मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक जिले बुरहानपुर में मानसून का आगमन अपने साथ कई पारंपरिक और लजीज व्यंजनों की सौगात लेकर आता है। जब आसमान से बारिश की बूंदें बरसती हैं, तो लोगों का मन गरमा गरम और चटपटा नाश्ता करने के लिए मचल उठता है। बुरहानपुर में इस मौसम में उड़द की हरी फलियों से तैयार की जाने वाली टिकिया स्थानीय लोगों की पहली पसंद बन जाती है। अपने अनूठे और लजीज स्वाद के कारण यह डिश यहाँ की सांस्कृतिक और खानपान की पहचान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
बारिश के मौसम की खास सौगात और जरूरी सामग्री
जैसे ही मानसून की पहली फुहारें गिरती हैं, स्थानीय बाजारों में उड़द की ताजी, हरी और गीली फलियां प्रचुर मात्रा में मिलने लगती हैं। बुरहानपुर के स्थानीय घरों में इन ताजी फलियों की मदद से बेहद स्वादिष्ट और कुरकुरी टिकिया बनाई जाती हैं। इस पारंपरिक डिश की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए बहुत ज्यादा तड़क-भड़क या महंगी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती है। इस व्यंजन को बेहद सरल और घर में आसानी से उपलब्ध होने वाली सामग्री से बनाया जाता है। इसमें मुख्य रूप से उड़द की गीली फल्ली, अदरक और लहसुन का पेस्ट, बारीक कटी हरी मिर्च, ताजी हरी धनिया पत्ती, स्वादानुसार नमक और तलने के लिए थोड़ा सा तेल इस्तेमाल किया जाता है।
बनाने का आसान तरीका, एक्सपर्ट की जुबानी
स्थानीय व्यंजन की इस अनूठी रेसिपी को लेकर एक्सपर्ट महिला वंदना ने विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस पारंपरिक टिकिया को बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है और इसे कोई भी आसानी से घर पर बना सकता है। सबसे पहले बाजार से लाई गई उड़द की ताजी फलियों को अच्छी तरह से साफ कर लिया जाता है और साफ पानी से दो से तीन बार धोया जाता है। इसके बाद इन फलियों को जरूरत के अनुसार पीसकर या दरदरा करके तैयार किया जाता है।
अब तैयार की गई इन फलियों में अदरक और लहसुन का पेस्ट, बारीक कटी हुई हरी मिर्च, बारीक कटी ताजी हरी धनिया पत्ती और स्वाद के अनुसार नमक मिलाया जाता है। इन सभी सामग्रियों को एक बड़े बर्तन में डालकर अच्छी तरह मिला लिया जाता है ताकि सारे मसालों का स्वाद आपस में अच्छी तरह घुल-मिल जाए। जब यह मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाता है, तो इसकी छोटी-छोटी गोल टिकिया बना ली जाती हैं। इसके बाद गैस पर एक कड़ाही या तवे में थोड़ा सा कुकिंग ऑयल डालकर गर्म किया जाता है। तेल गर्म होने पर इन टिकियों को मध्यम आंच पर धीरे-धीरे पकाया जाता है। टिकियों को दोनों तरफ से तब तक सेंका जाता है जब तक कि वे हल्की सुनहरी और बाहर से कुरकुरी न हो जाएं। अच्छी तरह सिकने के बाद इन्हें गरमा गरम प्लेट में निकाला जाता है और तीखी हरी चटनी या अपनी किसी भी पसंदीदा चटनी के साथ परोसा जा सकता है।
स्वाद और सेहत का बेहतरीन संतुलन
बुरहानपुर के स्थानीय निवासियों के अनुसार, बारिश के दिनों में मिलने वाली हरी उड़द की फलियों के कारण इस टिकिया का स्वाद बेहद लाजवाब और अनोखा होता है। यही वजह है कि मानसून की शुरुआत होते ही बुरहानपुर के अधिकांश घरों में उड़द की टिकिया बनाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। यह एक ऐसी डिश है जो पारंपरिक होने के साथ-साथ घर के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को बेहद पसंद आती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी खाद्य पदार्थ के सेहत से जुड़े फायदे व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य और उसकी खाने की मात्रा पर निर्भर करते हैं, इसलिए इसे संतुलित आहार के रूप में सीमित मात्रा में खाना सेहत के लिए अधिक फायदेमंद होता है। यदि आप भी बुरहानपुर के इस स्थानीय और पारंपरिक स्वाद का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो इस आसान रेसिपी की मदद से मानसून के इस सुहावने मौसम में उड़द की फली की गर्मागर्म टिकिया अपने घर पर जरूर ट्राई करें।


















