दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलज' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विनीत जिंदल ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि फिल्म के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। विनीत जिंदल के अनुसार, उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से संदेश और अनजान नंबरों से कॉल आ रहे हैं, जिनमें उन्हें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह जैसा हश्र करने की चेतावनी दी गई है। इन धमकियों के बाद विनीत जिंदल ने सबूतों समेत दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।
कानूनी कार्रवाई की मांग
विनीत जिंदल ने इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय से फिल्म 'सतलज', कलाकार दिलजीत दोसांझ और ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। उनकी मुख्य आपत्ति यह है कि यह फिल्म पंजाब में उग्रवाद के दौर को एकपक्षीय तरीके से प्रस्तुत करती है, जिससे समाज में अलगाववादी विचारधारा को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने फिल्म के कंटेंट को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसके कारण यह मामला कानूनी पचड़ों में फंस गया है।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका
इस बीच, फिल्म को जी5 प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के कदम को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया गया है। मोहाली निवासी सरवन सिंह ने एक जनहित याचिका दाखिल की है, जिसमें फिल्म को बिना किसी स्पष्ट कारण के हटाए जाने पर सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि लंबे सेंसर विवाद और कई बदलावों को पूरा करने के बाद फिल्म को 3 जुलाई 2026 को जी5 पर स्ट्रीम किया गया था। हालांकि, महज दो दिन बाद 5 जुलाई को इसे बिना किसी सरकारी निर्देश या अदालत के आदेश के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। याचिकाकर्ता के वकील हाकम सिंह का तर्क है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है और दर्शकों के अधिकारों का हनन है। इस मामले में केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है।
फिल्म का अतीत और भविष्य
फिल्म 'सतलज', जो पहले 'पंजाब 95' के नाम से जानी जाती थी, मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के साथ हुए लंबे विवाद के बाद इसका नाम बदला गया था। हालांकि, वर्तमान में फिल्म को हटाने का असली कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाया है, हालांकि केंद्र सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति गठित की है। जी5 का कहना है कि मौजूदा स्थितियों के मद्देनजर फिल्म को केवल अस्थायी रूप से हटाया गया है और वे इसे वापस लाने के लिए कानूनी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हाईकोर्ट इस विवाद को लेकर क्या निर्णय देता है।











