राजस्थान की समृद्ध माटी, मायड़ भाषा और अनूठी संस्कृति को अब बड़े पर्दे के माध्यम से देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की बड़ी तैयारी शुरू हो चुकी है। राजस्थानी भाषा में निर्मित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धूड़’ आगामी 23 अक्टूबर को देशभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस फिल्म को सौ से अधिक शहरों में एक साथ प्रदर्शित करने की बड़ी योजना बनाई गई है, जिसे क्षेत्रीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के ग्रामीण जनजीवन, रेगिस्तानी परिवेश और यहां की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय फलक पर रखना है, जिससे देश भर के दर्शक इस संस्कृति से रूबरू हो सकें।
राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच और जोधपुर का खास कनेक्शन
राजस्थानी सिनेमा को मुख्यधारा और व्यापक पहचान दिलाने के मकसद से तैयार की गई इस फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्सुकता है। फिल्म का जोधपुर शहर के साथ भी एक बेहद खास और गहरा जुड़ाव है, जो इसे स्थानीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। करीब चार दशक के लंबे अंतराल के बाद किसी राजस्थानी फिल्म को इस स्तर पर देशव्यापी सिनेमाघरों में रिलीज करने की यह पहल की जा रही है, जिसे क्षेत्रीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक पुनरुत्थान के रूप में देखा जा रहा है। फिल्म की पूरी टीम का यह स्पष्ट लक्ष्य है कि मायड़ भाषा में बुनी गई इस कहानी को सिनेमा के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए।
दिग्गज कलाकारों का अभिनय और मजबूत तकनीकी टीम
फिल्म ‘धूड़’ में अभिनय के मोर्चे पर कई मंजे हुए कलाकार नजर आएंगे। इस फिल्म में यशपाल शर्मा, अलका अमीन और भवानी सिंह चौहान प्रमुख किरदारों में अपनी कला का जौहर दिखाते हुए दिखाई देंगे। इनके अलावा विवेक पारीक, प्रवीण चौधरी और वानिकी त्यागी जैसे कलाकार भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। फिल्म का लेखन और निर्देशन आनंद सिंह चौहान ने किया है, जबकि इसके खूबसूरत दृश्यों को कैमरे में कैद करने का काम अशोक मीणा ने छायांकन के जरिए किया है।
निर्माण और संगीत से जुड़ी खास बातें
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पर्दे पर उतारने के लिए कई लोग एक साथ आए हैं। फिल्म के निर्माता समर जैन, नरेंद्र कृष्णिया, मुकेश पारीक, डी. एस. चौहान और अभिषेक चोपड़ा हैं। कलाम एकेडमी और समर जैन इसके प्रस्तुतकर्ता की भूमिका में हैं। फिल्म के हर एक दृश्य में जान फूंकने के लिए इसका संगीत और मूल ध्वनि संयोजन मेहुल सुरती द्वारा तैयार किया गया है। रेगिस्तानी परिवेश और स्थानीय जीवनशैली को दर्शाती यह फिल्म राजस्थान के कला प्रेमियों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित हो सकती है।
क्षेत्रीय सिनेमा के लिए नए द्वार खुलने की उम्मीद
फिल्म की देशव्यापी रिलीज को लेकर अब सभी की निगाहें 23 अक्टूबर पर टिकी हुई हैं। सौ से अधिक शहरों में फिल्म के प्रदर्शन से यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह मायड़ भाषा और राजस्थानी संस्कृति को एक नया दर्शक वर्ग प्रदान करेगी। लंबे समय से क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को बड़े पैमाने पर मंच मिलने की जो मांग उठती रही है, उसकी दिशा में यह फिल्म एक मजबूत कदम साबित हो सकती है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि दर्शकों द्वारा इस पहल को किस तरह का प्रतिसाद मिलता है।



















