बॉलीवुड की चर्चित फिल्म 'कांटे' से जुड़े कई किस्से इंडस्ट्री में मशहूर हैं, लेकिन अब म्यूजिक कंपोजर और गीतकार आनंद राज आनंद ने इस फिल्म के संगीत को लेकर एक नया राज खोला है। एक हालिया चर्चा के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि मूल रूप से फिल्म 'कांटे' का निर्माण बिना किसी गाने के करने का इरादा था। फिल्म की पटकथा और इसके गंभीर मिजाज को देखते हुए मेकर्स को लगा था कि इसमें गानों की कोई जगह नहीं है। हालांकि, अभिनेता संजय दत्त की व्यक्तिगत रुचि और उनके सुझावों ने फिल्म की पूरी दिशा ही बदल दी, जिसके बाद फिल्म में गानों को शामिल करने का निर्णय लिया गया।
संजय दत्त ने निभाई अहम भूमिका
आनंद राज आनंद ने एक शो के दौरान बताया कि 'कांटे' के शुरुआती दौर में फिल्म में गानों की बिल्कुल गुंजाइश नहीं थी। इसका मुख्य कारण यह था कि फिल्म के सभी मुख्य किरदार 45 साल से अधिक उम्र के थे और कहानी में किसी भी अभिनेत्री के लिए स्थान नहीं था। इस वजह से मेकर्स को लग रहा था कि गाने कहानी की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं। आनंद राज आनंद ने बताया कि उन्होंने संजय गुप्ता को सुझाव दिया था कि संजय दत्त को सूफी संगीत काफी पसंद है, इसलिए उनके लिए एक महफिल का आयोजन किया जाना चाहिए। 'रामा रे' गाना ही वह शुरुआती मोड़ था, जिसने फिल्म में संगीत की गुंजाइश पैदा की और धीरे-धीरे ये गाने फिल्म का एक अहम हिस्सा बन गए।
निर्माता और अभिनेता के बीच का मतभेद
संगीतकार ने आगे बताया कि उस समय निर्माता संजय गुप्ता इस बात को लेकर काफी दुविधा में थे कि फिल्म के कड़क और सस्पेंस भरे माहौल में गाने कैसे फिट बैठेंगे। संजय गुप्ता को इस पर भरोसा नहीं हो रहा था कि ये गाने फिल्म के साथ न्याय कर पाएंगे। इसके उलट, संजय दत्त को इन धुनों पर पूरा यकीन था। आनंद राज आनंद ने जब संजय दत्त को 'इश्क समुंदर' और 'माही वे' जैसे गाने सुनाए, तो उन्हें ये बेहद पसंद आए। संजय दत्त ने उस वक्त संजय गुप्ता को आश्वस्त करते हुए कहा था कि वे इन गानों को फिल्म में अच्छी तरह ढाल लेंगे। यहीं से फिल्म के संगीत की नींव पक्की हुई।
ऐसे बना फिल्म का यादगार टाइटल ट्रैक
फिल्म के मशहूर टाइटल ट्रैक के निर्माण के पीछे भी एक रोचक वाकया है। संजय गुप्ता ने संगीतकार से एक ऐसा थीम सॉन्ग बनाने की मांग की थी जो 'जेम्स बॉन्ड' या 'मिशन: इम्पॉसिबल' जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के संगीत जैसा प्रभावी हो। आनंद ने याद करते हुए बताया कि उन्हें सिर्फ एक दृश्य की जानकारी दी गई थी जिसमें सभी कलाकार सिगरेट पीते हुए और कॉलर ऊपर उठाकर किसी डकैती की योजना बना रहे थे। इसी सीन की कल्पना से उन्होंने 'कॉलर को थोड़ा सा ऊपर...' लाइन सोची और यहीं से 'कांटे' का वह आइकॉनिक टाइटल ट्रैक बनना शुरू हुआ। इस गाने को पूरी तरह तैयार करने में उन्हें करीब एक हफ्ते का समय लगा था, जो आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।











