दक्षिण लेबनान के सीमावर्ती इलाकों में इजराइली वायुसेना द्वारा किए गए सिलसिलेवार हवाई हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 12 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह भीषण हमला टिबनीन शहर में स्थित एक कब्रिस्तान के प्रार्थना हॉल पर हुआ। इन सैन्य कार्रवाइयों के साथ ही इजराइली सेना ने तटीय शहर मंसूरी के निवासियों के लिए एक महीने से भी अधिक समय में पहला औपचारिक निकासी आदेश जारी किया है। हैरानी की बात यह है कि यह नया सैन्य तनाव ठीक उसी समय पैदा हुआ जब रोम में अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देशों के प्रतिनिधि संघर्ष विराम को कायम रखने के लिए बातचीत कर रहे थे। इसके बावजूद, सीमा पर एक बार फिर बंमबारी शुरू हो गई और इजराइली अधिकारियों ने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह द्वारा किए गए समझौते के उल्लंघन का जवाब है।
टिबनीन के प्रार्थना हॉल पर हमला और मंसूरी में तबाही
बुधवार दोपहर को हुए इस नए हमले का सबसे दर्दनाक असर टिबनीन शहर में देखा गया। यहां स्थानीय कब्रिस्तान परिसर में बने प्रार्थना हॉल की छत पर इजराइली गोला आ गिरा। लेबनानी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस बंमबारी में एक नागरिक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया और 12 अन्य लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ठीक इसी समय, पश्चिम में स्थित मंसूरी शहर पर भी इजराइली लड़ाकू विमानों ने भीषण बंमबारी की। मंसूरी के मेयर हैदर मदिहली ने स्थिति की गंभीरता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इजराइली युद्धक विमानों ने शहर के बाहरी इलाके में स्थित गज़ालेह क्षेत्र में चार अलग-अलग हवाई हमले किए। इन हमलों में कई इमारतों और निजी विला को निशाना बनाया गया, जिससे इलाके में भारी ढांचागत नुकसान पहुंचा है।
हवाई हमलों के बाद मंसूरी में दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए तेजी से भागने लगे। मेयर हैदर मदिहली के अनुसार, डरे-सहमे परिवारों ने अपने वाहनों में जरूरी सामान लादा और तटीय सड़क से होते हुए दक्षिण के सबसे बड़े शहर टायर की ओर पलायन करना शुरू कर दिया। मेयर ने बताया कि हाल के हफ्तों में शहर में रहने वाले लोगों की संख्या में लगातार गिरावट आई थी। 19 जून को हुए संघर्ष विराम समझौते के बाद लगभग 120 विस्थापित परिवार मंसूरी वापस लौट आए थे। लेकिन जैसे-जैसे इजराइली बंमबारी तेज होती गई, वैसे-वैसे लोग फिर से शहर छोड़ने लगे। बुधवार के हमले से ठीक पहले तक शहर में केवल 40 से 50 परिवार ही बचे थे, और अब वे भी अपनी जान बचाने के लिए पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।
मंसूरी में निकासी का नया आदेश और सुरक्षा क्षेत्र पर विवाद
बुधवार को तनाव उस समय अचानक बढ़ गया जब इजराइली सेना के अरबी भाषा के प्रवक्ता ने एक चेतावनी जारी की। इस आदेश में मंसूरी के निवासियों से कहा गया कि वे संभावित सैन्य कार्रवाई से पहले तुरंत अपने घरों को खाली कर दें। इस चेतावनी के महज 30 मिनट बाद ही चिन्हित ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए गए। लेबनान के दक्षिणी हिस्से में 14 जून के बाद से जारी किया गया यह पहला औपचारिक निकासी आदेश था। इससे पहले 14 जून को इजराइली सेना ने सीमा पार से 29 शहरों और गांवों के लोगों को अपने घर छोड़कर जाने का निर्देश दिया था।
इजराइली सैन्य सूत्रों का कहना है कि यह हमला हिज्बुल्लाह द्वारा संघर्ष विराम के नियमों के उल्लंघन के जवाब में किया गया है। इजराइली मीडिया को जानकारी देते हुए एक सैन्य सूत्र ने दावा किया कि मंसूरी में विस्थापित नागरिकों की वापसी लेबनानी सेना के संरक्षण में कराई जा रही थी, जो कि तय समझौतों का सीधा उल्लंघन है। सूत्र के मुताबिक लेबनानी सेना ने इलाके में एक चेकपॉइंट स्थापित किया था। इजरायल का कहना है कि मंसूरी शहर उसकी घोषित 10 किलोमीटर (छह मील) गहरी सुरक्षा पट्टी के भीतर आता है, जिसे उसने सीमा के साथ लेबनानी क्षेत्र में कब्जा कर रखा है। इजराइली पक्ष का तर्क है कि इस सुरक्षा क्षेत्र में ऐसी सैन्य गतिविधियां चलाई जा रही थीं, जिनसे लेबनानी नागरिकों की जान को खतरा हो सकता था।
रोम में शांति वार्ता और निरस्त्रीकरण पर जारी गतिरोध
सीमा पर जारी इस हिंसा के बीच इटली की राजधानी रोम में उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठक चल रही थी। यहां अमेरिका की देखरेख में इजरायल और लेबनान के प्रतिनिधि संघर्ष विराम को बचाए रखने के रास्ते तलाश रहे थे। जून के उत्तरार्ध में इजरायल, लेबनान और अमेरिका के बीच एक त्रिपक्षीय ढांचागत समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते की मुख्य शर्त यह थी कि इजरायल दक्षिणी लेबनान के कब्जे वाले इलाकों से अपनी सेना को चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाएगा, और इसके बदले में हिज्बुल्लाह का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण किया जाएगा।
इस त्रिपक्षीय योजना के तहत दो सप्ताह पहले एक शुरुआती कदम उठाया गया था, जब इजराइली सैनिक ज़ौतार अल-ग़रबीया गांव से पीछे हट गए थे। इसके बाद लेबनानी सेना को वहां पायलट ज़ोन के तहत तैनात होने की अनुमति मिली थी। हालांकि, समझौते के बाकी हिस्सों पर गहरा गतिरोध बना हुआ है। हिज्बुल्लाह ने इस शर्त को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें इजराइली वापसी को संगठन के निरस्त्रीकरण से जोड़ा गया था। हिज्बुल्लाह का कहना है कि यह शर्त उनकी रेड लाइन को पार करती है। वहीं बुधवार को हुए हमलों और निकासी आदेशों के बाद हिज्बुल्लाह की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या बयान जारी नहीं किया गया है।
मानवीय संकट और विस्थापितों की स्थिति
सैन्य गतिविधियों के दोबारा शुरू होने से लेबनान में राहत और पुनर्वास के प्रयासों पर बुरा असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, संघर्ष में आई कमी के बाद लेबनान भर में विस्थापित हुए 8,20,000 से अधिक लोग अपने मूल क्षेत्रों और गांवों में वापस लौटने लगे थे। नागरिक अपने तबाह हो चुके मकानों की मरम्मत करने और सामान्य जीवन को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे थे।
इसके बावजूद, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि देश में संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। लगभग 3,60,000 लोग अब भी लेबनान के अलग-अलग हिस्सों में विस्थापित जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। इनमें से करीब 26,000 लोग सरकार द्वारा संचालित राहत शिविरों में रह रहे हैं। मंसूरी और टिबनीन में हुए ताजा हमलों से स्पष्ट है कि सीमा पर हालात कितने नाजुक हैं, और कभी भी नए सिरे से पलायन की नौबत आ सकती है।
मार्च से शुरू हुए युद्ध की पृष्ठभूमि और कुल मौतों का आंकड़ा
यह भीषण सैन्य संघर्ष 2 मार्च को शुरू हुआ था, जब लेबनान भी इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग में घसीट लिया गया था। 2 मार्च को हिज्बुल्लाह ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के जवाब में इजरायल पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागे थे। इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान भर में व्यापक हवाई हमले शुरू किए और दक्षिणी लेबनान के एक बड़े हिस्से पर आक्रमण करके कब्जा जमा लिया।
लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2 मार्च से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक कम से कम 4,333 लोगों की मौत हो चुकी है। इन मृतकों में 392 महिलाएं और 253 बच्चे शामिल हैं। हालांकि दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम का ऐलान किया जा चुका था, लेकिन हिंसा पूरी तरह नहीं थमी है। स्वास्थ्य मंत्रालय का रिकॉर्ड दर्शाता है कि संघर्ष विराम लागू होने के बाद से अब तक 353 लोगों की जान जा चुकी है। दूसरी ओर, इजराइली अधिकारियों के अनुसार इस युद्ध के दौरान सीमा के दोनों ओर इजरायल के 38 सैनिकों और 4 आम नागरिकों की मौत हुई है।


















