प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म पॉलीमार्केट ने अपनी यूएस एक्सचेंज की शुरुआत के केवल छह हफ्तों के भीतर 1 अरब डॉलर का वार्षिक राजस्व पार कर लिया है। यूएस प्लेटफॉर्म पर डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम मई के मध्य में करीब 5 करोड़ डॉलर प्रतिदिन थी, जो 20 जून तक बढ़कर 20 करोड़ डॉलर से अधिक हो गई। ड्यून एनालिटिक्स के डेटा के मुताबिक महज एक महीने में यह वॉल्यूम चार गुना से भी ज्यादा हो गई।
अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर भी रिकॉर्ड टूटे
पॉलीमार्केट की यह तेज रफ्तार सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। कंपनी के अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर साप्ताहिक ट्रेडिंग वॉल्यूम अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसमें वर्ल्ड कप से जुड़ी प्रेडिक्शन ट्रेडिंग की जबरदस्त मांग का बड़ा हाथ रहा है। यूएस एक्सचेंज की कामयाब शुरुआत और वर्ल्ड कप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन ने मिलकर प्लेटफॉर्म की समग्र गतिविधि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
यूएस में वापसी का सफर
पॉलीमार्केट की यूएस एक्सचेंज दिसंबर 2026 में लॉन्च हुई थी। कंपनी पर 2022 से अमेरिका में कारोबार करने पर रोक लगी हुई थी और यह प्रतिबंध हटने के बाद कंपनी अमेरिकी बाजार में वापस आ सकी। एक्सचेंज की शुरुआत के बाद से कई बड़े अपडेट भी सामने आए हैं। इनमें यूजर्स को प्राइवेट कंपनियों की पोजीशन पर ट्रेड करने की सुविधा देना और अमेरिकी डॉलर से 1:1 के अनुपात पर बैक्ड खुद के स्टेबलकॉइन की घोषणा प्रमुख हैं।
कंपनी का प्रोडक्ट-लेड नजरिया
पॉलीमार्केट के प्रवक्ता ने कंपनी की रणनीति के बारे में कहा:
पॉलीमार्केट एक प्रोडक्ट-लेड कंपनी है। हमने पिछले पांच साल दुनिया का सबसे बड़ा प्रेडिक्शन मार्केट बनाने और यह समझने में लगाए हैं कि लोग बड़े पैमाने पर मार्केट से कैसे जुड़ते हैं। हम इन सीखों को अपने यूएस प्लेटफॉर्म पर लागू कर रहे हैं, जहां हमारा ध्यान सहज मार्केट अनुभव, इंस्टीट्यूशनल-ग्रेड लिक्विडिटी और ऐसे उपभोक्ता अनुभव पर है जो इस श्रेणी में नया मानक स्थापित करे।
3 मिलियन डॉलर की क्रिप्टो चोरी और वापसी का वादा
रिकॉर्ड राजस्व की इन खबरों के बीच पॉलीमार्केट एक गंभीर सुरक्षा संकट से भी जूझ रहा है। हैकर्स ने एक थर्ड-पार्टी वेंडर से छेड़छाड़ कर कंपनी की वेबसाइट में सेंध लगाई और यूजर्स की करीब 3 मिलियन डॉलर की क्रिप्टो चुरा ली। कंपनी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि सभी प्रभावित यूजर्स को उनका पूरा पैसा वापस किया जाएगा। यह घटना एक बार फिर यह साफ करती है कि तेज रफ्तार से बढ़ रहे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के सामने साइबर सुरक्षा की चुनौतियां कितनी बड़ी हैं।













