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एक फोन कॉल और 10 साल का संघर्ष, भोजपुरी गायिका देवी ने सिंगल मदर बनने की पूरी कहानी की शेयरमनोरंजन
24 अक्तू॰ 2026, 12:32 am (1 घंटे पहले)· 2

एक फोन कॉल और 10 साल का संघर्ष, भोजपुरी गायिका देवी ने सिंगल मदर बनने की पूरी कहानी की शेयर

भोजपुरी गायिका देवी ने अपने संघर्ष और सिंगल मदर बनने के सफर के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि कैसे जर्मनी से एक दोस्त के फोन ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।

जमुई की रहने वाली और भोजपुरी संगीत जगत की जानी-मानी पार्श्व गायिका देवी का जीवन एक सिंगल फोन कॉल से पूरी तरह बदल गया था। जब वह अपने जीवन में आगे बढ़ने के नए रास्ते तलाश रही थीं, तब जर्मनी से उनकी एक दोस्त का फोन आया और यहीं से उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ। देवी एक सिंगल मदर हैं और उन्होंने आईवीएफ तकनीक के जरिए बच्चे को जन्म दिया है। इस बड़े फैसले के पीछे उनके 10 साल का लंबा संघर्ष और प्रयास शामिल रहे हैं।

आईवीएफ तकनीक और जर्मनी का वह अहम फोन कॉल

गायिका देवी ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे के लिए पूरे 10 साल तक लगातार प्रयास किया था। उन्होंने साल 2015 में अपना पहला प्रयास किया था, लेकिन वह असफल साबित हुआ था। कई बार जीवन में ऐसा दौर आता है कि आपको अपनी पसंद का कोई ऐसा जीवनसाथी नहीं मिल पाता है जिसके साथ आप अपना भविष्य बिताना चाहें। ऐसे में उन्होंने अकेले ही आगे बढ़ने का फैसला किया। इसी असमंजस के बीच जर्मनी से उनकी सहेली का फोन आया और उसने जानकारी दी कि जर्मनी में आईवीएफ के माध्यम से कोई भी महिला सिंगल मदर बन सकती है। उस समय भारत में इस तरह की आधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी, इसलिए वह जर्मनी गईं और लगातार 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अपने बच्चे को जन्म दिया।

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फैसलों पर पछतावा नहीं और गलतियों से सीख

देवी का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में लिए गए किसी भी निर्णय पर कभी कोई पछतावा नहीं किया है। अगर कभी उनके मन में यह विचार आया भी कि क्या उन्होंने कोई गलत फैसला लिया है, तो उनका यही मानना होता है कि वह घटना उसी समय घटित होनी तय थी, इसलिए वह फैसला उनके द्वारा लिया गया। उन्होंने कभी भी अपने अतीत के फैसलों को लेकर अत्यधिक तनाव नहीं लिया। उनका मानना है कि गलतियां इंसान के जीवन के लिए बहुत जरूरी होती हैं क्योंकि हर बुराई या समस्या के पीछे कुछ अच्छा छिपा होता है। जीवन बेहतर होना चाहिए, वह हमेशा इसी बात पर ध्यान केंद्रित करती हैं। उनका यह भी कहना है कि यदि कोई व्यक्ति कभी कोई गलत कदम उठा लेता है, तो वह उससे सीखता है और भविष्य में उसे सुधारने का मौका पाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनका जीवन काफी उलझा हुआ जरूर रहा है, लेकिन उन्हें कभी बहुत अधिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा।

संगीत की दुनिया में बदलाव और शुरुआती सफर

अपने शुरुआती करियर के दिनों को याद करते हुए देवी ने बताया कि साल 2003 में उनका पहला एल्बम रिलीज हुआ था, उस दौर में कलाकारों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। किसी भी संगीतकार या गायक को अपना एल्बम बाजार में लाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी और अलग-अलग कंपनियों के कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन आज समय पूरी तरह बदल चुका है। आधुनिक युग में सोशल मीडिया आम आदमी की मुट्ठी में है और कलाकार अपनी कला को सीधे दर्शकों और श्रोताओं तक पहुंचा पाते हैं, जो कि संगीत उद्योग में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन है। उन्होंने अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए बताया कि उनके माता और पिता दोनों ही प्रोफेसर थे और संगीत के बहुत बड़े प्रेमी थे। उनके घर में बचपन से ही संगीत का एक समृद्ध माहौल बना रहा था। उन्होंने महज 6 साल की उम्र में पहली बार किसी मंच पर अपनी प्रस्तुति दी थी और तब से लेकर आज तक वह लगातार संगीत की दुनिया से जुड़ी हुई हैं। महज 15 साल की उम्र में उनका पहला एल्बम आया था और इन 23 सालों के लंबे सफर में उन्होंने यही अनुभव किया है कि जो भी अच्छी चीजें होती हैं, वे हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहती हैं।

पिता का मार्गदर्शन और मातृत्व का अनमोल अहसास

देवी के जीवन में उनके पिता की भूमिका बेहद अहम रही है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में उनके पिता का बहुत बड़ा योगदान है जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और उनका भरपूर समर्थन किया, खासकर जीवन के हर मुश्किल पहलू में उनके पिता हमेशा उनके साथ खड़े रहे। मातृत्व के सुख पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मां बनने का अनुभव बेहद अद्भुत और अलौकिक है। एक महिला के लिए मां बनने की भावना को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। बच्चों के साथ इंसान का एक ऐसा रिश्ता जुड़ता है जिसमें किसी भी प्रकार की कोई उम्मीद या अपेक्षा नहीं होती है। इंसान केवल अपने बच्चों को सब कुछ देना चाहता है। उन्होंने समझाया कि जब आप किसी अन्य वयस्क व्यक्ति से प्रेम करते हैं तो उसमें कहीं न कहीं कुछ अपेक्षाएं जुड़ जाती हैं, लेकिन बच्चों के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं होता। बच्चे इतने मासूम और भोले होते हैं कि आप हमेशा उन्हें अपने दिल से जुड़े रखते हैं। इसके साथ ही उन्होंने जमुई शहर से अपने विशेष लगाव का भी जिक्र किया। लगभग 10 साल पहले उन्होंने यहां एक ऐसा विशाल कार्यक्रम किया था जो उनके जीवन का सबसे बड़ा और सबसे खास आयोजन था, जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए थे और आज भी वह सुनहरा समय उन्हें अच्छी तरह याद है।

सवाल-जवाब

भोजपुरी गायिका देवी ने बच्चे को जन्म देने के लिए कौन सी तकनीक अपनाई?
देवी ने आईवीएफ तकनीक के जरिए सिंगल मदर के रूप में बच्चे को जन्म दिया है।
देवी ने मां बनने के लिए कितने वर्षों तक प्रयास किया?
उन्होंने बच्चे के लिए पूरे 10 वर्षों तक लगातार प्रयास किया और साल 2015 में अपना पहला असफल प्रयास किया था।
देवी को सिंगल मदर बनने का विचार कहां से आया?
जर्मनी में रहने वाली उनकी एक दोस्त ने फोन पर उन्हें जानकारी दी थी कि जर्मनी में आईवीएफ के जरिए कोई भी सिंगल मदर बन सकता है।
गायिका देवी का पहला एल्बम कब आया था?
उनका पहला एल्बम साल 2003 में रिलीज हुआ था जब वह 15 वर्ष की थीं।
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टिप्पणियाँ 2

Tanvi Desai@tanvi-desai·48 मिनट पहले

सिंगल मदर बनने का देवी जी का यह सफर वाकई बहुत हिम्मत वाला है। दस साल का संघर्ष और जर्मनी जाकर आईवीएफ का रास्ता चुनना आसान नहीं रहा होगा। उनकी यह बेबाकी और बिना किसी पछतावे के जीने की सोच बहुत लोगों को हौसला देगी।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·48 मिनट पहले

तनوی जी, बिल्कुल सही कहा आपने। मैंने खुद अपनी एक दोस्त को आईवीएफ के इस लंबे और थका देने वाले दौर से गुजरते देखा है, जिसमें सचमुच बहुत हिम्मत चाहिए होती है।

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