पारंपरिक तमूरा की गूंज और बुंदेलखंड की माटी की खुशबू समेटे लोकगायक सुनील लोधी का जीवन आज हर संगीत प्रेमी के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुका है। ग्रामीण इलाकों में अपनी अनूठी शैली में भजन गाकर पहचान बनाने वाले इस कलाकार की आवाज अब सिनेमाघरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए पूरे देश में गूंज रही है। उनकी गायकी ने हर वर्ग के श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित किया है और उनकी कला की पहुंच अब बड़े स्तर पर स्थापित हो चुकी है।
बिना प्रचार के छा गया भजन
किसी बड़े शोर-शराबे के बिना रिलीज हुई फिल्म 'हनुमान अंश' का लोकप्रिय भजन 'मोरे संकट के कटैया' इंटरनेट पर आते ही तेजी से फैल गया। सोशल मीडिया पर इस गाने के छा जाने के बाद लोगों में इसके गायक के बारे में जानने की उत्सुकता जगी। जब लोगों ने खोजबीन की तो सामने आया कि इस अद्भुत भजन को बुंदेलखंड के प्रतिभाशाली लोकगायक सुनील लोधी ने अपनी आवाज दी है, जो संगीत साधना में पूरी तरह डूबे रहते हैं।
डिजिटल दुनिया में रिकॉर्ड सफलता
यूट्यूब पर इस भक्ति गीत को 30 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि इंस्टाग्राम पर इस पर अनगिनत रील्स बनाई जा चुकी हैं। तमूरा की सरल धुन पर गाए गए इस साधारण भजन ने न केवल आम नागरिकों का दिल जीता, बल्कि मायानगरी मुंबई के संगीत जगत तक अपनी मजबूत पैठ बना ली। सुनील दृष्टिबाधित जरूर हैं, लेकिन उनकी यह यात्रा किसी कमी की नहीं बल्कि उनकी असाधारण प्रतिभा और लगन की कहानी कहती है।
संगीत निर्माता तक ऐसे पहुंची आवाज
'मोरे संकट के कटैया' की अपार लोकप्रियता ने सुनील की सुरीली आवाज को उन तक भी पहुंचा दिया जो अब तक उनसे अनजान थे। यह आवाज संगीत निर्माता पंकज तक पहुंची और उन्होंने जैसे ही यह रिकॉर्डिंग सुनी, वह इस गहरी भक्ति और समर्पण से बेहद प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने सुनील को अपनी आने वाली फिल्म 'हनुमान अंश' में साथ जोड़ने का निर्णय लिया, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उनसे संपर्क कैसे स्थापित किया जाए।
इंदौर से मुंबई तक का सफर
पंकज ने काफी प्रयासों के बाद सुनील का संपर्क नंबर हासिल किया और उनसे फोन पर बातचीत की। एक अकेली कॉल ने इस लोकगायक की पूरी दुनिया बदल कर रख दी। अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों से पहली बार बाहर निकलते हुए सुनील सबसे पहले इंदौर पहुंचे और वहां से उनका रास्ता सीधे मुंबई तक जा पहुंचा। मुंबई के प्रसिद्ध 'साईं बाबा स्टूडियो' में कदम रखते ही उनके सपनों को नया आसमान मिला और उन्होंने वहां एक के बाद एक करीब आठ गाने रिकॉर्ड किए।
भक्ति गीतों की नई शुरुआत
इन रिकॉर्ड किए गए गानों में से नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' का बेहद चर्चित गाना 'मैंने तेरे ही भरोसे' अब आधिकारिक तौर पर रिलीज हो चुका है और दर्शकों के बीच अत्यधिक पसंद किया जा रहा है। इस गीत के सामने आने के बाद से सुनील को लगातार देश के कोने-कोने से बधाई संदेश मिल रहे हैं। जब उन्हें पता चला कि उनका यह गीत बॉलीवुड की बड़ी सफलताओं की सूची में शामिल हो चुका है, तो वे बेहद भावुक और आनंदित हो उठे।
आगे की बड़ी योजनाएं और इच्छाएं
अपनी इस शानदार सफलता से प्रेरणा लेते हुए सुनील आने वाले समय में संगीत की दुनिया में और भी ऊंचाइयां छूना चाहते हैं। उनकी प्रबल इच्छा है कि वे भविष्य में बॉलीवुड के नामचीन गायकों अरिजीत सिंह और जुबिन नौटियाल के साथ अपनी आवाज साझा करें। बुंदेलखंड की इस सरल माटी के कलाकार का यह पूरा संघर्ष यह साबित करता है कि यदि आपकी कला में सच्चाई है, तो सफलता खुद-ब-खुद आपका रास्ता बना लेती है।



















