हिंदी सिनेमा जगत में कपूर खानदान की ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले अभिनेता ऋषि कपूर अपनी बेमिसाल और बेबाक ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। वे बिना किसी डर, संकोच या हिचकिचाहट के हमेशा अपने दिल की बात खुलकर रखते थे। साल 2017 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा 'खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड' में उन्होंने अपने जीवन के कई ऐसे गुप्त पन्नों को खोला, जिनके बारे में लोग शायद ही कुछ जानते होंगे। बॉलीवुड के 'चिंटू जी' यानी ऋषि कपूर भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में से थे, जो पर्दे पर जितने जीवंत दिखते थे, असल जिंदगी में भी उतने ही बेबाक और मुंहफट थे। पांच दशकों से भी अधिक लंबे अपने शानदार फिल्मी सफर में उन्होंने 'बॉबी', 'कर्ज', 'चांदनी', 'अग्निपथ' और 'मुलक' जैसी कई बेहतरीन फिल्में दीं, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने विचारों को छिपाने का प्रयास नहीं किया।
राज कपूर के निजी जीवन के कड़वे सच और मां का संघर्ष
ऋषि कपूर की इस आत्मकथा ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हैरान कर दिया था। सोशल मीडिया का मंच हो या उनकी किताब के पन्ने, उन्होंने हमेशा वही लिखा जो उनके मन में था। यही वजह है कि उनकी किताब 'खुल्लम खुल्ला' को बॉलीवुड इतिहास के सबसे ईमानदार और चर्चित संस्मरणों में गिना जाता है। इस किताब में उन्होंने न केवल अपने संघर्षों को उजागर किया, बल्कि अपने पिता और भारतीय सिनेमा के 'शोमैन' कहे जाने वाले राज कपूर की निजी जिंदगी के कड़वे सच को भी पूरी दुनिया के सामने रखा। उन्होंने बेहद सच्चाई के साथ अपने पिता के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स का उल्लेख किया और उनके जीवन में रहे विभिन्न रिश्तों का ब्योरा दिया।
अपनी किताब में ऋषि कपूर ने अपने पिता राज कपूर और अभिनेत्री नरगिस के रिश्ते का जिक्र करते हुए बताया कि इससे उनकी मां कृष्णा राज कपूर पूरी तरह टूट गई थीं। उन्होंने आगे लिखा कि नरगिस से अलग होने के बाद जब उनके पिता का नाम वैजयंतीमाला के साथ जुड़ा, तो यह बात उनकी मां के बर्दाश्त की सीमा से बाहर हो गई। इसके बाद उनकी मां अपने बच्चों को लेकर घर छोड़कर चली गईं। उस कठिन समय में ऋषि कपूर को अपनी मां और भाइयों के साथ एक होटल में रहना पड़ा था, जो उनके पारिवारिक जीवन के गहरे तनाव को दर्शाता है।
डूबते करियर और कर्ज के बीच पिता के लिए मसीहा बनी फिल्म 'बॉबी'
अपने पिता के निजी रिश्तों का खुलासा करने वाले ऋषि कपूर एक समय उनके लिए संकटमोचक और मसीहा बनकर भी सामने आए। उस दौर में राज कपूर गहरे कर्ज के जाल में डूबे हुए थे और भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे। इस संकट से उबरने के लिए राज कपूर ने साल 1973 में अपने बेटे ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया को लेकर फिल्म 'बॉबी' का निर्माण किया। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। फिल्म की इस जबरदस्त कामयाबी ने राज कपूर को न केवल कर्ज के दलदल से बाहर निकाला बल्कि उन्हें एक बार फिर मालामाल कर दिया। इस प्रकार ऋषि कपूर अपने पिता के डूबते करियर और आर्थिक साम्राज्य को बचाने वाले मसीहा साबित हुए।
साल 1988 में दुबई एयरपोर्ट पर दाऊद इब्राहिम से वो मुलाकात
इस आत्मकथा में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ उनकी मुलाकात का था। ऋषि कपूर ने बताया कि साल 1993 के मुंबई बम धमाकों से काफी पहले, वर्ष 1988 में उनकी मुलाकात दुबई में दाऊद से हुई थी। एयरपोर्ट पर उन्हें देखने के बाद दाऊद ने उन्हें चाय पीने के लिए आमंत्रित किया था। चूंकि उस समय तक दाऊद भारत का मोस्ट वांटेड अपराधी घोषित नहीं हुआ था, इसलिए ऋषि कपूर ने एक सामान्य नागरिक की तरह उसके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया और उसे एक साधारण मुलाकात समझा। बातचीत के दौरान दाऊद ने ऋषि कपूर से कहा था कि अगर उन्हें कभी भी किसी चीज की आवश्यकता हो, तो वे बिना किसी झिझक के उसे बता सकते हैं। हालांकि, बाद में उन्हें दाऊद इब्राहिम की वास्तविक सच्चाई और उसके काले कारनामों का पता चला।
फिल्म 'कर्ज' की नाकामी, मानसिक अवसाद और कैंसर से अंतिम लड़ाई
ऋषि कपूर ने कभी भी अपनी कमजोरियों, असफलताओं और मानसिक स्थिति को दुनिया से नहीं छिपाया। उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि साल 1980 में जब उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म 'कर्ज' बॉक्स ऑफिस पर असफल हो गई, तो वे गहरे डिप्रेशन में चले गए थे। उनकी मानसिक स्थिति इतनी अधिक बिगड़ गई थी कि उन्होंने फिल्मों की शूटिंग पर जाना भी बंद कर दिया था। हालत को सामान्य करने के लिए उन्हें डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ी और उनकी रिकवरी के लिए कई बड़े फिल्म निर्माताओं को महीनों तक इंतजार करना पड़ा था। जीवन के आखिरी पड़ाव में गंभीर बीमारी से जूझने के बाद, साल 2020 में कैंसर के कारण इस बेबाक अभिनेता का निधन हो गया।











