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फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन को संवैधानिक परिषद ने किया रद्दयूरोप
14 अग॰ 2026, 10:48 pm (2 घंटे पहले)· 1

फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन को संवैधानिक परिषद ने किया रद्द

फ्रांस की संवैधानिक परिषद ने 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लगाने वाले कानून को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है, जिसके बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नया मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

फ्रांस की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था ने 15 वर्ष से कम आयु के किशोरों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को पूरी तरह रद्द कर दिया है। संवैधानिक परिषद ने अपने फैसले में कहा कि इस विधेयक की प्राथमिक धाराएं कम उम्र के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। इस न्यायिक आदेश के बाद यूरोप के पहले व्यापक राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रतिबंध को लागू करने की योजना पर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई है। अब फ्रांसीसी सरकार को इस डिजिटल सुरक्षा कानून का नया मसौदा तैयार करने के लिए दोबारा विधायी प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक आपत्तियां

नौ सदस्यीय संवैधानिक परिषद ने कानून की विस्तृत समीक्षा करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि इस कानून का अनुच्छेद 1 संवैधानिक अधिकारों पर अनुचित आघात करता है। परिषद ने स्पष्ट रूप से कहा कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों की अभिव्यक्ति और संचार की स्वतंत्रता पर लगाया गया यह प्रतिबंध न तो उपयुक्त था, न आवश्यक और न ही आनुपातिक। यद्यपि अदालत ने स्वीकार किया कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल माध्यमों के खतरों से बचाना था, लेकिन उसने यह सिद्धांत तय किया कि मौलिक संवैधानिक अधिकारों को पर्याप्त कानूनी औचित्य के बिना सीमित नहीं किया जा सकता।

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इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने डिजिटल पहचान सत्यापन और डेटा सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे में गंभीर कमियों की ओर इशारा किया। परिषद ने ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंचने के लिए उपयोगकर्ताओं से आयु का प्रमाण मांगने की कानूनी बाध्यता पर कड़ी आपत्ति जताई। जजों ने टिप्पणी की कि प्रस्तावित विधेयक सत्यापन प्रक्रिया के दौरान व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए जरूरी कानूनी गारंटी तय करने में पूरी तरह विफल रहा। पहचान की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा की ठोस गारंटी के बिना ऐसी अनिवार्य व्यवस्था स्थापित करना असंवैधानिक है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

राष्ट्रपति मैक्रों का निर्देश और नई विधायी समय-सीमा

संसदीय मंजूरी के बाद यह मामला तब अदालत पहुंचा जब प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने विधेयक के प्रमुख हिस्सों को संवैधानिक समीक्षा के लिए परिषद को भेजा था। पिछले महीने फ्रांसीसी सांसदों द्वारा विधेयक पारित किए जाने के बाद लेकोर्नू ने इस बात की पुष्टि चाही थी कि क्या नए नियम देश के संविधान के अनुरूप हैं या नहीं। नौ सदस्यीय इस सर्वोच्च संस्था ने, जो यह जांच करती है कि संसद द्वारा बनाए गए कानून संविधान सम्मत हैं या नहीं, गहन विचार-विमर्श के बाद शुक्रवार को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

संवैधानिक परिषद के निर्णय के तुरंत बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री लेकोर्नू को नए सिरे से विधेयक का मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नया मसौदा परिषद द्वारा उठाए गए सभी कानूनी और संवैधानिक बिंदुओं को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा। मैक्रों प्रशासन ने दोहराया है कि सरकार बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और अधिकारियों को जल्द से जल्द नया खाका पेश करने को कहा गया है, ताकि 2027 की शुरुआत तक इस सुधार को संवैधानिक मानकों के तहत लागू किया जा सके।

शुरुआती योजना और खाते बंद करने का ढांचा

अदालत द्वारा खारिज किया गया यह विधेयक उस महत्वाकांक्षी नियामक पहल का हिस्सा था, जिसे जुलाई में फ्रांसीसी सांसदों का व्यापक समर्थन मिला था। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के पड़ते प्रतिकूल प्रभावों को लेकर बनी चिंताओं के बाद फ्रांस ऐसा कड़ा कदम उठाने वाला यूरोप का पहला देश बनने जा रहा था। यदि संवैधानिक परिषद इस विधेयक को मंजूरी दे देती, तो फ्रांस पूरे यूरोपीय महाद्वीप में कम उम्र के बच्चों के डिजिटल प्लेटफार्मों पर प्रवेश को प्रतिबंधित करने वाला अग्रणी राष्ट्र बन जाता।

राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा पहले घोषित योजना के अनुसार, इस प्रतिबंध को सितंबर से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना था। शुरुआती चरण के तहत सितंबर से 15 साल से कम उम्र के किसी भी नए उपयोगकर्ता को नया सोशल मीडिया खाता खोलने से रोका जाता और सभी नए खातों पर आयु सत्यापन अनिवार्य कर दिया जाता। इसके बाद जनवरी से यह व्यवस्था पहले से चल रहे सभी खातों पर लागू कर दी जाती, जिसके तहत देश भर के लाखों मौजूदा उपयोगकर्ताओं को अपना आयु प्रमाण देना होता, अन्यथा उनके खाते निलंबित कर दिए जाते।

निजता की चिंताएं और व्यावहारिक चुनौतियां

विधेयक के निर्माण के समय से ही विपक्षी नेताओं, निजता समर्थकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस कानून की व्यावहारिक उपयोगिता पर सवाल उठाए थे। आलोचकों का तर्क था कि वर्तमान में उपलब्ध आयु सत्यापन उपकरण तकनीकी रूप से बहुत प्रभावी नहीं हैं और बच्चे वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क या अन्य डिजिटल तकनीकों के जरिए इस प्रतिबंध को आसानी से बायपास कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, विरोधियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि बिना उचित तैयारी के जल्दबाजी में बनाए गए नियमों से आम नागरिकों की डिजिटल निजता को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

पेरिस से आया यह अदालती फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरे यूरोप में युवाओं द्वारा इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करने वाले कानूनों की मांग तेज हो रही है। ऐसे माहौल में फ्रांसीसी संवैधानिक परिषद द्वारा अधिकारों के संतुलन, आनुपातिकता और निजता की सुरक्षा पर दिया गया यह फैसला पूरे यूरोपीय महाद्वीप के लिए एक नया कानूनी पैमाना बन गया है, जिसे ध्यान में रखकर ही भविष्य के डिजिटल कानून तैयार किए जाएंगे।

सवाल-जवाब

फ्रांस की संवैधानिक परिषद ने सोशल मीडिया बैन कानून को क्यों रद्द किया?
संवैधानिक परिषद ने पाया कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लगाना उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अनुचित उल्लंघन है और विधेयक में डेटा निजता की सुरक्षा के पर्याप्त कानूनी इंतजाम नहीं थे।
अदालत के फैसले के बाद फ्रांसीसी सरकार का क्या कदम है?
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू को संवैधानिक परिषद की आपत्तियों को दूर करते हुए एक नया मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसे 2027 की शुरुआत तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
मूल कानून के तहत सोशल मीडिया बैन किस तरह लागू किया जाना था?
शुरुआती योजना के अनुसार सितंबर से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के नए खाते खोलने पर रोक लगनी थी और जनवरी से पुराने सभी खातों पर आयु सत्यापन अनिवार्य किया जाना था।
विधेयक का विरोध करने वाले आलोचकों की क्या मुख्य चिंताएं थीं?
आलोचकों ने आयु सत्यापन उपकरणों की प्रभावशीलता, बच्चों द्वारा प्रतिबंध को बायपास करने की संभावना और उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत डेटा निजता पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए थे।
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