मुंबई में अभिनेता राजपाल यादव ने चेक बाउंस से जुड़े पुराने कानूनी विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी है और मीडिया के सामने सफाई दी है। अपनी बेहतरीन कॉमेडी और संजीदा अदाकारी से लंबे समय से दर्शकों का मनोरंजन करने वाले राजपाल यादव का कहना है कि उनके खिलाफ फैलाए जा रहे धोखाधड़ी के तमाम आरोप पूरी तरह आधारहीन हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस पूरे प्रकरण में केवल एक ही पक्ष की बात को तवज्जो दी जा रही है, जबकि दूसरे पहलू को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
कानूनी प्रक्रिया और एकपक्षीय बयानों पर सवाल
राजपाल यादव ने न्याय प्रक्रिया और सार्वजनिक चर्चाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मामले का दूसरा पहलू सुने बिना ही फैसले सुनाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि जब तक दोनों पक्षों की पूरी बात सामने नहीं आएगी, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना और न्याय की उम्मीद करना मुश्किल है। उन्होंने अपने ऊपर लगे तीन गंभीर बिंदुओं का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि पहला आरोप पांच करोड़ की धोखाधड़ी का है, दूसरा लोन लेने का और तीसरा एक व्यवसायी के साथ ठगी करने का है। उन्होंने सवाल किया कि जब उनके पास सारे चेक और पुख्ता कानूनी एग्रीमेंट्स मौजूद हैं, तो इसे किस आधार पर धोखाधड़ी का नाम दिया जा रहा है।
प्रतिष्ठा और साख को लेकर भावुक सवाल
अपनी इज्जत और दशकों की मेहनत का हवाला देते हुए अभिनेता ने बहुत कड़े शब्दों में पूछा कि क्या कोई भी इंसान अपनी कमाई हुई प्रतिष्ठा को महज पांच करोड़ रुपये के लिए दांव पर लगाने की गलती करेगा। राजपाल यादव ने तार्किक सवाल उठाया कि कोई भी समझदार कलाकार अपनी वर्षों की साख को यूं ही खतरे में क्यों डालेगा। उन्होंने आगे पूछा कि अगर यह वास्तव में कोई लोन था, तो शिकायतकर्ताओं को यह साफ करना चाहिए कि क्या वे लोग साल 2010 में पांच करोड़ रुपये उधार देने के लिए कानूनी तौर पर अधिकृत थे या उनके पास इसके लिए कोई लाइसेंस था या फिर वे कोई एनबीएफसी थे।
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2010 के आसपास के वित्तीय लेन-देन और फिल्म निर्माण से संबंधित ऋण से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप था कि फिल्म बनाने के लिए लिए गए पांच करोड़ रुपये के लोन के एवज में राजपाल यादव द्वारा दिए गए चेक बाउंस हो गए थे, जिसके बाद अदालती कार्रवाई शुरू हुई। वहीं दूसरी तरफ, राजपाल यादव और उनकी पूरी कानूनी टीम का यही पक्ष रहा है कि इस मामले में व्यावसायिक समझौतों और दस्तावेजों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उन पर बेवजह का दबाव बनाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी निगाहें
अभिनेता के इस नए और खुलकर दिए गए बयान के बाद इस कानूनी लड़ाई में एक अहम मोड़ आ गया है। इस ताजा घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब देश भर के लोगों और फिल्म इंडस्ट्री की निगाहें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि चेक बाउंस से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अब देश की शीर्ष न्यायपालिका क्या रुख अपनाती है और आगे क्या फैसला सामने आता है।



















