राजस्थान के झुंझुनूं के रहने वाले एक शख्स के लिए उसके पासपोर्ट का गायब पन्ना ही सबसे बड़ी मुसीबत का सबब बन गया। पासपोर्ट से दो बेहद अहम पन्ने गायब होने की वजह से इस यात्री को न केवल ओमान से वापस भेज दिया गया, बल्कि दिल्ली पहुंचते ही सुरक्षा एजेंसियों ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया। गहन पूछताछ के बाद अब आरोपी शख्स सलाखों के पीछे यानी तिहाड़ जेल में अपनी रातें काट रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की बारीकी से जांच कर रही हैं कि आखिर सरकारी दस्तावेज के ये पन्ने कहां और क्यों गायब हुए।
दिल्ली से ओमान की उड़ान और फिर शुरू हुआ हंगामा
पूरी घटना अगस्त महीने के आखिरी दिनों की है, जब झुंझुनूं का रहने वाला फिरोज अली रोजी-रोटी या किसी अन्य काम के सिलसिले में ओमान जाने के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा था। दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच और इमिग्रेशन की तमाम औपचारिकताओं को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के बाद फिरोज ओमान के लिए रवाना हो गया। लेकिन असली परेशानी तब शुरू हुई जब उसका विमान ओमान की धरती पर उतरा। ओमान एयरपोर्ट पर जब वहां के इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसके पासपोर्ट की जांच की, तो वे यह देखकर हैरान रह गए कि पासपोर्ट से पन्ना नंबर 17 और 18 पूरी तरह गायब थे। इस बारे में जब फिरोज से सवाल-जवाब किए गए, तो वह कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाया।
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार, पासपोर्ट एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज होता है। इसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़, जैसे कि पन्नों को फाड़ना या मिटाना, पूरे दस्तावेज को अवैध बना देता है। जब फिरोज ने मस्कट के एयरपोर्ट पर अपना पासपोर्ट दिखाया, तो पन्नों का गायब होना एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन के रूप में देखा गया। आमतौर पर दुनिया भर के इमिग्रेशन सिस्टम पासपोर्ट के हर एक पन्ने का रिकॉर्ड रखते हैं, और पन्नों का गायब होना इस बात का संकेत माना जाता है कि यात्री अपनी पिछली यात्राओं का इतिहास, किसी देश से डिपोर्ट होने की जानकारी या गैर-कानूनी वीजा को छिपाने की कोशिश कर रहा है।
ओमान से डिपोर्टेशन और दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों का एक्शन
कोई सही जवाब न मिलने पर ओमान के सुरक्षा अधिकारियों ने फिरोज अली को उनके देश में प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया और उसे वापस भारत डिपोर्ट करने का फैसला किया। इसके बाद, 31 अगस्त और 1 सितंबर की दरमियानी रात को फिरोज को ओमान एयर की फ्लाइट नंबर WY-245 से वापस दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमान के लैंड होते ही वहां मौजूद इमिग्रेशन ब्यूरो, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो के तहत काम करता है, ने फिरोज को तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया। देश की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले को लेकर खुफिया विभाग और दिल्ली पुलिस ने फिरोज से काफी देर तक कड़ी पूछताछ की।
दर्ज हुई FIR और आरोपी पहुंचा तिहाड़ जेल
शुरुआती दौर की पूछताछ खत्म होने के बाद इमिग्रेशन ब्यूरो ने इस मामले की लिखित शिकायत IGI एयरपोर्ट पुलिस को सौंप दी। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर तुरंत FIR दर्ज कर फिरोज अली को गिरफ्तार कर लिया और कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे सीधे तिहाड़ जेल भेज दिया। जांच अधिकारियों को अंदेशा है कि पासपोर्ट के पन्ना नंबर 17 और 18 पर शायद कोई फर्जी वीजा लगा हुआ था, जिसे ओमान पहुंचने से पहले किसी बड़ी गड़बड़ी या अपनी पुरानी करतूतों को छिपाने के इरादे से जानबूझकर फाड़ दिया गया था।
भारत में पासपोर्ट के साथ छेड़छाड़ करना पासपोर्ट अधिनियम के तहत एक अत्यंत गंभीर और दंडनीय अपराध माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति कटे-फटे या छेड़छाड़ किए गए पासपोर्ट का उपयोग करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे जेल की सजा के साथ-साथ भविष्य में विदेश यात्रा करने पर लंबे समय तक के लिए प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली पुलिस की जांच में इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि क्या फिरोज किसी फर्जी ट्रैवल एजेंट के झांसे में आ गया था, जिसने किसी दूसरे देश के रिजेक्टेड वीजा या अवैध रूप से देश में प्रवेश के स्टैम्प को छिपाने के लिए उसे इन पन्नों को फाड़ने की सलाह दी थी। फिलहाल दिल्ली पुलिस की एक खास टीम इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसी संगठित गिरोह या साजिश की आशंका को ध्यान में रखकर मामले की जांच को आगे बढ़ा रही है।


















