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नीट यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई का बड़ा खुलासा, एनटीए में बिना लिखित नियमों के तय हो रहे थे एक्सपर्ट्सपरीक्षा
13 अग॰ 2026, 9:08 am (58 दिन पहले)· 1

नीट यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई का बड़ा खुलासा, एनटीए में बिना लिखित नियमों के तय हो रहे थे एक्सपर्ट्स

दिल्ली की विशेष अदालत ने नीट यूजी पेपर लीक मामले में दाखिल सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है, जिसमें खुलासा हुआ है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों के चयन के लिए कोई लिखित नीति मौजूद नहीं थी।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की कार्यप्रणाली और व्यवस्था पर नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले के बाद गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 28 जुलाई को केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई द्वारा दाखिल की गई विस्तृत चार्जशीट पर औपचारिक संज्ञान ले लिया है। इस व्यापक जांच दस्तावेज में 13 आरोपियों के नाम दर्ज किए गए हैं और 360 गवाहों के विस्तृत बयान शामिल किए गए हैं। सीबीआई की इस चार्जशीट में सबसे चौंकाने वाली बात देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने, उनका अनुवाद करने और मॉडरेशन की प्रक्रिया को लेकर सामने आई है, जहां विषय विशेषज्ञों का चयन बिना किसी ठोस नीति या निगरानी के किया जा रहा था।

सिफारिशों और व्यक्तिगत संपर्कों से बांटे जा रहे थे प्रश्नपत्र के काम

सीबीआई की जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयानों से यह साफ हुआ है कि एजेंसी के पास प्रश्नपत्रों की रूपरेखा बनाने और उनकी समीक्षा करने वाले शिक्षकों के चयन के लिए कोई लिखित योग्यता या मानदंड निर्धारित नहीं थे। चार्जशीट में दर्ज महाराष्ट्र के एक फिजिक्स विशेषज्ञ के बयान के अनुसार, एनटीए इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए पूरी तरह से पुराने जुड़े लोगों की व्यक्तिगत सिफारिशों पर निर्भर रहता था। पहले से मौजूद एक्सपर्ट्स अपने परिचित शिक्षकों और दोस्तों के नाम आगे बढ़ाते थे, जिसके बाद उन्हें ही प्रश्नपत्र सेट करने अथवा मॉडरेशन का काम सौंप दिया जाता था। इस अनौपचारिक व्यवस्था के कारण चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और मानकों की अनदेखी होती रही।

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बहुस्तरीय टीम पर निगरानी तंत्र का पूरी तरह अभाव

प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी व्यवस्था कई चरणों में विभाजित होती है। इसमें विषय विशेषज्ञों के अलावा आइटम राइटर्स, मॉडरेटर्स और अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने वाले शिक्षक शामिल रहते हैं। अनुवाद कार्य के लिए प्रत्येक भाषा में 2 से 4 शिक्षकों को जिम्मेदारी दी जाती है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी के बावजूद उनके काम और गोपनीयता पर नजर रखने का कोई सुदृढ़ प्रशासनिक ढांचा मौजूद नहीं था। निगरानी तंत्र की इसी ढिलाई और लापरवाही की वजह से प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के किसी भी स्तर से जानकारी बाहर लीक होने का जोखिम लगातार बना रहता था।

पुणे के परिचितों को शामिल कराने का मामला और पारदर्शिता पर सवाल

चार्जशीट में पुणे से ताल्लुक रखने वाले एक केमिस्ट्री एक्सपर्ट के बयान का भी उल्लेख है, जो पिछले 6 से 7 सालों से एनटीए से जुड़े हुए थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव और पहचान का इस्तेमाल करके पुणे के अपने कई दोस्तों और परिचितों को एनटीए के एक्सपर्ट पैनल में शामिल करा दिया। हद तो तब हो गई जब सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा के दौरान एनटीए के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ मतभेद होने के बावजूद, तालमेल और प्रबंधन की पूरी कमान उन्हीं के हाथों में बनी रही। यह पूरा घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही का किस हद तक अभाव था।

सवाल-जवाब

सीबीआई की चार्जशीट में एनटीए को लेकर क्या मुख्य खुलासा हुआ है?
सीबीआई की चार्जशीट से खुलासा हुआ है कि एनटीए के पास नीट यूजी के प्रश्नपत्र बनाने, अनुवाद करने और मॉडरेशन करने वाले विशेषज्ञों के चयन की कोई लिखित नीति या योग्यता मानदंड नहीं थे।
चार्जशीट कब दाखिल की गई और इसमें कितने आरोपी शामिल हैं?
सीबीआई ने 28 जुलाई को दिल्ली की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया है। इसमें 13 आरोपी और 360 गवाहों के बयान शामिल हैं।
प्रश्नपत्र तैयार करने में एक्सपर्ट्स का चयन किस आधार पर किया जा रहा था?
विशेषज्ञों का चयन बिना किसी लिखित नियम के, पहले से जुड़े पैनल के सदस्यों की व्यक्तिगत सिफारिशों और पहचान के आधार पर किया जा रहा था।
अनुवाद प्रक्रिया में कितने शिक्षक शामिल थे और उसमें क्या कमी पाई गई?
प्रत्येक भाषा के अनुवाद के लिए 2 से 4 शिक्षकों को लगाया जाता था, लेकिन निगरानी का कोई सुदृढ़ सिस्टम न होने से हर स्तर पर पेपर लीक का खतरा बना रहता था।
पुणे के केमिस्ट्री एक्सपर्ट से जुड़ा कौन सा मामला चार्जशीट में सामने आया है?
एनटीए से 6-7 वर्षों से जुड़े एक केमिस्ट्री एक्सपर्ट ने अपने प्रभाव से पुणे के कई परिचितों को पैनल में शामिल कराया और सैनिक स्कूल परीक्षा के दौरान अधिकारी से विवाद के बाद भी व्यवस्था की कमान उन्हीं के पास रही।
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