शाहरुख खान की मशहूर फिल्म ‘चक दे! इंडिया’ को सिनेमाघरों में आए हुए 19 साल पूरे हो गए हैं। साल 2007 में प्रदर्शित इस फिल्म ने बड़े पर्दे पर केवल हॉकी के खेल को ही नहीं दर्शाया, बल्कि टीम वर्क, कड़ी मेहनत और असफलता के बाद फिर से सफलता हासिल करने की प्रेरणादायक कहानी भी लोगों के सामने रखी। आज भी यह फिल्म दर्शकों के दिलों में एक खास जगह रखती है और उतनी ही चाव से देखी जाती है जितनी रिलीज के वक्त देखी जाती थी।
इस फिल्म की 19वीं वर्षगांठ के खास अवसर पर इसमें प्रीति सबरवाल की भूमिका अदा करने वाली अभिनेत्री सागरिका घाटगे ने पुरानी यादों के पिटारे को खोला। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक पोस्टर साझा किया, जिसमें शाहरुख खान के साथ फिल्म की अन्य स्टार कास्ट भी दिखाई दे रही है। उस पोस्टर पर ‘चक दे! इंडिया के 19 साल पूरे होने का जश्न’ का जिक्र किया गया है।
सगारिका घाटगे के लिए क्यों खास है यह फिल्म
सागरिका घाटगे के लिए यह फिल्म उनके करियर का सबसे अहम पड़ाव रही है क्योंकि इसी फिल्म के जरिए उन्होंने बॉलीवुड की दुनिया में अपना पहला कदम रखा था। इस स्पोर्ट्स ड्रामा में उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी प्रीति सबरवाल का किरदार निभाया था। परदे पर उनके इस अंदाज और अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा और इसी फिल्म की बदौलत उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एक नई और मजबूत पहचान मिली।
क्या थी फिल्म की कहानी और पृष्ठभूमि
इस बेहतरीन फिल्म का निर्देशन शिमित अमीन ने संभाला था, जबकि इसकी पटकथा और संवाद जयदीप साहनी द्वारा लिखे गए थे। फिल्म में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान ने कबीर खान नाम के कोच का किरदार निभाया था। कहानी के मुताबिक कबीर खान भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान रह चुके होते हैं, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ एक मुकाबले में हार मिलने के बाद उन पर देश के साथ गद्दारी करने जैसे गंभीर आरोप मढ़ दिए जाते हैं। इस बदनामी के बाद उनका खेल का सफर लगभग समाप्त हो जाता है और वह खेल की दुनिया से लंबे अरसे तक दूर रहते हैं।
हालांकि जीवन एक और मौका देता है और लगभग सात साल बाद कबीर खान की वापसी होती है। उन्हें खुद को निर्दोष साबित करने और अपनी खोई हुई इज्जत वापस पाने के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम की कमान सौंपी जाती है और उन्हें कोच बनाया जाता है। उस टीम में देश के विभिन्न कोनों से चुनकर आई 16 अलग-अलग खिलाड़ी शामिल होती हैं। हर खिलाड़ी का अपना अलग स्वभाव और अपनी व्यक्तिगत समस्याएं होती हैं, जिसके कारण शुरुआत में टीम के भीतर तालमेल बिठाना बहुत मुश्किल साबित होता है और खिलाड़ियों के बीच मनमुटाव भी साफ देखने को मिलता है।



















