हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित फिल्म ‘सतलज’ कानूनी और सामाजिक विवादों के केंद्र में आ गई है। मुख्य भूमिका में नजर आ रहे अभिनेता दिलजीत दोसांझ की यह फिल्म रिलीज के तुरंत बाद ही डिजिटल प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटा दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद पंजाब और जम्मू जैसे क्षेत्रों में इसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की घटनाएं सामने आई हैं। अब इन अनधिकृत स्क्रीनिंग्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इसमें मांग की गई है कि उन सभी व्यक्तियों और संगठनों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए जो बिना आधिकारिक अनुमति के इस फिल्म का प्रदर्शन कर रहे हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि और फिल्म का विषय
यह फिल्म प्रमुख एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके निधन से जुड़ी वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। फिल्म को 3 जुलाई को ZEE5 पर दर्शकों के लिए जारी किया गया था, लेकिन उपजे भारी विवाद के बाद महज दो दिन के भीतर, यानी 5 जुलाई को इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फिल्म की रिलीज, फिर उसे हटाने और बाद में अवैध रूप से लीक होने की प्रक्रिया ने सेंसरशिप और कानून के उल्लंघन पर एक नई बहस को जन्म दिया है।
हाईकोर्ट में क्या है याचिका?
वकील विनीत जिंदल ने इस मामले को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दस्तक दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी याचिका की प्रति साझा करते हुए बताया है कि कुछ राजनीतिक दलों, धार्मिक संगठनों और निजी स्वार्थ रखने वाले लोगों द्वारा इस फिल्म की स्क्रीनिंग का उपयोग किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि ये प्रदर्शन न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि फिल्म के माध्यम से समाज में हिंसा को उकसाने और एक विशिष्ट समुदाय के प्रति नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।
वकील विनीत जिंदल का यह स्पष्ट मानना है कि यदि इन गतिविधियों को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो पंजाब में लंबे समय से कायम शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने पुलिस और स्थानीय प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और ऐसी सभी सार्वजनिक स्क्रीनिंग्स को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।
ZEE5 और निर्माताओं का पक्ष
फिल्म को हटाने के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म ZEE5 इंडिया ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ‘सतलज’ का भारत में प्रसारण अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। प्लेटफॉर्म का कहना है कि वे कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि भविष्य में फिल्म को सही तरीके से दर्शकों के सामने लाया जा सके। इसके साथ ही, कंपनी ने दर्शकों से अपील की है कि वे किसी भी गैर-कानूनी माध्यम से फिल्म देखने से बचें। जहां पहले यह फिल्म केवल भारत में प्रतिबंधित थी, वहीं निर्देशक हनी त्रेहान ने स्वयं पुष्टि की है कि इसे अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी हटा लिया गया है।











