नई दिल्ली। अभिनेत्री दिव्या दत्ता की फिल्म लास्ट मैन इन टावर सिनेमाघरों में आ चुकी है और दर्शकों से इस प्रोजेक्ट को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। इस बीच अभिनेत्री ने अभिनय के तकनीकी पहलुओं और अपने शुरुआती करियर के अनुभवों को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा की हैं। फिल्म के प्रचार अभियान के सिलसिले में बात करते हुए उन्होंने अपने सह-कलाकार मनोज बाजपेयी और निर्देशक बेन रेखी के साथ अभिनय कला के विभिन्न आयामों पर खुलकर चर्चा की।
सीखने के शुरुआती दिन और सीनियर्स का साथ
एक बातचीत के दौरान अभिनेत्री ने बताया कि जब उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा था, तब उन्हें कैमरे के सामने तकनीकी बारीकियों की समझ नहीं थी। वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की कोशिश करती थीं, लेकिन कई बार वह फ्रेम या स्क्रीन पर उस रूप में दिखाई नहीं देता था जैसा होना चाहिए था। इस मुश्किल दौर में उनके वरिष्ठ कलाकारों ने उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें समझाया कि बेहतरीन प्रदर्शन के साथ-साथ तकनीकी पहलुओं को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि वह खुद को बेहद खुशनमत मानती हैं कि उन्हें ऐसे मार्गदर्शक मिले जिन्होंने उनका साथ दिया।
सहजता और तकनीकी संतुलन का महत्व
दिव्या दत्ता का मानना है कि समय के साथ अभ्यास और अनुभव से ये गुर खुद-ब-खुद आ जाते हैं। कलाकारों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पहले अपनी संवाद अदायगी और तकनीकी पक्षों को मजबूत कर लेना चाहिए, और जब एक बार आप कैमरे के सामने आ जाएं तो पूरी तरह से उस किरदार और पल में डूब जाएं। जब आप अपने सह-कलाकार की आंखों में देखकर संवाद बोलते हैं, तो हर टेक में एक अलग और अनूठी ऊर्जा पैदा होती है।
भावनाओं के प्राकृतिक प्रवाह पर जोर
अभिनय में दायरे बांधने की प्रवृत्ति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भावनाओं के स्तर में उतार-चढ़ाव होना स्वाभाविक है और कई बार यह कलाकारों को भी हैरान कर देता है। यदि कोई कलाकार अपने अभिनय को एक तय दायरे में बांध लेता है या सिर्फ एक ही सुर में रहने की कोशिश करता है, तो उसका काम सीमित हो जाता है। इसलिए अभिनय को कृत्रिम रूप से रोकने के बजाय उसे सहजता से बहने देना चाहिए।
अरविंद अडिगा के उपन्यास पर आधारित है कहानी
यह फिल्म मशहूर लेखक अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है, जिसकी पटकथा तेजी से बदल रहे मुंबई शहर की पृष्ठभूमि पर बुनी गई है। इस कहानी में मनोज बाजपेयी ने एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक का किरदार निभाया है जो एक पुरानी आवासीय इमारत में निवास करता है। जब एक रईस बिल्डर उस इलाके के लोगों को भारी-भरकम रकम का लालच देकर पुरानी बिल्डिंग गिराकर वहां आधुनिक टावर खड़ा करना चाहता है, तो अधिकांश लोग पैसों के मोह में हामी भर देते हैं। लेकिन मनोज बाजपेयी का किरदार उस प्रस्ताव को ठुकरा देता है और इस तरह वह इस महत्वाकांक्षी पुनर्विकास परियोजना के रास्ते में एकमात्र अड़चन बन जाता है।


















