा को सक्रिय कर लेते थे। इसकी मदद से वे बैंक खातों से जुड़े ओटीपी सीधे हासिल कर लेते थे और ठगी की गई रकम को पलक झपकते ही अलग-अलग फर्जी खातों में घुमा देते थे। इस तरीके से पैसों की कई लेयर बनाकर उन्हें ट्रैक करना मुश्किल बना दिया जाता था। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नीतीश कुमार पाण्डेय है, जो मूल रूप से बिहार के रोहतास जिले के सासाराम का रहने वाला है। इसके अलावा इस गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों में एक नाम दुष्यंत सिंह का भी सामने आया है, जिसका पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस सिंडिकेट के तार देश के अन्य हिस्सों में कहां-कहां जुड़े हुए हैं।

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गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों से भारी सामान बरामद

संयुक्त पुलिस टीम ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस ने इनके पास से 7 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 19 चेकबुक, 40 डेबिट कार्ड, 48 क्यूआर स्कैनर और ठगी में इस्तेमाल होने वाले दो वाहन जब्त किए हैं। एसीपी क्राइम विनय कुमार द्विवेदी ने इस पूरी कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अपराधियों के खिलाफ छेड़े गए अभियान के तहत 23 अगस्त को जनपद की साइबर क्राइम टीम और चेतगंज पुलिस ने इस संयुक्त ऑपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि यह गिरोह लोगों को बेवकूफ बनाकर और उन्हें मुनाफे या कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी फर्म और बैंक खाते तैयार करवाता था। इसके बाद उन खातों से जुड़ी सारी गोपनीय जानकारी और कंट्रोल अपने कब्जे में ले लेते थे। इन खातों का इस्तेमाल मुख्य रूप से गेमिंग ऐप्स और फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को चूना लगाने के लिए किया जा रहा था।

आगे की कानूनी कार्रवाई और पुलिस की तलाश जारी

इस बड़े खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के जरिए धोखाधड़ी की गई कुल रकम करोड़ों में है, जो लगभग 116 करोड़ 86 लाख रुपये से भी अधिक बैठती है। पुलिस ने अब तक कुल चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि इस मामले में दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। इसके अलावा, जिन लोगों के नाम पर ये फर्जी खाते खोले गए थे और जो अन्य लोग इस पूरे सिंडिकेट से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं, उनकी पहचान की जा रही है। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधियों के खिलाफ इस तरह की सख्त कार्रवाई से ठगों में हड़कंप मच गया है, और पुलिस का यह अभियान आगे भी जारी रहने की बात कही जा रही है ताकि इस तरह के अन्य नेटवर्क का भी पूरी तरह से सफाया किया जा सके।

सवाल-जवाब

वाराणसी में कितने रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है?
वाराणसी में पुलिस ने 116.86 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा किया है।
इस साइबर गिरोह के सरगना का क्या नाम है?
इस गिरोह के सरगना का नाम नीतीश कुमार पाण्डेय है, जो बिहार के सासाराम का रहने वाला है।
पुलिस ने इस मामले में कुल कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने इस मामले में सरगना समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी वांछित हैं।
आरोपी ठगी के पैसों को ट्रांसफर करने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल करते थे?
आरोपी मोबाइल में XePay APK के जरिए एसएमएस फॉरवर्डिंग सक्रिय कर ओटीपी हासिल करते थे और ठगी की रकम को खातों में घुमाते थे।
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