होरमुज जलडमरूमध्य में शनिवार को दो अलग-अलग घटनाओं ने क्षेत्रीय तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों ने बताया कि एक ईरानी वाणिज्यिक पोत पर हुए हमले में चालक दल का एक सदस्य मारा गया। लगभग उसी समय, ब्रिटेन के मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (यूकेएमटीओ) ने सूचना दी कि जलडमरूमध्य में एक अन्य जहाज पर अज्ञात प्रक्षेपास्त्र आकर लगा, हालांकि उस घटना में हताहतों का तत्काल ब्योरा नहीं मिला है।
ईरानी पोत पर हमले का ब्योरा
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, निशाना बना जहाज ईरान का व्यावसायिक पोत था जो जलडमरूमध्य से गुजर रहा था। हमले का सटीक स्वरूप — चाहे वह मिसाइल हो, ड्रोन हो या कोई अन्य हथियार — अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। ईरानी अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन किसी पक्ष पर सीधा आरोप लगाने से अब तक परहेज किया है। जलडमरूमध्य विश्व कच्चे तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है, इसलिए किसी भी व्यवधान का असर तत्काल वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है।
दूसरे जहाज पर प्रक्षेपास्त्र हमला
यूकेएमटीओ की चेतावनी में कहा गया कि शनिवार देर रात एक व्यापारिक पोत पर "अज्ञात प्रक्षेपास्त्र" लगा। केंद्र ने जहाज की राष्ट्रीयता या मालिक का खुलासा नहीं किया, लेकिन जहाजों को इलाके में सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने को कहा है। यह घटना ईरानी पोत पर हमले के कुछ घंटों बाद हुई, जिससे आशंका बढ़ी है कि दोनों वारदातें आपस में जुड़ी हो सकती हैं।
सऊदी ऊर्जा ठिकानों पर हूती हमले
इसी क्रम में, सऊदी अरब ने ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा अपने ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर तेज होते हमलों की शिकायत की है। हूती गुट लाल सागर और अदन की खाड़ी से गुजरने वाले दूसरे अहम जलमार्ग को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि होरमुज और लाल सागर — दोनों चोकपॉइंट्स पर एक साथ दबाव — कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला को अस्थिर कर सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बनेगा।
बाजार मनोविज्ञान: रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर वित्तीय बाजार अक्सर "रिस्क-ऑफ" मोड में चले जाते हैं। सरल शब्दों में, जब निवेशक भविष्य को लेकर आशंकित होते हैं, वे जोखिम भरी संपत्तियां — जैसे शेयर, उभरते बाजारों की मुद्राएं और क्रिप्टोकरेंसी — बेचकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागते हैं। इसके विपरीत, आर्थिक वृद्धि की उम्मीद और स्थिरता का माहौल "रिस्क-ऑन" भावना जगाता है, जिसमें निवेशक अधिक रिटर्न के लिए जोखिम उठाने को तैयार होते हैं।
मुद्राओं और जिंसों पर असर
रिस्क-ऑन दौर में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कनाडाई डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के अलावा रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी जिंस-निर्भर मुद्राएं मजबूत होती हैं, क्योंकि कच्चे माल की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है। रिस्क-ऑफ में इसके उलट, अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) चढ़ते हैं। डॉलर विश्व आरक्षित मुद्रा होने और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड को सबसे सुरक्षित माने जाने के कारण लाभ पाता है। येन को घरेलू निवेशकों का समर्थन मिलता है, जबकि स्विस फ्रैंक को कड़े बैंकिंग कानूनों से पूंजी सुरक्षा का फायदा होता है।
सोने की चाल
सोना पारंपरिक रूप से रिस्क-ऑफ माहौल में चमकता है। शुक्रवार को पीली धातु ने गुरुवार की गिरावट पलटते हुए 4,440 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर पर फिर ध्यान खींचा। डॉलर के उतार-चढ़ाव के बीच सोने की मांग बनी रही, जो बाजार की घबराहट का संकेत है।
ताजा विदेशी मुद्रा गतिविधि
एशियाई सत्र में शुक्रवार को AUD/USD जोड़ी 0.7150 के आसपास स्थिर रही, गुरुवार की तेज गिरावट के बाद सांस लेती दिखी। अगस्त के PPI आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाएं मजबूत कीं, जिससे डॉलर चढ़ा और ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव पड़ा। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के आक्रामक रुख की उम्मीदों ने नुकसान सीमित रखा। उधर, USD/JPY 154.00 की ओर फिसला क्योंकि जापान के गर्म PPI डेटा ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नीति सख्त होने के कयास बढ़ाए, जिससे येन को बल मिला। डॉलर के रातोंरात लाभ बरकरार रहने से गिरावट थमी रही।


















