फ्रांस के विभिन्न हिस्सों में एक बार फिर से तनाव का माहौल बन गया है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। पिछले दिनों भड़की हिंसा और उपद्रव की घटनाओं से सबक लेते हुए, देश भर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। राजधानी पेरिस समेत कई बड़े शहरों में सुरक्षाबलों का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य किसी भी कीमत पर पिछली बार जैसी अराजकता और नुकसान को दोहराने से रोकना है, जब असामाजिक तत्वों ने सार्वजनिक संपत्ति और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था।
सड़कों पर उतरी भारी पुलिस फोर्स और सुरक्षा उपकरण
कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाल रहे गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने जानकारी दी है कि पूरे देश में लगभग 70,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इस भारी पुलिस बल के अलावा आसमान में गश्त के लिए हेलीकॉप्टर, सुरक्षा के लिए बख्तरबंद गाड़ियां और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन यानी पानी की बौछार करने वाले वाहन भी तैयार रखे गए हैं। पिछले सप्ताह की रैलियों में पांच लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतर आए थे, जिसे देखते हुए इस बार प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
सांस्कृतिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर भारी असर
सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के तहत पेरिस के कई विश्वप्रसिद्ध कला केंद्रों और संग्रहालयों को शनिवार के दिन पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया गया। इनमें प्रसिद्ध लूर्व, ओरसे संग्रहालय, पिकासो संग्रहालय और ग्रैंड पैलैस जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। दुनिया भर में अपनी कला और संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाले प्रतिष्ठित कला मेलों में से एक 'आर्ट बेसेल' का आयोजन शुक्रवार को शुरू हुआ था, लेकिन हिंसा के अंदेशे को देखते हुए आयोजकों ने वीकेंड के सभी निर्धारित कार्यक्रमों को रद्द करने का निर्णय लिया।
इसके अलावा, पिछले सप्ताह हुए उपद्रव के दौरान निशाने पर आए इलाकों जैसे कि प्लेस डी ला रिपब्लिक के नजदीक स्थित बैंकों और अन्य दुकानों को लकड़ी के मजबूत पटलों से ढक दिया गया है ताकि उन्हें संभावित नुकसान से बचाया जा सके। हिंसा की इन घटनाओं के बाद पेरिस पुलिस ने शुरुआती दौर में दुकानदारों को खुद के स्तर पर निजी सुरक्षा गार्ड रखने की सलाह दी थी, हालांकि बाद में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कारोबारियों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का ही प्राथमिक दायित्व है। पिछले सप्ताह के अंत तक पूरे फ्रांस में करीब 3,000 दुकानों को या तो तोड़फोड़ का शिकार होना पड़ा था या उनमें लूटपाट की गई थी।
नस्ली हिंसा और गोलीबारी की गंभीर घटना
इन व्यापक प्रदर्शनों के बीच पेरिस के उपनगरीय इलाके में हुई एक हिंसक गोलीबारी की घटना ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस घटना को नस्ली भेदभाव से जुड़ा हुआ हमला करार दिया है। राजधानी के एक उपनगर में शुक्रवार को एक चलती गाड़ी से अंधाधुंध गोलियां चलाई गईं, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई और 12 साल की एक बच्ची समेत कम से कम पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद सतर्क पुलिस ने संदिग्ध हमलावर को धर दबोचा और इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी अभियोजक कार्यालय ने जांच अपने नियंत्रण में ले ली है।
देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे नस्ली भेदभाव से प्रेरित आतंकवादी हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि हमलावर के बयानों से साफ जाहिर होता है कि उसने इस नापाक हरकत की पूरी योजना पहले ही बना ली थी। पेरिस के पश्चिम में स्थित ट्रैप्स उपनगर में स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि लोगों को केवल उनकी त्वचा के रंग या उनके धर्म को लेकर बनाई गई धारणा के आधार पर निशाना बनाया गया, जिसका कोई अन्य उचित कारण नहीं था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फ्रांस में इस प्रकार की घृणित घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है।
स्थिति से सख्ती से निपटने के लिए प्रशासन ने उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का अभियान छेड़ रखा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मेक्रों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जिन्होंने भी तबाही मचाई है और तोड़फोड़ की है, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी, और देश भर में अब तक 2,400 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।



















