संवैधानिक पद और सरकार के मुखिया के रूप में सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित श्री विनायक मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। नरेंद्र मोदी की प्रशासनिक यात्रा की शुरुआत गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ हुई थी, जिसके बाद उन्होंने देश के प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला। इस उपलब्धि के अवसर पर देश और दुनिया भर के प्रमुख नेताओं ने उन्हें बधाई संदेश भेजे और सार्वजनिक जीवन में उनके दीर्घकालिक योगदान को सराहा। दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा–सेवा ज्योति यात्रा’ के भव्य मंच से प्रधानमंत्री युवाओं और कार्यकर्ताओं को अपना विशेष संबोधन देंगे। भारतीय जनता पार्टी द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में सेवा यात्री, भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता और युवा बड़ी संख्या में एकत्र हो रहे हैं, जहां सुबह 9:30 बजे उनका संदेश प्रसारित होना तय किया गया है।
गणेश मंदिर में सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्रार्थना
राजधानी के श्री विनायक मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने लिखा कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश से देशभर के अपने परिवारजनों की सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना की गई है। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि भगवान गणेश की कृपा से प्रत्येक नागरिक का कल्याण सुनिश्चित हो और राष्ट्र प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे। मंदिर परिसर में संपन्न हुए वैदिक अनुष्ठान और दर्शन को उनके सेवा काल के रजत जयंती वर्ष के औपचारिक शुभारंभ के रूप में देखा जा रहा है।
17 सितंबर से शुरू हुई सेवा यात्रा का दिल्ली में समापन
इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के पावन अवसर पर ‘सेवा संकल्प यात्रा’ के रूप में हुई थी। इसके समापन समारोह के लिए व्यापक स्तर पर संगठनात्मक तैयारियां की गई हैं। यह आयोजन विशेष रूप से उन दो ऐतिहासिक स्थलों पर आयोजित किया जा रहा है, जिनका प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत जीवन और आध्यात्मिक चेतना से गहरा जुड़ाव रहा है। इस सभा के माध्यम से वे युवाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के समक्ष जनसेवा, राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत 2047 के संकल्प को लेकर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे।
मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों ने सराहा 25 वर्षों का सफर
इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्यों ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व और कार्यशैली पर विचार व्यक्त किए। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि 7 अक्टूबर को नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से आरंभ हुए 25 वर्षों के सेवा सफर को विशेष रूप से याद किया जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि उस समय तक नरेंद्र मोदी ने कोई भी निर्वाचित पद नहीं संभाला था, फिर भी उन्होंने निष्ठा और कड़े परिश्रम से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। सीतारमण ने उन्हें समर्पित और भ्रष्टाचार से पूर्णतः दूर रहने वाला राजनेता बताया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी में बिना किसी राजनीतिक परिवार, विरासत या आर्थिक रसूख के भी एक सामान्य कार्यकर्ता शीर्ष स्तर तक पहुंच सकता है, जो भारतीय लोकतंत्र की अंतर्निहित शक्ति का जीवंत प्रमाण है।
सुशासन और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस अवसर पर प्रधानमंत्री को सरकार के मुखिया के तौर पर 25 साल पूरे होने पर बधाई दी। राजनाथ सिंह ने X पर लिखा कि 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से प्रारंभ हुई यह प्रशासनिक यात्रा आज राष्ट्रीय सेवा, जनकल्याण और सुशासन का पर्याय बन चुकी है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस पूरे सफर का मूल आधार ‘नेशन फर्स्ट, ऑलवेज फर्स्ट’ का सिद्धांत रहा है। उनके अनुसार, इस कार्यकाल के दौरान देश के करोड़ों नागरिकों को पक्के मकान, स्वच्छ पेयजल, व्यक्तिगत शौचालय, रसोई गैस कनेक्शन और औपचारिक बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं से सीधे जोड़ा गया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना के साथ देश अब आत्मविश्वास के साथ विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
कैबिनेट प्रस्ताव में दर्ज हुए मील के पत्थर
इस ऐतिहासिक यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी औपचारिक प्रस्ताव पारित कर उनके नेतृत्व पर मुहर लगाई। कैबिनेट के प्रस्ताव में उन 10 ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णयों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है जिन्होंने भारत के प्रशासनिक और विकास मॉडल को नई दिशा दी। गुजरात में आपदा प्रबंधन और पुनर्निर्माण से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल क्रांति, बुनियादी ढांचे के कायाकल्प और कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शी डिलीवरी तक के कदमों को इस प्रस्ताव में सुशासन की एक मिसाल के रूप में दर्ज किया गया है।





















