भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे हुए हैं। इस सम्मेलन की शुरुआत के साथ ही किर्गिस्तान का स्वतंत्रता दिवस भी मनाया जा रहा है, जिस अवसर पर उन्होंने वहां के नागरिकों को संबोधित किया और पिछले पच्चीस वर्षों की यात्रा पर विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने आगामी पच्चीस वर्षों के लिए संगठन के लक्ष्यों और प्राथमिकताओं को भी देश के सामने रखा।
शंघाई सहयोग संगठन की पच्चीस साल की यात्रा
नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में शंघाई सहयोग संगठन के गठन के पच्चीस वर्ष पूरे होने पर खुशी जताई और इसे एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जापारोव का भव्य आतिथ्य और स्वागत के लिए विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। सम्मेलन के दौरान किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ का भी जिक्र किया गया और दोनों देशों की जनता को हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं।
साझा विरासत और सांस्कृतिक जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विश्व नोमाड गेम्स के उद्घाटन समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि वहां किर्गिस्तान की समृद्ध संस्कृति और दोनों देशों की साझा विरासत की साफ झलक देखने को मिली थी। यही मजबूत आपसी जुड़ाव और पुरानी संस्कृति इस संगठन की सबसे बड़ी ताकत है। पिछले ढाई दशकों में इस मंच ने यूरेशिया के बड़े भूभाग में संवाद और आपसी सहयोग की एक गहरी और मजबूत परंपरा को स्थापित किया है।
सुरक्षा और आतंकवाद पर दो टूक संदेश
मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि आपसी सहयोग को कागजी विजन से आगे बढ़ाकर जमीन पर ठोस परिणामों में बदला जाए। इसके लिए पहली और सबसे बड़ी जरूरत शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने आतंकवाद को पूरी मानवता के खिलाफ एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ लड़ाई में केवल प्रतिक्रियावादी सोच तक सीमित नहीं रहा जा सकता।
आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों के पूरे तंत्र को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया भर के देशों को एक सुर में बोलना होगा और इस गंभीर विषय पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं हो सकती। जो देश आतंकवाद को अपनी रणनीतिक नीति का साधन बनाते हैं और आतंकियों को संरक्षण देते हैं, उन्हें यह कड़ा संदेश देना जरूरी है कि आतंकवाद किसी के लिए भी कोई रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।
क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीति का महत्व
एक शांत और सुरक्षित यूरेशिया की आकांक्षा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से सीधे जुड़ी हुई है। भारत लगातार अफगानिस्तान के लोगों के विकास कार्यों में और मानवीय सहायता के जरिए अपना योगदान देता आया है और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा। इसके अलावा पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में सुरक्षा का दायरा बहुत व्यापक हो चुका है और किसी एक क्षेत्र का संघर्ष पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करता है।
आपसी संपर्क और कनेक्टिविटी के नए रास्ते
साझा विकास के दूसरे बड़े आधार के रूप में मजबूत और विश्वसनीय कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया। भारत उन तमाम पहलों का पूरा समर्थन करता है जो बाजारों को आपस में जोड़ती हैं और व्यापार को सुगम बनाती हैं। हालांकि, इन सभी प्रयासों के दौरान क्षेत्रीय अखंडता और देशों की संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाना बेहद आवश्यक है, जो कि संगठन के चार्टर की भी मूल भावना है। आने वाले समय में सड़कों, रेलवे और हवाई गलियारों के साथ सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने की आवश्यकता है।
युवाओं और लोगों के बीच आपसी संबंध
संगठन के सहयोग का मुख्य उद्देश्य सीधे तौर पर आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए क्योंकि सबसे बड़ी पूंजी लोगों के आपसी रिश्ते हैं। आने वाले समय में युवा जुड़ाव और नागरिक स्तर के संबंधों को केंद्र में रखना होगा। किर्गिस्तान की अध्यक्षता के दौरान युवा सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया है, जिसकी सराहना की गई। भारत की तरफ से स्टार्ट-अप फोरम, युवा लेखक सम्मेलन और युवा वैज्ञानिक मंच जैसी कई पहल पहले ही शुरू की जा चुकी हैं।



















