फ्रांस के साहित्यिक हलकों में एक नए विवाद ने तूल पकड़ लिया है, जहाँ कनाडाई-हैती लेखक थेलिसन ऑरेलियन पर अपनी पहली ही चर्चित किताब को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार करने के संगीन आरोप लगे हैं। अड़तीस वर्षीय लेखक ने हाल ही में अपने उपन्यास 'सीता सा उ मूरिर' (या तो यह या फिर मौत) के लिए साहित्यिक सत्र का पहला बड़ा सम्मान 'प्रिक्स डु रोमन एफएनएसी' हासिल किया था। इसके साथ ही वे फ्रांसीसी भाषा के दो सबसे प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कारों, गोंकुर और रेनोदो की अंतिम सूची में भी जगह बनाने में सफल रहे हैं, जिनके परिणामों की घोषणा जल्द होने वाली है।
गुमनाम समूह के दावों से गरमाई साहित्यिक बहस
इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब 'बैलेंस तोन क्लाउड' नामक एक कम जाने-पहचाने समूह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह दावा किया कि यह उपन्यास लगभग पूरी तरह से एआई द्वारा लिखा गया है। समूह का यह नाम एंथ्रोपिक के एआई असिस्टेंट क्लाउड के संदर्भ पर आधारित है। इस समूह ने अपने पोस्ट में कहा कि उन्होंने पांडुलिपि के अलग-अलग हिस्सों और कई अनुच्छेदों की डिजिटल जांच की, जिसमें हर बार सौ फीसदी एआई सामग्री का एक समान परिणाम सामने आया।
समूह के सदस्यों की पहचान स्पष्ट नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि यह परीक्षण पैंग्राम नामक एक सॉफ्टवेयर के जरिए किया गया था। समूह का दावा है कि पैंग्राम वर्तमान में सबसे सटीक डिटेक्शन टूल है और इसके गलती करने की संभावना लगभग न के बराबर है। उनके अनुसार, यह प्रोग्राम किसी एआई जनरेटेड टेक्स्ट के मूल्यांकन में चौबीस हजार चार सौ मामलों में सिर्फ एक बार ही गलत निर्णय देता है।
लेखक ने आरोपों को किया खारिज, साक्ष्य जुटाने में जुटे
हैती में जन्मे और वर्ष 2010 में मॉन्ट्रियल आकर बसे थेलिसन ऑरेलियन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने फ्रांसीसी अखबार लिबरेशन से बात करते हुए स्पष्ट किया कि वे हमेशा से रचनात्मक कार्य और साहित्य के प्रति समर्पित रहे हैं, ऐसे में उन्हें किसी मशीन का सहारा लेने की कोई जरूरत महसूस नहीं हो सकती। लेखक ने बताया कि वे अपने संपादक के साथ मिलकर एक विस्तृत दस्तावेज तैयार कर रहे हैं, जिससे यह प्रमाणित किया जा सके कि यह पूरी किताब उन्होंने खुद अपने हाथों से लिखी है।
अपनी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए ऑरेलियन ने कहा कि उनकी जड़ें हैती और कैरेबियाई परंपराओं से जुड़ी हैं। उनकी रचना में दिखने वाली कल्पनाएं, दोहराव और भाषाई लय वास्तव में उनकी अपनी जीवंत अभिव्यक्ति का हिस्सा हैं। लेखक ने यह भी साझा किया कि उन्होंने इस किताब का पहला मसौदा वर्ष 2019 में ही तैयार कर लिया था, जबकि उस समय आम लोगों के लिए ऐसे टेक्स्ट जेनरेटिंग एआई सॉफ्टवेयर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध भी नहीं थे।
प्रकाशक का समर्थन और उपन्यास की मूल कहानी
लेखक के बचाव में उनका प्रकाशक ग्रासेट भी पूरी मजबूती के साथ सामने आया है। प्रकाशन गृह ने एक बयान जारी कर कहा कि ये आरोप एक ऐसे लेखक की छवि को गहरी ठेस पहुँचाने वाले हैं, जिनका जीवन असाधारण संघर्षों से भरा रहा है। प्रकाशक ने लेखक की इस रचना को पूरी तरह मौलिक और बेहद प्रभावशाली करार दिया है।
यह उपन्यास एक ऐसे शिक्षक के जीवन पर केंद्रित है, जो हैती में जारी गिरोहों की हिंसा और दहशत के माहौल से भाग निकलता है। विभिन्न मुश्किलों और रोमांचक मोड़ों से गुजरने के बाद वह आखिरकार कनाडा पहुँचता है, जहाँ उसे बिना किसी भय के खुलकर सांस लेने का अपना बुनियादी अधिकार दोबारा हासिल होता है। लेखक के कनाडाई प्रकाशक के मुताबिक यह किताब उनके साठ वर्षों के इतिहास में सबसे ज्यादा बिकने वाला उपन्यास बन चुकी है और इसका लगभग बीस विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किए जाने की तैयारी चल रही है। वर्ष 1988 में उत्तरी हैती के गोनाइव्स शहर में जन्मे ऑरेलियन ने अपने देश को छोड़ने से पहले मुख्य रूप से काव्य रचनाएं लिखी थीं और बाद में कनाडा पहुँचकर उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कार्य किया।
एआई डिटेक्शन टूल्स की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल
यह विवाद त्रिनिदाद के लेखक जमीर नजीर के उस चर्चित मामले की याद दिलाता है, जिनकी रचना 'द सर्पेंट इन द ग्रोव' पर जेनेरेटिव एआई के इस्तेमाल के आरोप लगे थे। इसके बाद जुलाई के महीने में उनका कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज अस्थायी रूप से वापस ले लिया गया था। हालांकि, बाद में जब आयोजकों ने जांच में पाया कि लेखन पूरी तरह वास्तविक और इंसानी प्रयास था, तो यह पुरस्कार उन्हें दोबारा सौंप दिया गया।
विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि पैंग्राम और अन्य एआई डिटेक्टर पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं। अलग-अलग सॉफ्टवेयर अक्सर एक ही टेक्स्ट का विश्लेषण करने पर विरोधाभासी परिणाम देते हैं। ये टूल्स वास्तव में यह पहचानने में असमर्थ होते हैं कि पाठ को किसने लिखा है। इसके बजाय, वे केवल उन भाषाई पैटर्न्स को तलाशते हैं जो आमतौर पर एआई द्वारा तैयार सामग्री में दिखाई देते हैं, लेकिन ऐसे पैटर्न इंसानी लेखन में भी स्वाभाविक रूप से आ सकते हैं। कई अध्ययनों से यह बात सामने आ चुकी है कि ये टूल्स इंसानी लेखन को गलती से एआई जनरेटेड करार दे देते हैं, जबकि संपादन या बदलाव के बाद एआई से लिखी सामग्री को पकड़ने में चूक जाते हैं। इसके अतिरिक्त, ये सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से मानक अंग्रेजी या फ्रांसीसी भाषा के आधार पर प्रशिक्षित होते हैं, जिसके चलते वे कैरेबियाई या अन्य क्षेत्रीय बोलियों की बारीकियों को सही ढंग से नहीं समझ पाते। आधुनिक डिटेक्टर केवल टेक्स्ट की तुलना करने के बजाय संभावनाओं और सांख्यिकीय पैटर्न्स का विश्लेषण करते हैं, जिससे गलतियों की गुंजाइश बनी रहती है।



















