सिनेमा जगत में कई बार पर्दे के पीछे की कहानी भी उतनी ही चमत्कारी होती है जितनी पर्दे पर दिखने वाली कहानी। आध्यात्मिक गुरु नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर बनी फिल्म हनुमान अंश के साथ भी ऐसा ही एक अनोखा सफर जुड़ा हुआ है। केवल 2 करोड़ रुपये के बेहद सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद कमाल कर दिया है और अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई कर चुकी है। इस बड़ी व्यावसायिक सफलता के पीछे महज 21 साल की युवा प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर की कड़ी मेहनत और अटूट विश्वास की कहानी छिपी हुई है, जिन्होंने बेहद कम उम्र में इस विशाल प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाली।
शुरुआती दौर में इस फिल्म के भविष्य को लेकर फिल्म उद्योग और दर्शकों के बीच कई तरह की शंकाएं थीं। एक समय तो ऐसा भी आ गया था जब दर्शकों की कमी के कारण इस फिल्म को सिनेमाघरों से हटाए जाने की तैयारी चल रही थी। लेकिन इसके बाद दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर ऐसी लहर चली कि पूरी कहानी ने अचानक एक नया मोड़ ले लिया। लोगों का भरपूर प्यार मिलने लगा और देखते ही देखते फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन तेजी से बढ़ने लगा। अपनी फिल्म की इस जादुई सफलता और इसके पीछे के आध्यात्मिक सफर को लेकर अनुप्रिया नागर ने कई अनसुने किस्से साझा किए हैं।
नई पीढ़ी को अध्यात्म और भक्ति से जोड़ने का प्रयास
अपनी फिल्म हनुमान अंश की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद फिल्म की युवा प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर गाजियाबाद के संजय नगर में स्थित यशोदा अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल प्रबंधन की ओर से उनके इस सराहनीय प्रयास और सफलता के लिए उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह के दौरान बातचीत करते हुए अनुप्रिया नागर ने बताया कि उनके मन में शुरू से ही भक्ति और अध्यात्म के विषय पर कुछ ऐसा काम करने की इच्छा थी जिससे आज की आधुनिक पीढ़ी आसानी से जुड़ सके। उनका मानना है कि आज की GEN Z यानी युवा पीढ़ी हर समय सोशल मीडिया और बाहरी दुनिया से वैलिडेशन पाने की अंतहीन दौड़ में लगी हुई है।
अनुप्रिया के अनुसार, स्कूल से लेकर कॉलेज की पढ़ाई और फिर उसके बाद नौकरी पाने की अंधी भागदौड़ में आज का युवा मानसिक रूप से इतना थक जाता है कि वह अपने वर्तमान क्षण को जीना ही भूल जाता है। इसी विचार को ध्यान में रखकर उन्होंने एक ऐसी फिल्म बनाने का संकल्प लिया जो विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के दिलों को छू सके और उन्हें मानसिक शांति का मार्ग दिखा सके। अब सिनेमाघरों में इस फिल्म को मिल रहे रिस्पॉन्स से यह साफ दिख रहा है कि उनका यह प्रयास पूरी तरह सफल रहा है। फिल्म देखने के लिए केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चे और युवा भी भारी संख्या में थियेटरों तक पहुंच रहे हैं और इसकी कहानी की सराहना कर रहे हैं।
स्टीव जॉब्स की खोज से शुरू हुआ नीम करौली बाबा तक का सफर
फिल्म हनुमान अंश के बनने की शुरुआत भी बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित तरीके से हुई थी। प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने बताया कि शुरुआत में वह एप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स के जीवन और उनके संघर्षों के बारे में रिसर्च कर रही थीं। स्टीव जॉब्स की जीवनी पढ़ते-पढ़ते उनका ध्यान इस बात पर गया कि स्टीव जॉब्स अपनी युवावस्था में शांति और जीवन का सत्य खोजने के लिए भारत आए थे। यहीं से पढ़ते हुए उन्हें भारत के महान संत नीम करौली बाबा के बारे में पता चला। इस जानकारी ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने इसी विषय पर फिल्म बनाने का मन बना लिया। अनुप्रिया इस पूरे सफर को बड़े ही सुंदर शब्दों में यूके से यूके तक का सफर कहती हैं, जिसका मतलब यूनाइटेड किंगडम से शुरू होकर उत्तराखंड के कैंची धाम तक पहुंचने की यात्रा है।
प्रमोशन के लिए बजट की कमी और संतों की शरण
जब फिल्म पूरी तरह से बनकर तैयार हो गई, तब अनुप्रिया के सामने इसे दर्शकों तक पहुंचाने के लिए सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हुई। एक छोटी फिल्म होने के कारण उनके पास बड़े पैमाने पर मार्केटिंग या प्रमोशन करने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं बचे थे। ऐसे कठिन समय में अनुप्रिया ने लीक से हटकर एक नया रास्ता चुना। उन्होंने फैसला किया कि वह देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर पूजनीय संतों से मुलाकात करेंगी और उनसे अपनी फिल्म के लिए आशीर्वाद मांगेंगी। उनके इस आध्यात्मिक अभियान की शुरुआत वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से हुई। अनुप्रिया ने बताया कि जब उन्होंने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की, तो महाराज जी ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए मार्गदर्शन किया कि वह एक महान आध्यात्मिक विभूति पर फिल्म बना रही हैं, इसलिए उन्हें फिल्म में संतों और मर्यादा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात का विशेष ध्यान रखना होगा।
फ्लॉप होने की कगार से बॉक्स ऑफिस ब्लॉकबस्टर बनने का चमत्कार
सिनेमाघरों में रिलीज होने के तुरंत बाद फिल्म को वैसी शुरुआत नहीं मिली जैसी उम्मीद की जा रही थी। शुरुआती दिनों में दर्शकों की संख्या काफी कम थी और थियेटरों के मालिक शो बंद करने की सोच रहे थे। फिल्म पूरी तरह फ्लॉप होने की कगार पर पहुंच चुकी थी। संकट के इस दौर में अनुप्रिया नागर हार मानने के बजाय बागेश्वर धाम पहुंचीं। वहां उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। धीरेंद्र शास्त्री ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि उन्होंने आज की GEN Z के लिए एक बेहतरीन और उद्देश्यपूर्ण फिल्म बनाई है, जो निश्चित रूप से बहुत आगे जाएगी और लोगों के दिलों को छुएगी। अनुप्रिया का मानना है कि इस आशीर्वाद के बाद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसी रफ्तार पकड़ी कि सब हैरान रह गए। आज पूरे देश में इस फिल्म की सफलता की चर्चा हो रही है।
सफलता के बाद आभार और भविष्य की योजनाएं
फिल्म के ब्लॉकबस्टर हिट होने के बाद अनुप्रिया नागर एक बार फिर से संत प्रेमानंद महाराज का आभार व्यक्त करने वृंदावन पहुंचीं। फिल्म की इस असाधारण सफलता की कहानी सुनकर प्रेमानंद महाराज भी अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने अनुप्रिया को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। अनुप्रिया के अनुसार, महाराज जी ने इस बात पर खुशी जताई कि आज के समय में जहां संतों और अध्यात्म को लेकर समाज में कई बार नकारात्मक छवि पेश की जाती है, वहीं इस फिल्म में संतों की गरिमा और उनके सम्मान को पूरी शिद्दत के साथ दिखाया गया है। वह चाहते हैं कि ऐसी सकारात्मक फिल्में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे ताकि वे अपनी संस्कृति से जुड़ सकें।
अनुप्रिया नागर ने बताया कि फिल्म को न केवल युवाओं का बल्कि GEN ALPHA यानी बहुत छोटे बच्चों का भी भरपूर प्यार मिल रहा है। इस भारी सफलता को देखते हुए अब हनुमान अंश के पार्ट-2 पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया गया है, जिसे जल्द ही बड़े पर्दे पर रिलीज करने की तैयारी है। इसके अलावा अनुप्रिया ने यह भी इच्छा जताई कि वह उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित कल्कि धाम के दर्शन करने जरूर जाएंगी। यदि उन्हें अवसर और सौभाग्य मिला, तो वह भविष्य में कल्कि धाम की महिमा पर भी एक भव्य फिल्म का निर्माण करना चाहेंगी।



















