ओमान ने खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों और ईरान के बीच होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर होने वाली अहम बैठक को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बुसैदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि यह कदम "सर्वसम्मति के हित में" उठाया गया है, हालांकि उन्होंने अगली तारीख या वैकल्पिक उपायों का कोई ब्योरा नहीं दिया। ओमान के विदेश मंत्रालय ने एक अलग बयान में कहा कि बैठक इसलिए स्थगित की गई है ताकि "रचनात्मक संवाद के लिए उपयुक्त हालात" बन सकें जो क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने वाली टिकाऊ समझदारी की ओर ले जाएं। रॉयटर्स ने रविवार को इस घटनाक्रम की पुष्टि की।
होरमुज जलडमरूमध्य: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा
होरमुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। हर दिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चा तेल और कंडेनसेट इस संकीर्ण जलमार्ग से गुजरते हैं, जो वैश्विक खपत का पांचवां हिस्सा है। किसी भी तरह की रुकावट — चाहे वह नौसैनिक टकराव हो, जहाज जब्ती हो या खनन — तेल बाजार में तत्काल झटका दे सकती है। खाड़ी के तेल निर्यातक देशों और ईरान के बीच इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सहमति बनाना इसलिए बेहद अहम है क्योंकि यहां तनाव बढ़ने पर बीमा प्रीमियम बढ़ जाते हैं, मालभाड़ा महंगा हो जाता है और अंततः उपभोक्ताओं तक पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों के रूप में असर पहुंचता है।
ओमान की मध्यस्थ भूमिका और क्षेत्रीय गतिशीलता
ओमान लंबे समय से खाड़ी अरब देशों और ईरान के बीच भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। भौगोलिक रूप से होरमुज के मुहाने पर स्थित ओमान के दोनों पक्षों से कामकाजी रिश्ते हैं। पिछले वर्षों में भी मस्कट ने कई गोपनीय और सार्वजनिक वार्ताओं की मेजबानी की है, जिनमें परमाणु समझौते के अप्रत्यक्ष संवाद और जहाज जब्ती के मामले सुलझाना शामिल हैं। ताजा बैठक इसी कड़ी का हिस्सा थी, जिसका मकसद जलडमरूमध्य में नौसैनिक गश्त, सूचना साझा करने और तनाव घटाने के प्रोटोकॉल पर लिखित समझौते का मसौदा तैयार करना था। स्थगन से साफ है कि किसी न किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई — संभवतः गश्ती क्षेत्रों की परिभाषा या ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की भूमिका को लेकर।
कच्चे तेल के बेंचमार्क और बाजार पर असर
वैश्विक तेल मूल्य निर्धारण में तीन प्रमुख बेंचमार्क काम करते हैं: डब्ल्यूटीआई (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट), ब्रेंट और दुबई क्रूड। डब्ल्यूटीआई अमेरिका के टेक्सास और आसपास के इलाकों से निकलता है और कशिंग, ओक्लाहोमा के विशाल टैंक फार्म और पाइपलाइन जंक्शन के जरिये वितरित होता है, जिसे "द पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड" कहा जाता है। इसका गुरुत्व कम और सल्फर की मात्रा बहुत कम होने के कारण इसे "लाइट" और "स्वीट" श्रेणी में रखा जाता है, जिससे रिफाइनिंग आसान और सस्ती होती है। ब्रेंट उत्तरी सागर के तेलक्षेत्रों से आता है और यूरोप, अफ्रीका व मध्य पूर्व के कच्चे तेल का मानक है, जबकि दुबई क्रूड एशियाई खरीदारों का मुख्य संदर्भ है। होरमुज से गुजरने वाला अधिकांश तेल ब्रेंट और दुबई बेंचमार्क से जुड़ा होता है, इसलिए वहां की कोई भी बाधा इन दोनों की कीमतों को डब्ल्यूटीआई के मुकाबले ज्यादा प्रभावित करती है।
आपूर्ति-मांग समीकरण और ओपेक+ की भूमिका
किसी भी कमोडिटी की तरह कच्चे तेल की कीमत अंततः आपूर्ति और मांग के संतुलन से तय होती है। वैश्विक आर्थिक वृद्धि मांग बढ़ाती है, जबकि मंदी या लॉकडाउन जैसी स्थितियां मांग घटा देती हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और प्रतिबंध आपूर्ति पक्ष को झटका दे सकते हैं। ओपेक (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन) के 12 सदस्य देश साल में दो बार मिलकर उत्पादन कोटा तय करते हैं। जब ओपेक कोटा घटाता है, तो आपूर्ति सख्त होती है और कीमतें चढ़ती हैं; कोटा बढ़ाने पर विपरीत असर होता है। ओपेक+ में रूस समेत 10 गैर-ओपेक उत्पादक भी शामिल हैं, जिससे समूह का बाजार पर नियंत्रण और बढ़ जाता है। साप्ताहिक भंडार रिपोर्ट — अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान (एपीआई) की मंगलवार और ऊर्जा सूचना प्रशासन (ईआईए) की बुधवार की रिपोर्ट — बाजार को तात्कालिक दिशा देती हैं। भंडार गिरने का मतलब मांग बढ़ना या आपूर्ति घटना होता है, जिससे कीमतों को सहारा मिलता है।
मुद्रा बाजार: डॉलर, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल
तेल डॉलर में कारोबार होता है, इसलिए अमेरिकी मुद्रा की मजबूती या कमजोरी सीधे तेल कीमतों को प्रभावित करती है। शुक्रवार के एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर/अमेरिकी डॉलर जोड़ी 0.7150 के मध्य स्तर के आसपास स्थिर रही, क्योंकि गुरुवार के अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाओं को मजबूती दी थी, जिससे डॉलर चढ़ा था। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के आक्रामक रुख की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया। उधर अमेरिकी डॉलर/जापानी येन 154.00 की ओर नीचे आया, क्योंकि जापान के गर्म उत्पादक मूल्य आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक सख्ती की अटकलों को हवा दी, जिससे येन मजबूत हुआ। फिर भी डॉलर में रातोंरात बढ़त के कारण गिरावट सीमित रही। बाजार अब अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इंतजार कर रहा है, जो अगले कदम तय करेंगे।
सोना: डॉलर की उठापटक में 4,440 डॉलर की ओर
सोना शुक्रवार को सुधरकर 4,440 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर की ओर बढ़ा, जिससे गुरुवार की गिरावट पलट गई। कीमती धातु को डॉलर के उतार-चढ़ाव से फायदा मिला — जब डॉलर कमजोर पड़ता है, सोना चमकता है और इसके विपरीत। सप्ताहांत में डॉलर की दिशा अनिश्चित रहने से सोने को दोनों तरफ के कारोबारियों का समर्थन मिल रहा है।
आगे क्या: कूटनीति और बाजार दोनों नजरें टिकाए हैं
ओमान ने नई तारीख नहीं बताई है, लेकिन राजनयिक सूत्रों के मुताबिक पर्दे के पीछे बातचीत जारी है। खाड़ी देश चाहते हैं कि ईरान जलडमरूमध्य में अपने नौसैनिक अभ्यास सीमित करे और व्यावसायिक जहाजों को बेरोकटोक गुजरने दे, जबकि ईरान अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और सुरक्षा चिंताओं पर जोर देता है। अगर वार्ता लंबी खिंचती है तो बीमा लागत और मालभाड़ा धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं, जिसका असर एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं — चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया — पर पड़ेगा जो खाड़ी तेल पर निर्भर हैं। तेल बाजार फिलहाल ओपेक+ की अगली बैठक और अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों पर नजर रखे हुए है। मुद्रा बाजार में डॉलर-येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल फेड और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत संकेतों से तय होगी। सोना 4,440 डॉलर का स्तर तोड़ पाता है या नहीं, यह डॉलर सूचकांक की दिशा पर निर्भर करेगा।


















