एप्पल के लोकप्रिय डेस्कटॉप मैक मिनी की बढ़ती मांग और कंपोनेंट्स की किल्लत ने खरीदारों के पसीने छुड़ा दिए हैं। डिवाइस पर प्रोसेसिंग क्षमता और स्थानीय AI कार्यों की बढ़ती निर्भरता के कारण एप्पल इस कॉम्पैक्ट कंप्यूटर की सप्लाई में भारी पिछड़ गया है। जहां एक तरफ आधिकारिक स्टोर से खरीदारी पर ग्राहकों को डिलीवरी के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ हालिया महीनों में कीमतों में भी 25 फीसदी तक का बड़ा इजाफा देखने को मिला है। ग्लोबल सप्लाई चेन में आई इस बाधा ने पूरे टेक बाजार को प्रभावित किया है।
डिलीवरी में देरी और RAM घटकों की भारी किल्लत
ऐप्पल के आधिकारिक स्टोर पर बुनियादी वेरिएंट से लेकर हाई-एंड मॉडल तक की डिलीवरी समय सीमा लगातार बढ़ती जा रही है। डिवाइस की डिलीवरी में देरी का सबसे मुख्य कारण इसमें इस्तेमाल होने वाली RAM की कमी है। जैसे-जैसे ग्राहक ज्यादा क्षमता वाली मेमोरी चुनते हैं, इंतजार का वक्त उतना ही लंबा होता जाता है। सबसे सस्ता मैक मिनी, जो 16 GB RAM के साथ आता है, उसे आधिकारिक एप्पल स्टोर से ऑर्डर करने पर पहुंचने में तीन से चार हफ्ते लग रहे हैं। इसकी तुलना में 16 GB RAM वाला मैकबुक एयर दो से तीन हफ्ते में डिलीवर हो रहा है, जो 8 GB RAM वाले मैकबुक नियो के डिलीवरी समय के बराबर है।
अधिक मेमोरी वेरिएंट्स पर स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। यदि कोई ग्राहक 36 GB RAM वाला मैक मिनी मॉडल ऑर्डर करता है, तो उसे लगभग एक महीने की प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ता है। वहीं, 48 GB मेमोरी वाले वेरिएंट को ग्राहक तक पहुंचने में तीन महीने या उससे भी अधिक का समय लग रहा है। मैक स्टूडियो के 48 GB वेरिएंट के लिए यह प्रतीक्षा अवधि 13 से 14 हफ्ते तक खिंच गई है। यह बेहद लंबा इंतजार है, और अमेज़न या बेस्ट बाय जैसे प्रमुख थर्ड-पार्टी रिटेल स्टोर्स पर यह उच्च मेमोरी वाले मॉडल उपलब्ध ही नहीं हैं।
नए M5 चिप का संभावित ऐलान और थर्ड-पार्टी विक्रेताओं का रुख
डिलीवरी में हो रही इस भारी देरी के कारण ग्राहकों के सामने एक विचित्र स्थिति पैदा हो गई है। एप्पल ने मैक मिनी को आखिरी बार अक्टूबर 2024 में अपडेट किया था। बाजार की चर्चाओं और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल की शरद ऋतु में नए M5 चिपसेट वाले मॉडल का ऐलान संभावित है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर कोई ग्राहक अभी M4 मैक मिनी का ऑर्डर देता है, तो संभव है कि नया M5 मॉडल लॉन्च हो जाने के बाद भी उसे पुराना ऑर्डर हासिल न हो पाए। मांग को पूरा करने के मामले में कंपनी काफी पीछे रह गई है।
वर्तमान में अगर किसी ग्राहक को तुरंत मैक मिनी हासिल करना है, तो अमेज़न ही एकमात्र तेजी से डिलीवरी देने वाला जरिया नजर आता है। हालांकि अमेज़न पर कॉन्फ़िगरेशन के सीमित विकल्प ही मौजूद हैं। अमेज़न पर M4 मैक मिनी का 24 GB RAM और 512 GB स्टोरेज वाला वेरिएंट उपलब्ध है, जो कुछ ही दिनों में डिलीवर हो जाता है। लेकिन इसके लिए ग्राहक को $1,570 देने होंगे, जो कि आधिकारिक एप्पल स्टोर की कीमत से $471 अधिक है। इसके अलावा M4 प्रो मैक मिनी भी अमेज़न पर $1,570 में मिल रहा है, जो एप्पल की मूल कीमत से $100 महंगा है और डेढ़ हफ्ते में डिलीवर होता है। यही कुछ चुनिंदा मॉडल हैं जिन्हें तुरंत पाया जा सकता है।
मई से जून के दौरान मैक रेंज की कीमतों में बड़ा इजाफा
सप्लाई की कमी के साथ-साथ एप्पल ने अपनी मैक श्रेणी की कीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी है। मई के शुरुआती हफ्ते में कंपनी ने मैक मिनी के 256 GB स्टोरेज वाले बेस वेरिएंट को चुपचाप बंद कर दिया था, जिसकी शुरुआती कीमत $599 थी। इस फैसले से मैक मिनी की शुरुआती कीमत सीधे बढ़कर $799 हो गई थी। इसके बाद जून के अंत में कंपनी ने 256 GB मॉडल को फिर से बाजार में पेश किया, लेकिन इस बार इसकी कीमत $100 बढ़ाकर $699 तय की गई। इसी तरह 512 GB वेरिएंट की कीमत भी $100 बढ़कर $899 हो गई, जैसा कि मैकबुक सीरीज की कीमतों में किया गया था।
सबसे बड़ा असर मैक स्टूडियो लाइनअप पर पड़ा है, जहां दाम में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। M4 मैक्स मैक स्टूडियो की शुरुआती कीमत में $500 का उछाल आया और यह $2,499 पर पहुंच गई। वहीं, सबसे शक्तिशाली M3 अल्ट्रा मैक स्टूडियो की कीमत $3,999 से सीधे बढ़कर $5,299 हो गई। इस प्रकार ग्राहकों को न केवल कई हफ्तों का इंतजार करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें इन डिवाइसेस के लिए 25 फीसदी तक अधिक कीमत भी चुकानी पड़ रही है।
मेमोरी कंपोनेंट्स का संकट और 2030 तक की लंबी मंदी
कंप्यूटर घटकों की कीमतें बढ़ने के पीछे मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की वैश्विक कमी जिम्मेदार है। तीन महीने पहले एप्पल के निवर्तमान सीईओ टिम कुक ने खुद स्वीकार किया था कि कंपनी मैक मिनी की अचानक बढ़ी मांग का सही अंदाजा नहीं लगा पाई थी। उन्होंने कहा था कि स्थानीय स्तर पर AI कार्य करने वाले यूज़र्स की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे मांग में अप्रत्याशित उछाल आया। कुक ने तब यह चेतावनी दी थी कि इस बैकलॉग को खत्म करने और आपूर्ति सामान्य करने में कई महीनों का समय लग सकता है।
वर्ष 2025 के अंत से ही कंज्यूमर मेमोरी की कीमतें तेजी से बढ़ना शुरू हो गई थीं, और लैपटॉप निर्माताओं ने 2026 की शुरुआत में ही निवेशकों को इस कमी के प्रति आगाह कर दिया था। एप्पल अब कलपुर्जों के लिए नए आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है, जिसमें चीन की वे कंपनियां भी शामिल हैं जो पहले ब्लैकलिस्ट में थीं। हालांकि उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या लंबी चलने वाली है। अधिकांश पूर्वानुमानों के अनुसार मेमोरी की लागत 2030 से पहले कम होने की उम्मीद नहीं है। मेमोरी निर्माता एसके हाइनिक्स ने हाल ही में कहा था कि वर्ष 2027 इस चिप संकट का सबसे खराब साल साबित हो सकता है।



















