असम के छह विधायकों का एक दल जल्द ही हिमाचल प्रदेश के दौरे पर जाएगा। इस यात्रा का मुख्य मकसद पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बंदरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए चलाए जा रहे नसबंदी कार्यक्रम का विस्तृत अध्ययन करना है। असम सरकार यह देखना चाहती है कि इस सफल मॉडल को अपने राज्य में अपनाकर इंसानों और बंदरों के बीच बढ़ रहे टकराव को कैसे कम किया जा सकता है।
संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्य
असम के संसदीय कार्य विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, इस अध्ययन दल में राज्य विधानसभा के छह विधायक शामिल हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में मृणाल सैकिया, रूपज्योति कुर्मी, धीरज गोवाला, प्रकाश दास, रूपेश गोवाला और मृदुल दत्ता को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह दल हिमाचल प्रदेश में बंदरों की नसबंदी के लिए बनाए गए बुनियादी ढांचे, फील्ड संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करेगा।
विधानसभा बजट सत्र से जुड़ा पृष्ठभूमि
विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेजने का यह फैसला असम विधानसभा के पिछले बजट सत्र के दौरान हुई गंभीर चर्चाओं के बाद लिया गया है। राज्य के कई हिस्सों में बंदरों के बढ़ते उपद्रव को लेकर विधायकों ने चिंता जताई थी। इन संसदीय चर्चाओं के बाद असम के वन विभाग ने बंदरों की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों के साथ एक विशेष बैठक भी आयोजित की थी, जिसमें दीर्घकालिक समाधान पर सहमति बनी थी।
हिमाचल प्रदेश का 2007 से जारी मॉडल
हिमाचल प्रदेश भी लंबे समय से बंदरों की अनियंत्रित आबादी की समस्या से जूझता रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2007 में बड़े पैमाने पर बंदरों का बंध्याकरण करने की योजना शुरू की थी। तब से लेकर अब तक वहां लगभग एक लाख बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। इस निरंतर प्रयास से बंदरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि रोकने और आवासीय क्षेत्रों में इंसानों के साथ संघर्ष की घटनाओं को कम करने में मदद मिली है।
असम में फसलों को नुकसान और भावी रणनीति
असम में बंदरों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें रीसस मकाक प्रजाति के बंदर खेती और बागवानी फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। राज्य के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में बंदरों द्वारा फसलों को नष्ट किए जाने की लगातार शिकायतें आ रही हैं। असम सरकार अब हिमाचल प्रदेश के अनुभवों का लाभ उठाकर अपने यहां भी एक व्यवस्थित नसबंदी कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है, ताकि कृषि क्षति को रोका जा सके।


















