हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल 2004 में निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की एक ऐसी फिल्म सिनेमाघरों में पहुंची थी जो बॉक्स ऑफिस पर भले ही औसत साबित हुई हो, लेकिन दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ गई। यह मास्टरपीस थी स्वदेस, जिसमें शाहरुख खान ने मोहन भार्गव का यादगार किरदार निभाया था। आज इस मूवी को भारतीय सिनेमा की बेहतरीन कलाकृतियों में गिना जाता है, मगर इस आइकॉनिक प्रोजेक्ट की शुरुआत की कहानी काफी दिलचस्प है और इसके तार कई अन्य बड़े कलाकारों से जुड़े रहे हैं।
आमिर खान के पास सबसे पहले आई थी कहानी
फिल्म लगान की ऐतिहासिक सफलता के बाद आशुतोष गोवारिकर अपनी अगली योजना पर काम कर रहे थे। उस वक्त इस प्रोजेक्ट का शुरुआती नाम देश तय किया गया था और इसके मुख्य अभिनेता के रूप में आमिर खान का चयन किया गया था। केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले इस फिल्म का निर्माण भी आमिर के ही हाथों में होना तय था। मेकर्स का मानना था कि लगान के बाद गोवारिकर और आमिर की यह जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर एक बार फिर कमाल दिखाएगी और शुरुआती दौर से ही इस पर चर्चाएं शुरू हो चुकी थीं।
क्यों पीछे हटे आमिर खान
इस पूरी योजना में बदलाव तब आया जब आमिर खान को पटकथा के कुछ हिस्सों पर आपत्तियां थीं। हालांकि उन्हें फिल्म का बुनियादी विचार और प्लॉट बेहद पसंद आया था, लेकिन जिस प्रकार से स्क्रीनप्ले लिखा गया था, उससे वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो सके और चाहते थे कि इस पर दोबारा काम किया जाए। इसके अलावा समय की भी गंभीर पाबंदियां थीं क्योंकि आमिर उन दिनों अपने अन्य व्यावसायिक कामों में पूरी तरह व्यस्त थे और निर्देशक को पटकथा को नए सिरे से संवारने के लिए जरूरी वक्त नहीं दे पा रहे थे। आशुतोष गोवारिकर लगान के तुरंत बाद बिना किसी देरी के अपनी नई रचना पर काम शुरू करने के लिए उत्सुक थे, जिसके चलते दोनों ने आपसी सहमति से इस रास्ते पर आगे न बढ़ने का फैसला किया।
आर माधवन का ऑडिशन और ऋतिक रोशन की एंट्री
जब आमिर खान इस प्रोजेक्ट से अलग हुए, तब निर्देशक ने अन्य बड़े सितारों की ओर रुख किया। ऋतिक रोशन को भी इस कहानी का विवरण सुनाया गया था, जबकि अभिनेता आर माधवन ने मोहन भार्गव की भूमिका के लिए एक शानदार ऑडिशन दिया था। फिल्म के सह-लेखक अमीन हाजी के अनुसार, माधवन ने अपने अभिनय कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया था और उस रोल में पूरी तरह जान फूंक दी थी।
शाहरुख खान की भावुक प्रतिक्रिया
किस्मत ने करवट तब ली जब लगान की सफलता के बाद फिल्म सिटी के एडलैब्स में शाहरुख खान के लिए एक विशेष स्क्रीनिंग रखी गई थी। उस प्रदर्शन के दौरान शाहरुख इतने अधिक भावुक हो गए कि उन्होंने तुरंत इच्छा जताई कि उन्हें इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना चाहिए। उनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी रह चुके थे, जिसके कारण यह विषय उनके दिल के बेहद करीब था। फिल्म खत्म होते ही उन्होंने तुरंत निर्देशक को फोन लगाया और कहा कि वह किसी भी कीमत पर इस मूवी में काम करना चाहते हैं। दोनों के बीच पुराने सीरियल सर्कस के दिनों से ही काफी गहरे संबंध थे, जिसके चलते यह जुड़ाव और मजबूत हो गया।
किस्मत का खेल और दिलचस्प समीकरण
अमीन हाजी ने उस दौर को याद करते हुए एक रोचक बात साझा की थी कि शाहरुख ने एक बार कहा था कि जिस फिल्म को आमिर नहीं कर पाते, उसे वह बिना पटकथा पढ़े भी साइन करने के लिए तैयार रहते हैं क्योंकि उन्हें आमिर की पसंद पर पूरा भरोसा होता है। इस तरह से आखिरकार शाहरुख इस ऐतिहासिक सफर का अहम हिस्सा बन गए। दिसंबर 2004 में रिलीज हुई इस मूवी में गायत्री जोशी, राजेश विवेक और दयाशंकर पांडे जैसे कलाकार भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे और आईएमडीबी पर इसे 8.2 की शानदार रेटिंग हासिल है।



















