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प्राग की सड़कों पर हजारों लोग, बाबिश सरकार के मीडिया फंडिंग प्लान के खिलाफ उठी आवाज़यूरोप
3 घंटे पहले· 2

प्राग की सड़कों पर हजारों लोग, बाबिश सरकार के मीडिया फंडिंग प्लान के खिलाफ उठी आवाज़

चेक सरकार के सार्वजनिक प्रसारकों की फंडिंग व्यवस्था बदलने के प्रस्ताव के खिलाफ रविवार को प्राग में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। विरोधियों का कहना है कि इस कदम से मीडिया की स्वतंत्रता गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

Amit PatelAmit PatelBusiness Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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प्राग में जनसैलाब, सरकारी नियंत्रण के डर से लोग एकजुट

रविवार को चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में हजारों लोग चेक पब्लिक टेलीविजन के दफ्तर के बाहर जमा हुए। उनके गुस्से की वजह थी सरकार का वह प्रस्ताव जो देश के सार्वजनिक प्रसारकों की फंडिंग का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। आयोजकों ने इसे महज एक बजट विवाद नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित का मुद्दा बताया। उनका कहना था कि यह मीडिया की आज़ादी पर सीधा हमला है।

सरकार का प्रस्ताव क्या है?

प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिश की अगुवाई वाली सरकार ने सोमवार को यह प्रस्ताव मंजूर किया। इसके तहत अगले साल से पब्लिक रेडियो और टेलीविजन को उनकी फंडिंग सीधे राज्य के बजट से मिलेगी। अभी यह पैसा आम नागरिकों, घरों और कारोबारों से वसूले जाने वाले लाइसेंस शुल्क से आता है। आलोचकों का तर्क है कि जब प्रसारकों की आमदनी हर साल बजट की राजनीतिक बहसों पर निर्भर होगी, तो संपादकीय निष्पक्षता पर दबाव अपने आप बढ़ जाएगा।

15 फीसदी कटौती, भविष्य की कोई गारंटी नहीं

देश के भीतर के विरोधियों के साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने भी इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की। बड़ी चिंता यह है कि नई व्यवस्था के तहत प्रसारकों को इस साल की तुलना में करीब 15 फीसदी कम पैसा मिलेगा। इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि प्रस्ताव में आने वाले वर्षों के बजट की कोई दीर्घकालिक गारंटी नहीं है। पब्लिक रेडियो और टेलीविजन दोनों के निदेशकों ने साफ चेतावनी दी कि इस कटौती की वजह से उन्हें बड़े पैमाने पर खर्च घटाना पड़ेगा और सैकड़ों नौकरियां जा सकती हैं, जिसका असर प्रोग्रामिंग और रोज़मर्रा के संचालन दोनों पर पड़ेगा।

बाबिश ने अपने बचाव में कहा कि मीडिया संस्थानों को अपना खर्च कम करना चाहिए। वहीं, मौजूदा लाइसेंस शुल्क मॉडल के समर्थकों का मानना है कि स्थिर और अनुमानित फंडिंग ही स्वतंत्र पत्रकारिता की असली ढाल है।

हंगरी और स्लोवाकिया की मिसाल

प्रदर्शन में शामिल लोगों और आयोजकों ने इस कदम की तुलना पड़ोसी देशों में लोकलुभावन सरकारों के उठाए कदमों से की। उन्होंने प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के नेतृत्व वाले स्लोवाकिया और पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान के हंगरी को चेतावनी की मिसाल बताया। प्रदर्शनकारियों की दलील थी कि बजट पर नियंत्रण मिलने से तीन पार्टियों का यह गठबंधन मीडिया कवरेज पर अपनी मनमर्ज़ी चला सकता है। यह भी सामने आया कि बाबिश, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य और उनके वफादार सांसद पहले से ही सार्वजनिक और अन्य मुख्यधारा के मीडिया पर बार-बार हमले करते रहे हैं।

हड़ताल और व्यापक राजनीतिक एजेंडा

रविवार का यह प्रदर्शन उस वॉर्निंग हड़ताल से ठीक एक दिन पहले हुआ, जिसकी योजना प्रसारकों के कर्मचारियों ने सोमवार के लिए बनाई थी। इससे पहले प्राग और कई क्षेत्रीय राजधानियों में भी विरोध मार्च निकाले जा चुके थे। आयोजकों ने ज़ोर देकर कहा कि फंडिंग का यह विवाद गठबंधन सरकार के उस बड़े एजेंडे से अलग नहीं है, जिसमें यूक्रेन को समर्थन देने से किनारा करना और यूरोपीय संघ की कुछ अहम नीतियों को नकारना शामिल है।

प्रदर्शनकारियों की सीधी बात

मिलियन मोमेंट्स फॉर डेमोक्रेसी समूह के प्रमुख आयोजक मिकुलाश मिनार ने इस पूरे मुद्दे को दो टूक शब्दों में रखा:

मीडिया नेताओं की नहीं है। यह हम सबकी है और हम इसे हमसे नहीं छिनने देंगे।

वहां मौजूद हर प्रदर्शनकारी इसी भावना के साथ खड़ा था। उनका मानना था कि सार्वजनिक प्रसारक जनता की साझा विरासत हैं और फंडिंग का यह बदलाव, चाहे जो भी तर्क दिया जाए, उन्हें राजनीतिक नियंत्रण की ओर धकेलने की कोशिश है।

इसका आप पर असर

आपके लिए क्या मायने रखता है:

  • मीडिया स्वतंत्रता में रुचि रखने वालों के लिए: चेक गणराज्य का यह मामला एक वैश्विक सबक है कि जब भी सरकार सीधे सार्वजनिक मीडिया का बजट तय करती है, तो संपादकीय निष्पक्षता पर राजनीतिक दबाव का रास्ता खुल जाता है।
  • मीडिया कर्मचारियों के लिए: प्रस्तावित 15 फीसदी फंडिंग कटौती के चलते पब्लिक रेडियो और टेलीविजन में सैकड़ों नौकरियां खत्म हो सकती हैं।

सवाल-जवाब

लोग प्राग में प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
प्रदर्शनकारियों को डर है कि लाइसेंस शुल्क की जगह सरकारी बजट से फंडिंग देने पर पब्लिक रेडियो और टेलीविजन राजनीतिक दबाव में आ जाएंगे और उनकी संपादकीय आज़ादी खतरे में पड़ जाएगी।
सरकार का यह प्रस्ताव क्या बदलेगा?
अगले साल से पब्लिक रेडियो और टेलीविजन को फंडिंग सीधे राज्य के बजट से मिलेगी, जो अभी व्यक्तियों, घरों और कारोबारों द्वारा भरे जाने वाले लाइसेंस शुल्क से होती है।
नई व्यवस्था में प्रसारकों को इस साल की तुलना में कितना कम पैसा मिलेगा?
नए प्रस्ताव के तहत इस साल की तुलना में करीब 15 फीसदी कम फंडिंग मिलेगी और भविष्य के बजट की कोई दीर्घकालिक गारंटी भी नहीं है।
प्रसारकों के निदेशकों ने क्या चेतावनी दी?
पब्लिक रेडियो और टेलीविजन के निदेशकों ने कहा कि कम फंडिंग की वजह से बड़े पैमाने पर खर्च घटाना पड़ेगा और सैकड़ों नौकरियां जा सकती हैं।
किन देशों की मिसाल दी गई?
विरोधियों ने प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के नेतृत्व वाले स्लोवाकिया और पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान के हंगरी को चेतावनी की मिसाल के तौर पर पेश किया।
बाबिश ने इस प्रस्ताव का बचाव कैसे किया?
बाबिश ने कहा कि सार्वजनिक मीडिया संस्थानों को अपना खर्च कम करना चाहिए।
प्रदर्शन का मुख्य आयोजक कौन था?
मिलियन मोमेंट्स फॉर डेमोक्रेसी समूह के मिकुलाश मिनार इस प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक थे।
क्या हड़ताल भी होने वाली थी?
हां, प्रसारकों के कर्मचारियों ने रविवार के प्रदर्शन के अगले दिन यानी सोमवार को वॉर्निंग हड़ताल की योजना बनाई थी।
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