यूरोपीय देश माल्टा की राजधानी वैलेटा की अदालत में खोजी पत्रकार डाफने कारुआना गलीजिया की हत्या के मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। अदालत की जूरी ने आठ घंटे तक चली लंबी विचार-विमर्श की प्रक्रिया के बाद 44 वर्षीय उद्योगपति योर्गेन फेनेच को हत्या की साजिश रचने और आपराधिक संलिप्तता के सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया। जूरी ने 8-1 के भारी बहुमत से फेनेच के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। अदालत कक्ष में फैसला सुनते ही फेनेच के परिजन खुशी से झूम उठे, जबकि दूसरी ओर 53 वर्ष की आयु में मारी गई पत्रकार डाफने के परिजन बिलख पड़े। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने देश की व्यवस्थागत विफलताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं और खोजी पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है।
जूरी के फैसले पर परिजनों की प्रतिक्रिया और अदालत का माहौल
वैलेटा के खचाखच भरे अदालत कक्ष में जब जूरी ने अपना निर्णय सुनाया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। 8-1 के निर्णय से बरी होने के बाद योर्गेन फेनेच के परिवार के सदस्यों ने अदालत के भीतर ही खुशी की चीखें मारी और राहत की सांस ली। इसके ठीक विपरीत, डाफने कारुआना गलीजिया के परिजन अदालत परिसर में ही रो पड़े। फैसले के तुरंत बाद पत्रकार के परिवार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि डाफने की नृशंस हत्या के नौ साल बाद भी उन संस्थागत विफलताओं में कोई सुधार नहीं हुआ है, जिनके कारण यह जघन्य वारदात संभव हो सकी थी। परिवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्थायी न्याय का अर्थ यह होता है कि भविष्य में किसी भी अन्य व्यक्ति या पत्रकार को इस प्रकार के जानलेवा जोखिमों का सामना न करना पड़े। उनका मानना है कि माल्टा की सरकार और व्यवस्था डाफने के जीवन की रक्षा करने में पूरी तरह से विफल रही है, और अब देश का यह कर्तव्य बनता है कि वह आगे किसी अन्य निर्दोष की जान जाने से रोके।
फेनेच पर लगे आरोप और बचाव पक्ष की दलीलें
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया था कि उद्योगपति योर्गेन फेनेच डाफने कारुआना गलीजिया को रास्ते से हटाना चाहते थे। अभियोजन का दावा था कि डाफने फेनेच से जुड़ी कुछ अत्यंत गोपनीय और संवेदनशील व्यावसायिक जानकारियों को उजागर करने वाली थीं। माल्टा के सबसे अमीर व्यवसायियों में शुमार फेनेच उस प्रमुख कंपनी के मालिक थे, जिसके संदिग्ध लेन-देन पर डाफने ने अपनी मृत्यु से कुछ महीने पहले विस्तृत रिपोर्ट लिखी थी। हालांकि, फेनेच ने शुरू से ही अपने ऊपर लगे सभी आपराधिक आरोपों और साजिश के दावों को सिरे से खारिज किया। मुकदमे की कार्यवाही के दौरान उन्होंने खुद को बचाते हुए अपनी जिम्मेदारी को अपने पूर्व करीबी मित्र कीथ शेम्बरी की तरफ मोड़ने की कोशिश की। कीथ शेम्बरी माल्टा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ थे और डाफने की खोजी रिपोर्टों के प्रमुख निशाने पर रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने अदालत को सूचित किया कि शेम्बरी कभी भी इस मामले में आधिकारिक संदिग्ध नहीं रहे, और शेम्बरी ने भी हत्या में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से हमेशा इनकार किया है।
खोजी पत्रकार डाफने का काम और पनामा पेपर्स से जुड़ाव
डाफने कारुआना गलीजिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक निडर खोजी पत्रकार के रूप में जानी जाती थीं। उन्होंने वित्तीय भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार आवाज उठाई। वह अपने लोकप्रिय व्यक्तिगत ब्लॉग रनिंग कमेंट्री के माध्यम से सत्ता के गलियारों में मौजूद भ्रष्टाचार की पोल खोलती रहती थीं। वर्ष 2016 के बहुचर्चित पनामा पेपर्स खुलासे में डाफने की केंद्रीय भूमिका थी। पनामा की एक लॉ फर्म से लीक हुए गोपनीय दस्तावेजों के इस विशाल डेटाबेस के आधार पर उन्होंने माल्टा के शीर्ष सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों के ऑफशोर खातों व विदेशी वित्तीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। उनके इन खुलासों ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। इसके बाद अक्टूबर 2017 में एक सुनियोजित कार बम धमाके में उनकी दर्दनाक मौत हो गई। 53 वर्ष की आयु में हुई इस नृशंस हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और इसके विरोध में माल्टा की सड़कों पर अभूतपूर्व जन आक्रोश तथा जनप्रदर्शन देखने को मिले थे।
हत्याकांड से उपजा राजनीतिक भूचाल और पूर्व में हुई सजाएंडाफने की हत्या के बाद माल्टा में उथल-पुथल का माहौल बन गया था। इस मामले की आँच तत्कालीन प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट के दफ्तर तक पहुँची। यद्यपि जोसेफ मस्कट को सीधे तौर पर हत्या की साजिश से कभी नहीं जोड़ा गया, लेकिन इस मामले से पैदा हुए भारी राजनीतिक दबाव और सार्वजनिक असंतोष के कारण उन्हें जनवरी 2020 में अपने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस हत्याकांड से जुड़े कानूनी मामलों में पूर्व में भी महत्वपूर्ण फैसले आ चुके हैं। वर्ष 2022 में माल्टा की एक अदालत ने दो भाइयों जॉर्ज डेजियोर्जियो और अल्फ्रेड डेजियोर्जियो को डाफने की हत्या को अंजाम देने के जुर्म में 40-40 साल की कड़ी जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद वर्ष 2025 में माल्टा के न्यायाधीश ने दो अन्य व्यक्तियों रॉबर्ट एगियस और जेमी वेला को कार बम की आपूर्ति करने और विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराने के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद, हत्या की मुख्य साजिश रचने के आरोपी योर्गेन फेनेच के बरी होने से इस पूरे मामले में न्याय की अंतिम परिणति पर सवाल खड़े हो गए हैं।


















