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ये 10 फिल्में हैं हूबहू एक जैसी, नाम तक नहीं बदला, फिर भी बनीं जबरदस्त ब्लॉकबस्टरमनोरंजन
9 जुल॰ 2026, 2:09 pm (45 दिन पहले)· 2

ये 10 फिल्में हैं हूबहू एक जैसी, नाम तक नहीं बदला, फिर भी बनीं जबरदस्त ब्लॉकबस्टर

फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर हिट फिल्मों के रीमेक बनाए जाते हैं, लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी रहीं जिन्होंने कहानी, नाम और दृश्यों को बिना बदले अपार सफलता हासिल की। यहां हम ऐसी ही 10 मशहूर फिल्मों के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने ओरिजिनल कंटेंट पर भरोसा कर बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचा।

फिल्म उद्योग में पुरानी फिल्मों या अन्य भाषाओं की सफल कहानियों का रीमेक बनाना एक पुराना सिलसिला रहा है। अक्सर जब कोई दक्षिण भारतीय फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाती है, तो निर्माता उसे हिंदी दर्शकों के लिए फिर से तैयार करते हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में मेकर्स फिल्म का नाम बदलने या पटकथा में बदलाव करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी हैं जिनमें निर्माताओं ने मूल सामग्री के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की। आज हम आपको उन 10 खास फिल्मों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं जिन्होंने कहानी, संवाद और दृश्यों तक को हूबहू अपनाते हुए भी दर्शकों का दिल जीता और ब्लॉकबस्टर साबित हुईं।

गजनी (2005) और गजनी (2008)

इस कड़ी में सबसे पहला नाम 'गजनी' का है, जिसने भारतीय सिनेमा के परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। साल 2005 में एआर मुरुगादॉस द्वारा निर्देशित ओरिजिनल तमिल फिल्म में अभिनेता सूर्या और अभिनेत्री असिन मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म की कहानी एक ऐसे व्यवसायी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शॉर्ट-टर्म मेमोरी लॉस की समस्या से जूझ रहा है और उसे केवल 15 मिनट की बातें याद रहती हैं। प्यार और बदले की यह पटकथा दक्षिण भारत में बेहद सफल रही। ठीक तीन साल बाद, निर्देशक मुरुगादॉस ने आमिर खान को लेकर इस फिल्म का हिंदी रूपांतरण पेश किया। इसमें आमिर का 8 पैक एब्स वाला अवतार, सिर पर गहरा घाव और डायरी व तस्वीरों के माध्यम से अपने दुश्मन को खोजने वाला हर दृश्य तमिल फिल्म से बिल्कुल वैसा ही लिया गया था। यहाँ तक कि मुख्य अभिनेत्री के रूप में असिन को ही बरकरार रखा गया। जहाँ सूर्या की फिल्म ने साउथ में सफलता के झंडे गाड़े, वहीं आमिर खान की 'गजनी' ने हिंदी बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होते ही रिकॉर्ड तोड़ दिए।

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सिंघम (2010) और सिंघम (2011)

पुलिसिया एक्शन और दमदार संवादों के शौकीन दर्शकों के लिए 'सिंघम' नाम ही काफी है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह पूरी तरह से एक दक्षिण भारतीय फिल्म की नकल थी। साल 2010 की ओरिजिनल तमिल फिल्म को हरि ने निर्देशित किया था और इसमें सूर्या व अनुष्का शेट्टी ने काम किया था। एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की माफिया डॉन से भिड़ंत की इस कहानी ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया, जिसमें प्रकाश राज ने मुख्य खलनायक की भूमिका निभाई थी। अगले ही वर्ष, रोहित शेट्टी ने इसके आधिकारिक अधिकार खरीदे और अजय देवगन को मुख्य भूमिका में लेकर हिंदी 'सिंघम' तैयार की। इसमें प्रकाश राज को फिर से विलेन बनाया गया। अजय देवगन का पानी से बाहर निकलकर चलती गाड़ी को रोकना हो, गुंडों को बेल्ट से पीटना हो या पुलिस स्टेशन के भीतर गर्मा-गर्म बहस, हर शॉट तमिल फिल्म का हूबहू हिस्सा था। जहाँ मूल तमिल फिल्म ने कमाई के कीर्तिमान स्थापित किए, वहीं अजय देवगन की हिंदी फिल्म भी ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसने 'रोहित शेट्टी कॉप यूनिवर्स' की नींव रखी।

बॉडीगार्ड (2010) और बॉडीगार्ड (2011)

इस फिल्म की पटकथा इतनी सटीक थी कि इसके मूल निर्देशक सिद्दीकी ने खुद ही अलग-अलग भाषाओं में इसके रीमेक निर्देशित किए। वर्ष 2010 में सिद्दीकी ने 'बॉडीगार्ड' नाम की एक मलयालम रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म बनाई, जिसमें दिलीप और नयनतारा ने अभिनय किया था। फिल्म के अंतिम 20 मिनट का भावनात्मक मोड़ इसका मुख्य आकर्षण था। इसके अगले ही साल, निर्देशक ने खुद सलमान खान और करीना कपूर के साथ हिंदी संस्करण तैयार किया। चूँकि दोनों फिल्मों के निर्देशक एक ही थे, इसलिए हिंदी फिल्म में सलमान खान की वर्दी, फोन पर गुप्त प्रेम वार्ता और रेलवे स्टेशन वाला भावुक क्लाइमैक्स बिल्कुल मलयालम फिल्म जैसा ही रखा गया। मलयालम संस्करण अपनी जगह ब्लॉकबस्टर रहा, लेकिन जब इसे सलमान खान के 'लवली सिंह' स्टाइल में हिंदी में प्रस्तुत किया गया, तो इसने भारतीय सिनेमाघरों में अपार सफलता दर्ज की और साल 2011 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई।

दृश्यम (2013) और दृश्यम (2015)

क्या कोई भूल सकता है वह सस्पेंस भरा सवाल, '2 और 3 अक्टूबर को पणजी में क्या हुआ था?' जीतू जोसेफ द्वारा निर्देशित ओरिजिनल 2013 की मलयालम फिल्म में मोहनलाल ने जॉर्ज कुट्टी का किरदार निभाया था। यह थ्रिलर एक साधारण चौथी कक्षा पास व्यक्ति की कहानी है, जो अपने परिवार को अनजाने में हुए मर्डर केस से बचाने के लिए पुलिस के तरीकों का ही उपयोग करता है। आलोचकों और दर्शकों ने इसे बेहद पसंद किया। वर्ष 2015 में निशिकांत कामत ने इसका हिंदी रीमेक बनाया, जिसमें अजय देवगन, तब्बू और श्रेया सरन मुख्य भूमिकाओं में थे। इसकी पटकथा इतनी कसी हुई थी कि हिंदी संस्करण में केवल शहर का नाम बदला गया। पुलिस द्वारा परिवार का उत्पीड़न, इंस्पेक्टर जनरल के समक्ष गवाही देना और शव को अंडरग्राउंड छुपाना, हर फ्रेम मोहनलाल की फिल्म का प्रतिबिंब था। मूल मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, और उसी तर्ज पर अजय देवगन की फिल्म भी अपनी कहानी की दम पर बॉलीवुड की सबसे सफल सस्पेंस फ्रेंचाइजी में से एक बन गई।

डॉन (1978) और डॉन (2006)

यह बॉलीवुड के इतिहास का सबसे दिलचस्प उदाहरण है, जहाँ दो अलग-अलग पीढ़ियों के महानायकों ने एक ही नाम और कहानी पर अपना वर्चस्व स्थापित किया। ओरिजिनल 1978 की फिल्म को चंद्रा बरोट ने निर्देशित किया था और इसे सलीम-जावेद ने लिखा था।

सवाल-जवाब

क्या ये फिल्में वास्तव में ओरिजिनल का हूबहू कॉपी हैं?
हां, इन फिल्मों के निर्देशक और निर्माताओं ने कहानी, स्क्रीनप्ले, संवाद और दृश्यों को मूल फिल्म से बिना किसी खास बदलाव के लिया है।
क्या रीमेक फिल्में भी ब्लॉकबस्टर रही हैं?
हां, गजनी, सिंघम, बॉडीगार्ड और दृश्यम जैसी फिल्में न केवल ओरिजिनल भाषा में बल्कि हिंदी रीमेक के रूप में भी बॉक्स ऑफिस पर भारी सफलता पाने में सफल रहीं।
क्या इन फिल्मों का नाम भी बदला गया था?
नहीं, इन फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि निर्माताओं ने उनके नाम तक बदलने की जहमत नहीं उठाई।
दृश्यम फिल्म का मुख्य सस्पेंस क्या है?
फिल्म का सस्पेंस एक मर्डर केस के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें एक परिवार पुलिस की उलझन का फायदा उठाकर खुद को बचाने की कोशिश करता है।
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