पश्चिम एशिया के अशांत माहौल के बीच दक्षिण एशियाई सीमांत इलाके में अचानक तेज हुई सैन्य और कूटनीतिक हलचलों ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकारों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। एक तरफ वाशिंगटन और तेहरान के रिश्ते पहले से ही अत्यधिक कड़वाहट और टकराव के दौर से गुजर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस्लामाबाद ने अपने पड़ोसी मुल्क के साथ लगती संवेदनशील सरहद पर अचानक पहरा कड़ा करते हुए व्यापारिक और मानवीय आवाजाही को पूरी तरह से थाम दिया है। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के समानांतर ही खुले समंदर में वॉशिंगटन के अत्याधुनिक युद्धपोतों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या परदे के पीछे किसी नए भू-राजनीतिक चक्रव्यूह की तैयारी चल रही है।
सीमा चौकियों पर अचानक क्यों लगा ताला?
दोनों पड़ोसी देशों को जोड़ने वाले जमीनी गलियारों पर वीरानी छा गई है, क्योंकि प्रमुख व्यापारिक रास्तों को अचानक सील कर दिया गया है। इस्लामाबाद के प्रशासनिक तंत्र ने 16 अक्टूबर को एक औपचारिक निर्देश जारी किया, जिसके तहत गब्द-रिमदान के साथ-साथ तफ्तान सीमा चौकी के जरिए होने वाले समस्त व्यावसायिक आदान-प्रदान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई। हालांकि इस अप्रत्याशित कदम के पीछे तस्करों के नेटवर्क पर नकेल कसने, सीमा पार आतंकवाद की रोकथाम और समग्र सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन क्षेत्रीय जानकार इस नाकेबंदी के समय को लेकर कई तरह के कयास लगा रहे हैं।
दूसरी ओर, तेहरान के आधिकारिक हलकों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि सीमाई रास्तों पर आवाजाही को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बघेई के अनुसार, कुछ तकनीकी खामियों और सुरक्षात्मक एहतियात के चलते पाकिस्तान के साथ होने वाले द्विपक्षीय लेन-देन और यात्रा को कुछ वक्त के लिए स्थगित किया गया है। सरकारी सूचना तंत्र आईआरएनए के हवाले से यह भी रेखांकित किया गया है कि दोनों देशों के राजनयिक और सुरक्षा अधिकारी जमीनी गतिरोध को खत्म करने के लिए निरंतर बातचीत के रास्ते पर बने हुए हैं, ताकि जटिलताओं को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके।
अरब सागर में अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी के मायने
जमीनी सीमा पर पसरे सन्नाटे के उलट, अरब सागर के रणनीतिक जलक्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों ने हलचल पैदा कर दी है। समुद्री आवाजाही पर नजर रखने वाले ओपन-सोर्स ट्रैकिंग डेटा से यह जानकारी निकलकर सामने आई है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के मिसाइल विध्वंसक यानी डिस्ट्रॉयर युद्धपोत पाकिस्तानी तटरेखा से लगभग 400 किलोमीटर की समुद्री दूरी पर गश्त लगा रहे हैं। खुले समंदर में वाशिंगटन के विध्वंसकों का यह जमावड़ा उस समय देखा जा रहा है जब खाड़ी क्षेत्र में हूतियों और सऊदी अरब के टकराव की वजह से समुद्री व्यापारिक मार्ग पहले से ही बारूद के ढेर पर बैठे हैं।
सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि समुद्र में अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर्स की सक्रियता असल में ईरान के चारों ओर सुरक्षा का शिकंजा कसने की सोची-समझी नीति हो सकती है। पेंटागन की इस कार्यप्रणाली के पीछे तेहरान पर अधिकतम आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव बनाए रखना, महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री लेन की सघन निगरानी करना और किसी भी आपात स्थिति के लिए सशस्त्र सैन्य विकल्प तैयार रखना शामिल माना जाता है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अमेरिकी नौसेना के ये विशालकाय जहाज ईरानी तटरेखा के बिल्कुल करीब जाने से परहेज कर रहे हैं और सुरक्षित फासले पर तैनात हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी सामरिक आशंका यह मानी जा रही है कि किसी भी संभावित सैन्य टकराव की सूरत में तेहरान अपनी घातक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों से पलटवार कर सकता है। हालांकि समंदर में कितने नौसैनिक जहाज तैनात हैं, इसको लेकर कोई पुख्ता संख्या आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई है। केवल जहाजों की तैनाती का यह कतई मतलब नहीं है कि तत्काल हमला होने जा रहा है, लेकिन अतीत के संघर्षों को देखते हुए इस रणनीतिक दबाव को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार पर मंडराता जोखिम
अगर दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच सीमाई विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका सबसे गंभीर आघात स्थानीय व्यापारियों, सीमावर्ती बलूच आबादी और दोनों देशों की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। गब्द-रिमदान और तफ्तान के रास्ते होने वाले वैध व्यापार के ठप होने से आम जनता की दैनिक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। अगर दोनों पक्ष संवाद के जरिए गतिरोध दूर कर लेते हैं, तो सीमाई व्यापार फिर से पटरी पर लौट सकता है।
दूसरी तरफ, यदि अरब सागर में अमेरिकी नौसेना का दबाव और वाशिंगटन-तेहरान का आपसी तनाव किसी सैन्य झड़प में तब्दील होता है, तो पूरा पश्चिम एशिया एक विनाशकारी आग की चपेट में आ सकता है। इससे न केवल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली कच्चे तेल की वैश्विक जीवनरेखा बाधित होगी, बल्कि ऊर्जा बाजारों में भारी अनिश्चितता छा जाएगी। हालांकि मौजूदा परिदृश्य में पाकिस्तान द्वारा अपनी पश्चिमी सीमा बंद करने और अरब सागर में अमेरिकी नौसेना की हलचलों के बीच कोई सीधा सांठगांठ साबित करने वाले प्रत्यक्ष साक्ष्य अभी सामने नहीं आए हैं, फिर भी कूटनीतिक गलियारों में इन दोनों घटनाओं के मेल ने भारी बेचैनी पैदा कर दी है।





















