महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में आयोजित एक युवा कार्यक्रम के दौरान अपने राजनीतिक सफर और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े संस्मरण साझा किए। 'मंथन 4 युवा' नाम के इस आयोजन में नई पीढ़ी के साथ संवाद करते हुए उन्होंने अपने शुरुआती दिनों के संघर्षों को याद किया और बताया कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शीर्ष पदों तक पहुंच सकता है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी उदाहरण दिया और कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र और संविधान की ही ताकत है जो हर नागरिक को बड़े अवसर उपलब्ध कराती है।
विचारों से प्रेरित होकर की थी शुरुआत
अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि जब उन्होंने राजनीति की दुनिया में कदम रखा था, तब वह केवल वैचारिक प्रेरणा से जुड़े थे। उस दौर में उन्हें ऐसा लगता था कि वह जिस राजनीतिक दल के साथ काम कर रहे हैं, उसके सत्ता में आने की कोई संभावना नहीं है। उन्हें यह मानकर चलना पड़ता था कि उनका पूरा राजनीतिक जीवन केवल विपक्ष में बैठकर संघर्ष करने के लिए ही बना है। हालांकि, उन्होंने लगातार आंदोलन किए और जमीन पर काम जारी रखा, जिसके बाद आम जनता ने उनके संघर्षों पर भरोसा जताया और वह एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे।
कम उम्र में जेल यात्रा और राम जन्मभूमि आंदोलन
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने राम जन्मभूमि आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह मात्र 20 साल के थे, तब इस आंदोलन से जुड़े थे और इस दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश की बदायूं की केंद्रीय जेल में 18 दिन बिताने पड़े थे। उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि वह प्रयागराज गए थे और वहां से अयोध्या की तरफ बढ़े थे। उनके मुताबिक, यह वह समय था जब उन्होंने पहली बार करीब से देखा कि भाषण और बयानबाजी का जमीन पर क्या असर होता है। इस आंदोलन के दौरान उन पर गोलियां भी चलाई गईं, पुलिस की लाठियों का सामना करना पड़ा और अंततः गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन जेल से रिहा होने के बाद भी उनका सफर थमा नहीं और वह लगातार आंदोलन का हिस्सा बने रहे।
1992 की घटना पर जताई गर्व की भावना
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने उस ऐतिहासिक पल को भी याद किया जब विवादित ढांचा गिराया गया था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि साल 1992 में जब बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया था, तब वह वहां मौजूद थे और उन्हें इस घटना पर बेहद गर्व है। उनके अनुसार, राजनीति उनके लिए केवल सत्ता पाने का जरिया नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने का एक माध्यम है।
युवाओं के लिए स्टार्टअप और रोजगार पर जोर
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने आज की युवा पीढ़ी को हर संभव मदद और समर्थन देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने प्रदेश में मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने के लिए एक विशेष नीति बनाई है और इसके लिए पर्याप्त फंड का इंतजाम भी किया गया है। इसके अलावा युवाओं के लिए इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित किए गए हैं और अब इन केंद्रों का दायरा बढ़ाते हुए उनका विकेंद्रीकरण किया जा रहा है ताकि सुदूर इलाकों के युवाओं को भी इसका सीधा फायदा मिल सके।





















