महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में आयोजित बॉम्बे हाई कोर्ट क्लर्क टाइपिंग स्किल टेस्ट के दौरान तकनीकी बाधाओं के चलते परीक्षार्थियों का आक्रोश फूट पड़ा। राज्य भर के कई परीक्षा केंद्रों पर सर्वर डाउन होने और टाइपिंग मशीनों के काम न करने के कारण समय पर टेस्ट शुरू नहीं हो सका। इसके विरोध में अभ्यर्थियों ने जोरदार हंगामा किया और कल्याण में जिला सत्र न्यायालय के न्यायाधीश की गाड़ी रोक दी। स्थिति बिगड़ती देख बॉम्बे हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद लिखित निर्देश जारी किए गए, जिसमें प्रभावित उम्मीदवारों की दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया गया है। इस लिखित आश्वासन के बाद ही अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन वापस लिया।
कल्याण में न्यायाधीश की कार के सामने लेटे अभ्यर्थी
रविवार को आयोजित इस कौशल परीक्षा के दौरान कल्याण स्थित एपीएमसी मार्केट केंद्र पर लगभग 600 से अधिक अभ्यर्थी उपस्थित हुए थे। परीक्षा केंद्र पर कई घंटे बीत जाने के बावजूद मशीनें और सिस्टम सुचारू रूप से चालू नहीं हो सके। नाराज अभ्यर्थियों ने केंद्र पर मौजूद जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण मांगा और प्रशासनिक विफलता के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान जिला सत्र न्यायालय के न्यायाधीश प्रवीण सय्यद वहां पहुंचे। अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्हें न्यायाधीश से बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह परिसर के पिछले दरवाजे से जाने की कोशिश कर रहे थे। इस बात से उग्र होकर छात्र उनकी कार के सामने बैठ गए और कुछ परीक्षार्थी वाहन के नीचे लेट गए।
बॉम्बे हाई कोर्ट का निर्देश और पुलिस की मध्यस्थता
घटना की जानकारी मिलने के बाद कल्याण परिमंडल के जोन डीसीपी अतुल झेंडे और एसीपी अशोक होनमाने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित छात्रों से बातचीत की और माहौल को शांत करने का प्रयास किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुंबई हाई कोर्ट की ओर से आधिकारिक लिखित निर्देश जारी किया गया। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि तकनीकी गड़बड़ियों के कारण परीक्षा से वंचित रहे सभी छात्रों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके अलावा, हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी भी प्रभावित छात्र को अनुपस्थित नहीं ठहराया जाएगा। लिखित आदेश मिलने के बाद परीक्षार्थियों ने न्यायाधीश के वाहन का रास्ता छोड़ा और अपना देर रात तक चला प्रदर्शन समाप्त किया।
एजेंसी की रिपोर्ट में तकनीकी खामी स्वीकार
परीक्षार्थियों के भारी विरोध के बाद परीक्षा का संचालन करने वाली कंपनी सोर्नेट आईटीएस प्राइवेट लिमिटेड ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि तकनीकी समस्याओं की वजह से कई केंद्रों पर तय समय अनुसार परीक्षा आरंभ नहीं कराई जा सकी। रिपोर्ट के अनुसार अभ्यर्थी समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचे थे, लेकिन सिस्टम की खराबी के कारण वे प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके।
पूरे राज्य में उभरीं खामियां और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
तकनीकी अव्यवस्था की यह समस्या केवल कल्याण तक सीमित नहीं थी। राज्य के छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, वाशिम, भंडारा और अन्य हिस्सों में स्थित परीक्षा केंद्रों पर भी उम्मीदवारों ने गंभीर अव्यवस्था के आरोप लगाए। कई जगहों पर टेस्ट के दौरान कीबोर्ड खराब मिले तो कहीं परीक्षार्थी खुद ब खुद लॉग आउट हो गए। छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के समर्थन में उतरकर फिर से परीक्षा कराने की मांग उठाई।
व्यवस्था सुधारने की उठी मांग
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधि शांतनु बिरोजे ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि परीक्षार्थी अपने करियर को संवारने के लिए केंद्रों पर आते हैं, न कि सड़कों पर आंदोलन करने के लिए। सरकार और प्रशासन को भर्ती परीक्षा का तकनीकी ढांचा पूरी तरह दुरुस्त करना चाहिए ताकि किसी भी उम्मीदवार का कीमती समय और भविष्य इस तरह के तकनीकी व्यवधानों की वजह से दांव पर न लगे।



















