भारतीय सिनेमा में कई ऐसी प्रतिभाएं हैं जिन्होंने पारंपरिक सिनेमाई घरानों से बाहर निकलकर अपनी मेहनत के दम पर विशिष्ट मुकाम हासिल किया है। रकुल प्रीत सिंह भी उन्हीं कलाकारों में शुमार हैं, जिनका जीवन अनुशासन, उच्च शिक्षा और कलात्मक विविधता का एक अनूठा उदाहरण पेश करता है। 10 अक्टूबर 1990 को देश की राजधानी नई दिल्ली के एक पंजाबी सिख परिवार में जन्मी रकुल शनिवार को जीवन के 36वें पड़ाव पर कदम रख रही हैं। उनके पिता राजेंद्र सिंह भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जबकि मां कुलविंदर सिंह एक गृहिणी हैं। परिवार में उनका एक छोटा भाई अमनप्रीत सिंह भी है, जिसके साथ वह गहरा पारिवारिक और कामकाजी तालमेल रखती हैं।
फौजी अनुशासन और गणित के समीकरणों से शुरू हुआ सफर
सैन्य परिवेश में पले-बढ़े होने के कारण अनुशासन रकुल के व्यक्तित्व का अटूट हिस्सा शुरू से ही रहा। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा नई दिल्ली के धौलाकुआं में स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल से पूरी की। स्कूल के दिनों के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित जीसस एंड मैरी कॉलेज में दाखिला लिया। यहां उन्होंने बीएससी मैथ्स ऑनर्स की पढ़ाई पूरी कर विज्ञान स्नातक की उपाधि प्राप्त की। संख्याओं और जटिल समीकरणों को सुलझाने में दक्ष रकुल का झुकाव धीरे-धीरे अभिनय और ग्लैमर की दुनिया की ओर भी बढ़ता गया, जिसके बाद उन्होंने फिल्मों का रुख करने का फैसला किया।
क्षेत्रीय सिनेमा से बॉलीवुड के मुख्य मंच तक विस्तार
अभिनय की दुनिया में रकुल प्रीत सिंह की शुरुआत किसी हिंदी परियोजना से नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा से हुई थी। उन्होंने वर्ष 2009 में कन्नड़ भाषा की फिल्म ‘गिल्ली’ के जरिए कैमरे के सामने अपना पहला कदम रखा। इसके कुछ वर्षों बाद, 2013 में प्रदर्शित हुई तेलुगु फिल्म ‘वेंकटद्री एक्सप्रेस’ उनके करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई। इस फिल्म की अपार सफलता ने उन्हें दक्षिण भारत में घर-घर में एक जाना-पहचाना चेहरा बना दिया। इसके ठीक अगले वर्ष यानी 2014 में उन्होंने फिल्म ‘यारियां’ के जरिए हिंदी सिनेमा में अपने सफर का विधिवत श्रीगणेश किया। इसके बाद उन्होंने ‘दे दे प्यार दे’ और ‘रनवे 34’ जैसी उल्लेखनीय फिल्मों में केंद्रीय भूमिकाएं निभाकर दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया।
साउथ से नॉर्थ तक तीन दर्जन से अधिक प्रोजेक्ट्स
अपने एक दशक से भी ज्यादा लंबे पेशेवर सफर के दौरान उन्होंने 35 से अधिक फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। उनकी चर्चित फिल्मों की सूची में ‘दे दे प्यार दे 2’, ‘मरजावां’, ‘डॉक्टर जी’, ‘कटपुतली’, ‘थैंक गॉड’, ‘छत्रीवाली’, ‘मेरे हस्बैंड की बीवी’ और ‘पत्ती पत्नी और वो दो’ जैसी रचनाएं शामिल हैं। उन्होंने केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि तमिल और तेलुगु भाषाओं के बड़े प्रोजेक्ट्स में भी लगातार काम किया। उनके उत्कृष्ट अभिनय प्रदर्शन के लिए उन्हें साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवॉर्ड्स यानी एसआईआईएमए सहित कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा जा चुका है। सिनेमाई गतिविधियों के अलावा उन्होंने सामाजिक सरोकारों में भी योगदान दिया और वह तेलंगाना में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पहल की ब्रांड एंबेसडर की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं।
खेल का मैदान, फिटनेस स्टूडियो और नया वैवाहिक जीवन
सिल्वर स्क्रीन पर दिखने वाली चमक-दमक के पीछे एक समर्पित एथलीट का रूप भी छिपा है। बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि रकुल कराटे में ब्लू बेल्ट धारक हैं और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर गोल्फ प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया है। फिटनेस के प्रति अपनी इसी दीवानगी को उन्होंने उद्यम का रूप दिया। वह अपने भाई अमन के साथ मिलकर हैदराबाद और विशाखापत्तनम में ‘एफ45 ट्रेनिंग’ नाम से जिम स्टूडियो की पूरी श्रृंखला संचालित करती हैं। निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने फिल्म निर्माता जैकी भगनानी के साथ अपने संबंध को वर्ष 2021 में औपचारिक रूप से सार्वजनिक किया था। इसके बाद दोनों ने 21 फरवरी 2024 को गोवा में पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह कर लिया। विवाह से पहले उनका मुख्य बसेरा हैदराबाद में था, लेकिन अब वह अपने पति के साथ मुंबई में निवास करती हैं।



















