भारतीय मनोरंजन उद्योग में कई कलाकारों ने बेहद कम उम्र में अपनी अलग पहचान बनाई है, लेकिन कुछ ही ऐसे नाम हैं जिन्होंने संगीत, अभिनय और टेलीविजन एंकरिंग तीनों क्षेत्रों में सफलता हासिल की है। आदित्य नारायण की जीवन यात्रा ऐसे ही बहुमुखी हुनर का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करती है। 6 अगस्त 1987 को मुंबई में जन्मे आदित्य को संगीत की समझ विरासत में मिली, क्योंकि उनके पिता उदित नारायण देश के प्रख्यात पार्श्व गायक हैं और उनकी माता दीपा नारायण भी एक कुशल गायिका हैं। घर में बचपन से ही सुरीला माहौल होने के कारण उनका झुकाव बहुत छोटी उम्र में ही संगीत की ओर हो गया था।
कल्याणजी वीरजी शाह से शुरुआती शिक्षा और बाल कलाकार के रूप में पहला कदम
संगीत के प्रति आदित्य की लगन को देखते हुए उन्हें प्रख्यात संगीतकार कल्याणजी वीरजी शाह के मार्गदर्शन में शुरुआती गायन की बारीकियां सिखाई गईं। इसके बाद उन्होंने 'लिटिल वंडर्स' के मंच पर अपनी गायकी का हुनर प्रस्तुत करना शुरू किया, जहां से उनके अभिनय और गायन के अवसरों का रास्ता खुला। साल 1992 में उन्होंने नेपाली फिल्म 'मोहिनी' के लिए अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया। इसके कुछ वर्षों बाद, साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म 'अकेले हम अकेले तुम' में उन्हें अपने पिता उदित नारायण के साथ मिलकर गाना गाने का बेहतरीन मौका प्राप्त हुआ। पिता-पुत्र की इस जुगलबंदी और आदित्य की सुरीली आवाज को श्रोताओं ने खूब सराहा, जिसके बाद उन्हें हिंदी सिनेमा से लगातार नए अवसर मिलने लगे।
सुभाष घई का भरोसा और सलमान खान के साथ यादगार अभिनय
आदित्य नारायण की प्रतिभा से प्रभावित होकर जाने-माने फिल्म निर्देशक सुभाष घई ने उन्हें फिल्म 'परदेस' में एक बाल कलाकार की भूमिका सौंपी। इस फिल्म के जरिए उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपना पहला कदम रखा। इसके बाद वह सलमान खान और ट्विंकल खन्ना की मुख्य भूमिका वाली मशहूर फिल्म 'जब प्यार किसी से होता है' में नजर आए। इस फिल्म में आदित्य ने सलमान खान के बेटे कबीर धनराजगिर का किरदार निभाया था। पर्दे पर उनके सहज अभिनय और मासूम अंदाज की दर्शकों और समीक्षकों ने जमकर तारीफ की थी।
बतौर बाल गायक आदित्य नारायण ने अपने करियर में 100 से भी अधिक गानों में अपनी आवाज दी। फिल्म 'मासूम' का लोकप्रिय गीत 'छोटा बच्चा जान के' उनकी पहचान का पर्याय बन गया। इस गाने की जबरदस्त सफलता ने उन्हें देश के कोने-कोने में लोकप्रियता दिलाई और इसी गाने के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ बाल गायक का प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।
7 साल की उम्र में इनकम टैक्स और 'शापित' से हीरो बनने की कोशिश
बचपन में मिली इस अभूतपूर्व सफलता से आदित्य नारायण की कमाई इतनी अधिक होने लगी थी कि महज 7 साल की उम्र में ही उन्हें इनकम टैक्स का भुगतान करना पड़ता था। एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने अपने बचपन की इस दिलचस्प बात का जिक्र करते हुए बताया था कि इतनी छोटी उम्र में उन्हें पैसों की बारीकियों या टैक्स की तकनीकी प्रक्रिया की ज्यादा समझ नहीं थी। जब वह बड़े हुए, तब जाकर उन्हें इस बात का अंदाजा हुआ कि 7 साल की उम्र में इतनी बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी उठाना कितनी अनोखी बात थी।
उम्र बढ़ने के साथ आदित्य ने साल 2010 में आई फिल्म 'शापित' के जरिए बतौर मुख्य अभिनेता अपने सफर की शुरुआत की। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा व्यावसायिक कमाल नहीं दिखा सकी और फ्लॉप साबित हुई, लेकिन इस फिल्म के लिए आदित्य द्वारा गाए गए और लिखे गए गानों को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस अनुभव के बाद उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्गठित किया और फिल्मों में अभिनय की जगह संगीत रचना तथा टेलीविजन होस्टिंग पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया।
टेलीविजन होस्टिंग की दुनिया में दबदबा और आगे का सफर
फिल्मों से रुख मोड़ने के बाद आदित्य नारायण ने छोटे पर्दे की दुनिया में अपनी एक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने 'सा रे गा मा पा' और 'इंडियन आइडल' जैसे देश के सबसे बड़े और लोकप्रिय संगीत रियलिटी शो में होस्ट के रूप में काम किया। मंच पर उनका चुटीला अंदाज, तुरंत हाजिरजवाबी और दर्शकों से सीधा जुड़ाव उन्हें छोटे पर्दे का सबसे पसंदीदा एंकर बना गया। टीवी होस्टिंग के अलावा उन्होंने अपनी क्षमताओं को चुनौती देते हुए एडवेंचर रियलिटी शो 'फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी' में बतौर प्रतियोगी हिस्सा लिया, जहां उनके जुझारू रूप को दर्शकों ने बेहद पसंद किया।


















