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नीम करोली बाबा की बेटी गिरिजा जी को खूब भाई फिल्म 'हनुमान अंश', निर्माता रागिनी सोना ने साझा की भावुक मुलाकातमनोरंजन
20 सित॰ 2026, 9:49 pm (37 दिन पहले)· 1

नीम करोली बाबा की बेटी गिरिजा जी को खूब भाई फिल्म 'हनुमान अंश', निर्माता रागिनी सोना ने साझा की भावुक मुलाकात

फिल्म 'हनुमान अंश' की निर्माता रागिनी सोना ने बताया कि नीम करोली बाबा की बेटी गिरिजा जी इस फिल्म को करीब 15 बार देख चुकी हैं और हर बार भावुक हो जाती हैं।

सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच चर्चा बटोर रही फिल्म 'हनुमान अंश' से जुड़ा एक बेहद भावुक और हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया है। फिल्म की निर्माता रागिनी सोना ने इस आध्यात्मिक प्रोजेक्ट से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि नीम करोली बाबा की सुपुत्री गिरिजा जी, जिन्हें श्रद्धालु प्यार से अम्मा जी कहते हैं, इस फिल्म को अब तक तकरीबन 15 बार देख चुकी हैं। निर्माता के अनुसार, जब भी वह पर्दे पर इस कहानी को देखती हैं, उनकी आंखें आंसुओं से छलक उठती हैं। इस मुलाकात के दौरान अम्मा जी ने रागिनी के परिवार से जुड़े पचास दशक पुराने ऐसे विवरण भी साझा किए, जिसे सुनकर फिल्म की पूरी टीम स्तब्ध रह गई।

रिलीज से पहले आशीर्वाद लेने की जद्दोजहद

रागिनी सोना और फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के मन में काम शुरू करने से पहले ही यह स्पष्ट विचार था कि वे नीम करोली बाबा के परिवार से संपर्क करेंगे। दोनों की दिली ख्वाहिश थी कि इस महत्वपूर्ण सिनेमाई सफर की शुरुआत से पूर्व उन्हें बाबा की बेटी गिरिजा जी का पावन आशीर्वाद प्राप्त हो। हालांकि, उनसे संपर्क साधना कतई आसान नहीं था। काफी प्रयासों और लंबी मशक्कत के बाद आखिरकार फोन पर दोनों की बातचीत अम्मा जी से संभव हो पाई। जब रागिनी और विशाल ने उनसे आग्रह किया कि वे इस फिल्म को जरूर देखें, तो अम्मा जी ने सहजता से उत्तर दिया कि जब भी उन्हें फुर्सत मिलेगी, वे इसे अवश्य देखेंगी। समय बीतने के साथ यह जुड़ाव इतना गहरा हुआ कि अम्मा जी ने इस रचना को लगभग 15 बार देखा और हर बार उनके भीतर गहरी आध्यात्मिक भावनाएं उमड़ पड़ीं।

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पचास साल पुरानी बातें और पिता का नाम

इस संवाद के दौरान अम्मा जी ने जब यह सवाल किया कि आखिर इस विषय पर फिल्म तैयार करने की प्रेरणा कहां से मिली, तो रागिनी सोना ने अपने बचपन का संस्मरण साझा किया। रागिनी ने बताया कि जब वह मात्र छह वर्ष की नन्हीं बालिका थीं, तब उन्हें साक्षात नीम करोली बाबा के दर्शन का सौभाग्य मिला था। वहीं, निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म के निर्माण में किए गए गहन शोध और ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जब बातचीत के क्रम में रागिनी ने उल्लेख किया कि उनके पिता की तैनाती नैनीताल में रही थी, तब अम्मा जी ने बिना किसी पूर्व जानकारी के उनके पिता का नाम तुरंत बता दिया। अम्मा जी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने रागिनी के पुराने आवास का सटीक पता और उनके बड़े भाई का जिक्र भी खुद अपनी जुबानी किया, जबकि यह पूरा प्रसंग करीब 50 साल पुराना था।

सादगी से भरा परिवार और अलौकिक अनुभव

अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान रागिनी सोना की भेंट नीम करोली बाबा के पोते धनंजय जी से भी हुई। उन्होंने अनुभव किया कि बाबा का समूचा परिवार आज भी उसी असाधारण सादगी और विनम्रता के साथ जीवन यापन कर रहा है, जो कभी खुद बाबा की पहचान हुआ करती थी। रागिनी ने कहा कि बाबा के परिजनों से मिलना और उनका स्नेह पाना उनके जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य है। गिरिजा जी से अपनी पहली आमने-सामने की मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अम्मा जी के दर्शन करते ही ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात नीम करोली बाबा की दिव्य छवि ही सामने उपस्थित हो। रागिनी ने यह भी स्वीकारा कि इस मुलाकात से पूर्व उन्हें इस बात की तनिक भी जानकारी नहीं थी कि बाबा की कोई बेटी भी संसार में मौजूद हैं।

सवाल-जवाब

फिल्म 'हनुमान अंश' की निर्माता कौन हैं?
इस फिल्म की निर्माता रागिनी सोना हैं, जिन्होंने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम किया है।
नीम करोली बाबा की बेटी गिरिजा जी ने फिल्म कितनी बार देखी है?
रागिनी सोना के अनुसार, गिरिजा जी (अम्मा जी) इस फिल्म को अब तक लगभग 15 बार देख चुकी हैं।
अम्मा जी ने रागिनी के परिवार के बारे में क्या बताया?
अम्मा जी ने रागिनी के पिता का नाम, उनके पुराने घर का पता और उनके बड़े भाई का जिक्र बिना किसी को बताए खुद याद कर दिया।
रागिनी सोना नीम करोली बाबा के परिवार के किस अन्य सदस्य से मिलीं?
रागिनी सोना ने नीम करोली बाबा के पोते धनंजय जी से भी मुलाकात की और उनके परिवार की सादगी की प्रशंसा की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·37 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे सिनेमा केवल मनोरंजन न रहकर आध्यात्मिक जुड़ाव का माध्यम बन सकता है। जब किसी फिल्म से जुड़ा ऐसा गहरा भावनात्मक जुड़ाव सामने आता है, तो वह पारंपरिक जनसंपर्क रणनीतियों से कहीं अधिक प्रभावी रूप से दर्शकों को आकर्षित करता है। इस तरह के व्यक्तिगत और अलौकिक अनुभव आने वाले समय में दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में एक मजबूत भावनात्मक ट्रिगर का काम करेंगे।

Tanvi Desai@tanvi-desai·37 दिन पहले

नीम करोली बाबा से जुड़े इस आध्यात्मिक सिनेमाई प्रोजेक्ट को लेकर जिस तरह का भावनात्मक जुड़ाव सामने आया है, वह डिजिटल और ओटीटी दौर में एक अनूठा ट्रेंड बनता जा रहा है। आज के समय में जहाँ दर्शक तार्किकता और विजुअल स्पेक्टेकल की मांग करते हैं, वहीं ऐसी आस्था-आधारित कहानियाँ पारंपरिक और स्ट्रीमिंग स्पेस दोनों पर एक नया दर्शक वर्ग तैयार कर रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि आध्यात्मिक और संस्मरण-आधारित विषय आने वाले समय में मनोरंजन उद्योग के लिए एक मजबूत और टिकाऊ कंटेंट वर्टिकल के रूप में उभर सकते हैं।

Vikram Yadav@vikram-yadav·37 दिन पहले

तन्वी जी के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि जब कोई आध्यात्मिक फिल्म इस तरह के गहरे व्यक्तिगत और पारिवारिक संस्मरणों से जुड़ती है, तो इसका प्रभाव सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता। नीम करोली बाबा जैसे सम्मानित आध्यात्मिक व्यक्तित्वों और उनके परिवार के प्रति दर्शकों की गहरी श्रद्धा इस प्रकार के सिनेमा को एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप दे देती है। आने वाले समय में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कहानियाँ न केवल बॉक्स ऑफिस पर मजबूत स्थिति बनाएँगी, बल्कि पारंपरिक मान्यताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेंगी।

Aisha Khan@aisha-khan·37 दिन पहले

नीम करोली बाबा से जुड़े आध्यात्मिक प्रोजेक्ट्स और पारिवारिक संस्मरणों का इस तरह से चर्चा में आना फिल्म के लिए एक बेहतरीन ऑर्गेनिक पब्लिसिटी साबित हो रहा है। गिरिजा जी द्वारा इसे बार-बार देखा जाना और दशकों पुरानी व्यक्तिगत जानकारियों का सामने आना, दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर जिज्ञासा और विश्वास को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे बॉक्स ऑफिस पर इसकी लंबी पारी खेलने की उम्मीद मजबूत होती है।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·37 दिन पहले

आयशा की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह के भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव से बनी माउथ-पब्लिसिटी अक्सर पारंपरिक विज्ञापनों से ज्यादा असरदार साबित होती है। जब किसी प्रतिष्ठित आध्यात्मिक परिवार से ऐसा गहरा जुड़ाव जुड़ जाता है, तो यह फिल्म को केवल एक मनोरंजन माध्यम न रखकर एक विश्वास का प्रतीक बना देता है। इससे सप्ताहांत के बाद भी वीकडेज में सिनेमाघरों में दर्शकों की स्थिर उपस्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी, जो बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की सस्टेनेबिलिटी के लिए बेहद जरूरी है।

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