अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूरो पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, जिससे EUR/USD की विनिमय दर 0.18% गिरकर 1.1238 के आसपास आ गई। पिछले कारोबारी दिन अमेरिकी डॉलर में जो सुधारात्मक नरमी देखी गई थी, उसके बाद डॉलर ने फिर से अपनी खोई हुई जमीन हासिल कर ली है। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई नई तेजी ने ग्रीनबैक को सहारा दिया है, जबकि दूसरी ओर यूरोप के भीतर वित्तीय चिंताओं ने एकल मुद्रा के प्रति निवेशकों के रुझान को कमजोर कर दिया है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स का ताजा रुख
छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.18% की बढ़त के साथ 102.00 के स्तर से थोड़ा ऊपर कारोबार कर रहा है। मंगलवार को डॉलर इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई थी, क्योंकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड की लगातार तेजी पर ब्रेक लगता दिखाई दिया था। हालांकि, यह राहत अस्थायी साबित हुई और यूएस ट्रेजरी यील्ड एक बार फिर उछलकर 5.3% के अहम आंकड़े के ऊपर पहुंच गई है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर की अगली दिशा फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के सितंबर नीतिगत बैठक के मिनट्स से तय होगी, जो 18:00 GMT पर सार्वजनिक किए जाने हैं। एफओएमसी मिनट्स आमतौर पर ब्याज दर निर्णय के तीन सप्ताह बाद जारी होते हैं। वैश्विक निवेशक इस दस्तावेज में नीतिगत दृष्टिकोण के संकेतों के साथ-साथ मतदान विभाजन (वोट स्प्लिट) का गहन विश्लेषण करते हैं। यदि मिनट्स का रुख आक्रामक (हॉकिश) नजर आता है, तो डॉलर को और मजबूती मिल सकती है, जबकि नरम (डोविश) रुख अमेरिकी मुद्रा के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि एफओएमसी के मुख्य नीतिगत बयान के विपरीत, समाचार एजेंसियों को मिनट्स की पूर्व प्रति नहीं मिलती, जिसके कारण बाजार की प्रतिक्रिया थोड़ी देर से सामने आ सकती है।
फ्रांस का बढ़ता कर्ज और यूरोजोन की चुनौतियां
यूरो के मोर्चे पर बुनियादी समस्याएं लगातार गंभीर बनी हुई हैं। फ्रांस में गहराते राजकोषीय संकट और तेजी से बढ़ते कर्ज ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। फ्रांस का संचयी कर्ज अब उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 119% तक पहुंच चुका है। कर्ज का यह भारी बोझ यूरोपीय साझा मुद्रा पर लगातार दबाव बनाए रखने का मुख्य कारक साबित हो रहा है।
इसके अलावा, यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष एक अनूठा संकट खड़ा हो गया है। सामान्य परिस्थितियों में जब महंगाई केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से दौड़ रही हो, तो ईसीबी का सीधा कदम ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता। लेकिन मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड बाजार पहले ही मौद्रिक सख्ती का एक बड़ा हिस्सा अपने स्तर पर अंजाम दे चुका है, जिससे ईसीबी के नीति निर्माताओं के सामने फैसले लेने की जटिल दुविधा उत्पन्न हो गई है।
तकनीकी स्तर: 1.1376 पर रुकावट और 1.1160 का सपोर्ट
चार्ट के नजरिए से देखें तो EUR/USD के लिए तत्काल प्रतिरोध 1.1376 पर स्थित 20-दिवसीय ईएमए (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) पर बना हुआ है। यह तकनीकी स्तर किसी भी तरह के सुधार के प्रयास को रोक रहा है और यदि बुल्स को मौजूदा मंदी के दबाव को कम करना है, तो उन्हें इस स्तर को दोबारा हासिल करना होगा। दूसरी तरफ, यदि यह करेंसी पेयर 1.1160 के नए वार्षिक निचले स्तर से नीचे फिसलता है, तो गिरावट की रफ्तार और तेज हो सकती है।
लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, इस समय EUR/USD 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 1.12 के मुकाबले 0.16% अधिक है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.12 से 1.20 के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 1.00 गुना दर्ज किया गया। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई (RSI) 20 के स्तर पर है, जो अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) की स्थिति दर्शाता है। एमएसीडी (MACD) -0.01 पर है जो हिस्टोग्राम -0.00 के साथ मंदी का संकेत देता है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 1.14, 50-दिवसीय ईएमए 1.15 और 200-दिवसीय ईएमए 1.16 पर हैं। कीमत दीर्घकालिक डाउनट्रेंड में है और चार्ट पर डेथ क्रॉस (50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे जाना) बना हुआ है। बॉलिंजर बैंड 1.12 से 1.17 (मध्य 1.14) के दायरे में है, जबकि 14-दिवसीय एडीएक्स (ADX) 47 पर एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार दिखा रहा है। स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 22 और सिग्नल लाइन 21 पर है, तथा 14-दिवसीय एटीआर (ATR) 0.01 है। पिवट 1.12 पर है, जिसमें प्रतिरोध R1 और R2 दोनों 1.13 पर और समर्थन S1 व S2 दोनों 1.12 पर स्थित हैं।
वैश्विक फॉरेक्स और कमोडिटी बाजारों की स्थिति
बुधवार के कारोबारी सत्र में डॉलर की वापसी का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी साफ देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) अपनी हालिया तेजी को बनाए रखने में असमर्थ रही और 0.7000 के नीचे नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार करती दिखी। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के माहौल में अमेरिकी यील्ड में उछाल ने डॉलर में निचले स्तरों पर खरीदारों को आकर्षित किया, जिससे रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की आक्रामक अपेक्षाओं के बावजूद यह जोड़ी दबाव में रही।
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) एशियाई सत्र में 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर के पास बना रहा। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नरम टिप्पणियों और अमेरिकी यील्ड में आई तेजी ने डॉलर की मांग को पुनर्जीवित किया। जापानी मुद्रा के मुकाबले बुल्स अब 200-दिवसीय एसएमए की बाधा के पार निकलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कमोडिटी बाजार में सोने की चाल भी प्रभावित हुई है। सोना एशियाई सत्र में अपनी पिछली बढ़त को गंवाते हुए 4,150 डॉलर प्रति औंस के करीब संघर्ष करता नजर आया। कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी के साथ-साथ डॉलर के मजबूत होने से पीली धातु पर दबाव बना है। अल्पकालिक तकनीकी दृष्टिकोण से सोने का रुख तेजी पर बिकवाली वाला बना हुआ है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति पर टिकी निगाहें
एशियाई बाजारों के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बुधवार को सुबह 10:00 बजे अपनी द्वैमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करने वाला है। इस साल अब तक ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने के बाद, केंद्रीय बैंक से इस बैठक में दर वृद्धि का नया चक्र शुरू करने की व्यापक उम्मीद की जा रही है। बाजार की आम सहमति के मुताबिक, आरबीआई अपनी प्रमुख रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25% से 5.5% कर सकता है।























