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दिल्ली हवाई अड्डे पर 3500 करोड़ रुपये से दौड़ेगी एयर ट्रेन, टर्मिनलों के बीच सफर में लगेंगे सिर्फ 13 मिनटदिल्ली
7 अक्तू॰ 2026, 10:11 am (51 मिनट पहले)· 0

दिल्ली हवाई अड्डे पर 3500 करोड़ रुपये से दौड़ेगी एयर ट्रेन, टर्मिनलों के बीच सफर में लगेंगे सिर्फ 13 मिनट

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 7.3 किलोमीटर लंबे ऑटोमेटेड पीपल मूवर प्रोजेक्ट पर अगले साल से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है, जिससे टर्मिनल 1 और टर्मिनल 3 सीधे जुड़ जाएंगे।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने-जाने वाले मुसाफिरों के लिए टर्मिनलों के बीच आवागमन जल्द ही बेहद सुगम और तेज होने जा रहा है। देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर विभिन्न टर्मिनलों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से एक आधुनिक स्वचालित प्रणाली यानी ऑटोमेटेड पीपल मूवर (APM) शुरू करने की तैयारी है। एयर ट्रेन के नाम से जानी जाने वाली इस परियोजना पर करीब 3,500 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इस पूरे प्रोजेक्ट का बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए अगले साल से जमीनी स्तर पर काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। एक बार निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद इसे पूरा करने में तकरीबन 30 महीने का समय लगने का आकलन किया गया है, और पूरी व्यवस्था 2030 तक बनकर तैयार हो सकती है।

7.3 किलोमीटर लंबा ट्रैक और छह प्रमुख स्टेशन

प्रस्तावित एयर ट्रेन नेटवर्क की कुल लंबाई 7.3 किलोमीटर होगी, जो हवाई अड्डे के प्रमुख हिस्सों को आपस में जोड़ेगी। इस पूरे रूट में 5.3 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड ट्रैक के रूप में हवा में तैयार किया जाएगा, जबकि बाकी बचा 2 किलोमीटर का हिस्सा जमीन की सतह पर बिछाया जाएगा। इस पूरे कॉरिडोर पर यात्रियों की सुविधा के लिए कुल छह स्टेशन बनाए जाएंगे। यह प्रणाली टर्मिनल-1 और टर्मिनल-3 को सीधे एयरोसिटी, एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन और कार्गो जोन के साथ जोड़ेगी। इस ट्रेन के परिचालन से मुसाफिर महज 12 से 13 मिनट के भीतर एक छोर से दूसरे छोर तक का सफर तय कर सकेंगे।

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यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस रूट पर हर 10 मिनट के अंतराल पर ट्रेन उपलब्ध रहेगी, जिससे लोगों को टर्मिनल बदलने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। संचालन के शुरुआती साल में रोजाना करीब 55,000 यात्रियों द्वारा इस सेवा का उपयोग करने का अनुमान लगाया गया है। आगे चलकर जब यह प्रणाली अपनी पूरी क्षमता पर काम करेगी, तब रोजाना सफर करने वाले मुसाफिरों की तादाद 85,000 तक पहुंच सकती है।

डिजाइन को अंतिम रूप और सार्वजनिक परिवहन से तालमेल

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) प्रदीप पाणिकर ने परियोजना की वर्तमान प्रगति की जानकारी साझा की है। प्रदीप पाणिकर के मुताबिक, APM की डिजाइन तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है और इसके लिए विशेषज्ञ कंसलटेंट की नियुक्ति पहले ही पूरी की जा चुकी है। वर्तमान में डिजाइन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे 30 महीने की समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

यह एयर ट्रेन प्रणाली एयरोसिटी में मौजूद एयरपोर्ट मेट्रो नेटवर्क के साथ बेहतरीन संपर्क प्रदान करेगी। प्रदीप पाणिकर ने स्पष्ट किया है कि एयर ट्रेन का स्टेशन मेट्रो स्टेशन के बिल्कुल करीब बनाया जाएगा, हालांकि दोनों प्रणालियों के बीच सीधे प्लेटफॉर्म-टू-प्लेटफॉर्म कनेक्शन की कोई योजना नहीं रखी गई है। इसके अलावा, एयरोसिटी क्षेत्र को वर्तमान में निर्माणाधीन गोल्डन लाइन और प्रस्तावित सराय काले खां-अलवर RRTS कॉरिडोर से भी जोड़ने की विस्तृत योजना पर काम चल रहा है, जिससे यात्रियों को दिल्ली-NCR के विभिन्न इलाकों से हवाई अड्डे तक आने-जाने में सीधी सुविधा मिलेगी।

बढ़ते यात्री दबाव के बीच टर्मिनल 3 का विस्तार

हवाई अड्डे के 2036 के मास्टर प्लान में भविष्य की यात्रा जरूरतों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। मास्टर प्लान के मुताबिक, निकट भविष्य में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शुरू होने के असर को ध्यान में रखने के बाद भी, आईजीआई हवाई अड्डे पर सालाना यात्रियों की संख्या लगभग 12.9 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान है। वर्ष 2036 तक दिल्ली-NCR के तीनों प्रमुख हवाई अड्डों की संयुक्त वार्षिक यात्री क्षमता करीब 16 करोड़ रहने का आकलन किया गया है। वहीं 2030 तक आईजीआई हवाई अड्डे पर यात्रियों की मांग 10.7 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है, जबकि उस समय तक इस हवाई अड्डे की कुल क्षमता 12.1 करोड़ यात्रियों की होगी।

मुसाफिरों की इसी भारी तादाद को संभालने के लिए टर्मिनल-3 पर कई बड़े ढांचागत सुधार किए जाएंगे। घरेलू उड़ानों के यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए टर्मिनल-3 पर एक नया पियर-ई बनाया जाएगा। हवाई अड्डे के भीतर चेक-इन काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाएगी और आगमन क्षेत्र में बैगेज रिक्लेम बेल्ट का विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा टर्मिनल-3 के प्रस्थान और आगमन दोनों फोरकोर्ट को चौड़ा करने का निर्णय लिया गया है। वाहनों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए प्रस्थान क्षेत्र में ड्रॉप-ऑफ लेन की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जाएगी, जबकि आगमन क्षेत्र में पिक-अप लेन चार से बढ़ाकर छह की जाएंगी।

पैदल सुरंग का काम और कार्गो क्षमता का विस्तार

टर्मिनलों के बीच पैदल आवागमन को आसान बनाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। टर्मिनल-2 को सीधे एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन से जोड़ने वाली भूमिगत पैदल सुरंग का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसके बहुत जल्द पूरा होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, माल ढुलाई के मोर्चे पर भी हवाई अड्डे का विस्तार जारी है। अनुमान के अनुसार, 2036 तक हवाई अड्डे का सालाना कार्गो ट्रैफिक बढ़कर 17 लाख टन तक पहुंच जाएगा। वर्तमान में मौजूद कार्गो क्षेत्र की सालाना क्षमता लगभग 18 लाख टन है, जिसे भविष्य की बढ़ती मांग के अनुरूप और अधिक विस्तारित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

सवाल-जवाब

दिल्ली हवाई अड्डे की एयर ट्रेन परियोजना की अनुमानित लागत कितनी है?
इस ऑटोमेटेड पीपल मूवर परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,500 करोड़ रुपये है।
एयर ट्रेन का निर्माण कार्य कब शुरू होगा और इसे पूरा होने में कितना समय लगेगा?
इस परियोजना पर अगले साल से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है, जिसे पूरा होने में करीब 30 महीने लगेंगे और यह 2030 तक तैयार हो सकती है।
एयर ट्रेन ट्रैक की कुल लंबाई कितनी होगी और इसमें कितने स्टेशन होंगे?
ट्रैक की कुल लंबाई 7.3 किलोमीटर होगी, जिसमें 5.3 किलोमीटर एलिवेटेड और 2 किलोमीटर जमीन पर रहेगा, तथा इस रूट पर कुल छह स्टेशन बनाए जाएंगे।
टर्मिनल 1 से टर्मिनल 3 तक पहुंचने में कितना समय लगेगा और ट्रेन कितने अंतराल पर मिलेगी?
यात्री एक छोर से दूसरे छोर तक का सफर करीब 12 से 13 मिनट में पूरा कर सकेंगे और यह ट्रेन हर 10 मिनट में उपलब्ध होगी।
टर्मिनल 3 पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए क्या बदलाव किए जा रहे हैं?
टर्मिनल 3 पर घरेलू यात्रियों के लिए नया पियर-ई बनेगा, चेक-इन काउंटर और बैगेज बेल्ट बढ़ेंगे, तथा ड्रॉप-ऑफ लेन तीन से पांच और पिक-अप लेन चार से छह की जाएंगी।
टर्मिनल 2 और एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन के बीच क्या सुविधा तैयार की जा रही है?
टर्मिनल 2 को एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन से जोड़ने के लिए एक भूमिगत पैदल सुरंग का निर्माण किया जा रहा है, जिसके जल्द पूरा होने की उम्मीद है।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 मिनट पहले

टी-1 से टी-3 के बीच भागदौड़ और ट्रैफिक से तो राहत मिल जाएगी, पर क्या 2030 तक का इंतज़ार सच में लंबा नहीं है?

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·1 मिनट पहले

अर्जुन जी, बात तो सही है आपकी, लेकिन 3500 करोड़ का प्रोजेक्ट है तो कागजी कार्रवाई और डिजाइन में थोड़ा वक्त लगना स्वाभाविक ही है।

Rohan Verma@rohan-verma·21 मिनट पहले

टी-1 से टी-3 के बीच चक्कर काटने का झंझट अब खत्म होगा, 13 मिनट में सफर वाकई बहुत राहत देगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 मिनट पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने! अक्सर टी-1 से टी-3 भागने में टैक्सी वाले बहुत परेशान करते हैं और ट्रैफिक का चक्कर अलग रहता है, इस एयर ट्रेन से भागदौड़ काफी कम हो जाएगी।

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