मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के एक गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 40 बच्चों ने अपने प्रिय शिक्षक का तबादला रुकवाने के लिए खुद मोर्चा संभाल लिया है। रूपनगर गांव के इस स्कूल के बच्चे अपने अभिभावकों को साथ लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचे और वहां शिक्षक बद्रीलाल राठौर का तबादला निरस्त करवाने के लिए जमकर प्रदर्शन किया। बच्चों ने साफ कह दिया है कि जब तक राठौर सर स्कूल में वापस नहीं लौटते, वे कक्षा में कदम नहीं रखेंगे।
तख्तियां लेकर स्कूल के बाहर डटे बच्चे
पिछले कई दिनों से रूपनगर के ये बच्चे स्कूल जाना पूरी तरह छोड़ चुके हैं और हाथों में तख्तियां थामे अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। इनमें से एक तख्ती पर लिखा नजर आया, हम अब स्कूल तभी जाएंगे, जब राठौर सर वापस रूपनगर आएंगे। कक्षा पांच में पढ़ने वाली छात्रा तन्वी ने कहा कि वह खुद राठौर सर का तबादला रुकवाने के इरादे से यहां आई है। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें शिक्षक के विदाई समारोह के वक्त कई बच्चे फूट-फूटकर रोते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो देखकर ही इस मामले ने और तूल पकड़ लिया।
जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी, एडीएम ने सुनी गुहार
जन सुनवाई के दौरान बच्चे और उनके अभिभावक जिलाधिकारी कार्यालय की सीढ़ियों के पास ही बैठ गए और जिलाधिकारी मिशा सिंह से सीधे मिलने की मांग करने लगे। हालांकि पूरी कोशिश के बावजूद उनकी जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं हो पाई। कुछ देर बाद अतिरिक्त जिलाधिकारी ब्रजेंद्र रावत मौके पर पहुंचे और उन्होंने बच्चों व अभिभावकों से विस्तार से बातचीत करते हुए उनकी पूरी बात सुनी।
आठ दिन की मोहलत, वरना टेंट लगाकर आंदोलन की चेतावनी
गुस्साए अभिभावकों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दे दी है कि अगर आठ दिन के भीतर राठौर का तबादला रद्द नहीं किया गया, तो वे जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में ही टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर देंगे। ग्रामीणों के मुताबिक राठौर ने अपनी जेब से पैसे खर्च करके स्कूल में कई तरह की सुविधाएं जुटाई हैं। उन्हीं के प्रयासों का नतीजा है कि स्कूल के बच्चों की गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों पर पकड़ पहले के मुकाबले काफी मजबूत हुई है, यही वजह है कि गांव वाले उन्हें खोना नहीं चाहते।
65 छात्रों वाले स्कूल से सिर्फ राठौर का ही तबादला क्यों
गांव के इस सरकारी स्कूल में फिलहाल करीब 65 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। राठौर के मुताबिक उनके संकुल में कुल 75 शिक्षक तैनात हैं, लेकिन प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर 30 जून को सिर्फ उन्हीं का तबादला पिपलोदा क्षेत्र के सेमलिया गांव में कर दिया गया। बच्चों और ग्रामीणों को यही बात खटक रही है कि जब संकुल में इतने सारे शिक्षक मौजूद हैं, तो आखिर सिर्फ राठौर को ही क्यों हटाया गया।
प्रशासन का भरोसा, सभी पक्षों से बात कर निकालेंगे रास्ता
अतिरिक्त जिलाधिकारी ब्रजेंद्र रावत ने कहा कि छात्रों और उनके अभिभावकों की बात पूरी गंभीरता से सुनी गई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों से भी चर्चा की जा चुकी है। रावत ने भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों से विचार-विमर्श करके इस मसले का कोई न कोई हल जरूर निकाला जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस पूरे विवाद और आंदोलन के बीच बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर किसी तरह का असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।











