आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में काम करने के तौर तरीकों को बदलने की होड़ अब सीधे प्रेजेंटेशन सॉफ्टवेयर तक पहुंच चुकी है। ओपनएआई ने अपनी चैटजीपीटी सेवा के भीतर एक नया स्लाइडशो निर्माण टूल पेश किया है, जिसका मकसद उपयोगकर्ताओं को बिना किसी बाहरी सॉफ्टवेयर की मदद लिए सीधे बातचीत के जरिए पावरपॉइंट जैसी स्लाइड तैयार करने की सुविधा देना है। यह नया फीचर फिलहाल प्रो स्तर के उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसके लिए हर महीने कम से कम 100 डॉलर का भुगतान करना होता है। दूसरी तरफ गूगल ने अपने लंबे समय से चले आ रहे गूगल स्लाइड्स के भीतर जेमिनी टूल को जोड़ा है, जो 19.99 डॉलर प्रति माह के गूगल एआई प्रो प्लान के तहत काम करता है। दोनों ही कंपनियां इस बात का दावा कर रही हैं कि उनका सिस्टम उपयोगकर्ताओं के काम को बेहद आसान बना देता है, लेकिन जब दोनों को एक जैसे जटिल विषय पर परखा गया, तो परिणाम काफी दिलचस्प और अलग देखने को मिले।
ओपनएआई का नया वर्कस्पेस और चैटजीपीटी स्लाइड्स की रणनीति
ओपनएआई का दीर्घकालिक लक्ष्य चैटजीपीटी को केवल एक चैटबॉट तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि इसे एक संपूर्ण डिजिटल ऑफिस सुइट में तब्दील करना है। कंपनी चाहती है कि पेशेवर कामकाज के लिए लोगों को गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के दफ्तर सॉफ्टवेयर पर निर्भर न रहना पड़े। इसी रणनीति के तहत पेजेस नाम का वर्ड प्रोसेसर पहले ही प्रो और उससे ऊपर के स्तर वाले उपयोगकर्ताओं के लिए पेश किया जा चुका है, जबकि स्प्रेडशीट से जुड़ा ऐप भी तैयार किया जा रहा है। इसी कड़ी में चैटजीपीटी स्लाइड्स को एक नए कदम के रूप में जोड़ा गया है।
यदि कोई व्यक्ति चैटजीपीटी के मुफ्त प्लान पर है या फिर 20 डॉलर प्रति माह वाले प्लस प्लान का उपयोग कर रहा है, तो वह भी अपने चैट सत्रों से पावरपॉइंट फाइल तैयार करवा सकता है। हालांकि, इन दोनों स्तरों पर मिलने वाली फाइलें काफी साधारण होती हैं। इनमें आधुनिक सहयोग सुविधाएं या सीधे चैटजीपीटी के भीतर स्लाइड को बारीकी से संपादित करने के विकल्प नहीं मिलते हैं। प्लस खातों में प्रॉम्प्ट बॉक्स के भीतर प्लस मेनू के जरिए एक विशेष प्रेजेंटेशन ऐड-ऑन भी मिलता है, लेकिन स्लाइड्स टूल के आने के बाद से इस पुराने फीचर की कार्यप्रणाली में लगातार बदलाव देखे जा रहे हैं।
प्लस और प्रो स्तर पर आईफोन डुओ प्रेजेंटेशन का परीक्षण
किसी भी कृत्रिम मेधा टूल की वास्तविक क्षमता और सटीकता को जांचने के लिए किसी ऐसे विषय को चुनना सबसे सही रहता है, जिसकी पूरी जानकारी पहले से मौजूद हो ताकि गलतियों को तुरंत पकड़ा जा सके। इसके लिए एक परीक्षण के तौर पर चैटजीपीटी को नए आईफोन डुओ से जुड़ी ऑनलाइन जानकारियां जुटाने और समीक्षाओं के आधार पर स्लाइड तैयार करने का निर्देश दिया गया। बातचीत की शुरुआत में डिवाइस के तकनीकी विवरण और शुरुआती प्रतिक्रियाओं के बारे में पूछा गया, जिसके बाद मुख्य विशेषताओं और समीक्षाओं पर आधारित स्लाइडशो तैयार करने को कहा गया।
20 डॉलर वाले प्लस खाते से जो प्रेजेंटेशन तैयार होकर सामने आई, वह बुनियादी तौर पर काफी व्यवस्थित थी। इसमें दी गई जानकारियां पूरी तरह सही थीं और लेआउट बेहद सामान्य था। यह देखने में बिल्कुल ऐसा लग रहा था मानो किसी ने समय की कमी के चलते किसी सामान्य टेम्पलेट में जल्दीबाजी में बुलेट पॉइंट्स भर दिए हों, जहां सभी बिंदुओं को सही क्रम में संरेखित करने या गैर-जरूरी जानकारी को हटाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था। इस स्तर पर एक सकारात्मक बात यह रही कि विशेष रूप से निर्देश देने पर चैटजीपीटी ने प्रेजेंटेशन की शुरुआत में आईफोन डुओ की आधिकारिक तस्वीर भी जोड़ दी। हालांकि, इस स्तर पर स्लाइड के किसी खास हिस्से को चुनकर उसमें बदलाव करने की सुविधा नहीं मिलती है, बल्कि पूरे प्रॉम्प्ट बॉक्स में लिखकर ही पूरे स्लाइडशो में संशोधन कराने पड़ते हैं।
इसके बाद इसी विषय पर 100 डॉलर प्रति माह वाले प्रो खाते के चैटजीपीटी स्लाइड्स टूल का उपयोग किया गया। प्रो स्तर पर इस टूल को ऐप के भीतर एक अलग और समर्पित क्षेत्र मिलता है, जहां से उपयोगकर्ता एक कोरी प्रेजेंटेशन से शुरुआत कर सकते हैं। इसमें बुनियादी टेक्स्ट और इमेज जोड़ने की सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इसका मुख्य आधार प्रॉम्प्ट देकर स्लाइड तैयार करवाना ही है। यह पहली नजर में गूगल स्लाइड्स के एक बेहद शुरुआती रूप जैसा नजर आता है, जिसके साथ एक प्रॉम्प्ट बॉक्स जोड़ दिया गया हो।
चैटजीपीटी स्लाइड्स में काम करने का अनुभव और कमियां
कोरे कैनवास से प्रॉम्प्ट लिखकर स्लाइड तैयार करने की प्रक्रिया व्यवहार में काफी धीमी और थकाऊ महसूस होती है। पावरपॉइंट जैसे पारंपरिक सॉफ्टवेयर में अपनी मर्जी से टेक्स्ट और ग्राफिक्स को सीधे ड्रैग करके रखना जितना आसान होता है, उसकी तुलना में बार-बार निर्देश लिखकर नतीजे का इंतजार करना स्वाभाविक नहीं लगता। इसके अलावा परीक्षण के दौरान इस टूल में कुछ तकनीकी रुकावटें भी सामने आईं, जहां कुछ निर्देश बीच में ही अटक गए और पूरे नहीं हो सके।
इसकी तुलना में चैटजीपीटी के साथ एक सामान्य बातचीत शुरू करके उस पूरी चर्चा को सीधे प्रेजेंटेशन में बदल देना ज्यादा उपयोगी साबित होता है। इस प्रक्रिया से बनी आईफोन डुओ की प्रेजेंटेशन प्लस प्लान की तुलना में काफी लंबी, बेहतर लेआउट वाली और ज्यादा जानकारी देने वाली बनी। इसमें बैटरी लाइफ के तुलनात्मक चार्ट और कई आधिकारिक तस्वीरें भी अपने आप शामिल हो गईं।
हालांकि, चाहे मुफ्त संस्करण हो, प्लस प्लान हो या फिर महंगा प्रो टूल, चैटजीपीटी द्वारा बनाई गई कोई भी प्रेजेंटेशन ऐसी नहीं लगी जिसे किसी इंसान ने सोच-समझकर तैयार किया हो। इन स्लाइड्स में जानकारियों का स्वाभाविक प्रवाह नजर नहीं आता है। ऐसा साफ महसूस होता है कि किसी कंप्यूटर एल्गोरिदम ने केवल यह तय किया है कि कौन सा टेक्स्ट कहां चिपकाना है, बिना इस बात की परवाह किए कि दर्शक इसे कैसे पढ़ेंगे। अच्छी बात यह है कि चैटजीपीटी स्लाइड्स के भीतर उपयोगकर्ता किसी भी तत्व पर क्लिक करके उसका आकार मैन्युअली बदल सकते हैं और उसे इधर-उधर खिसका सकते हैं। इसके अलावा प्रॉम्प्ट के जरिए भी निर्देश दिए जा सकते हैं, जैसे किसी बिल्ली की तस्वीर जोड़ना, टेक्स्ट को बीच में संरेखित करना या किसी डिजाइन को ज्यादा आकर्षक बनाना। इसमें टीम के साथ मिलकर काम करने के सहयोगात्मक फीचर्स भी दिए गए हैं, जो उन संस्थानों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जो पहले से इस व्यवस्था में गहराई से जुड़े हैं।
गूगल स्लाइड्स और जेमिनी का मुकाबला
गूगल भी वर्कस्पेस में कृत्रिम मेधा को तेजी से एकीकृत कर रहा है। यदि कोई उपयोगकर्ता 19.99 डॉलर प्रति माह का गूगल एआई प्रो प्लान लेता है, तो उसे सीधे गूगल स्लाइड्स के भीतर ही जेमिनी की मदद मिलने लगती है। जब जेमिनी को भी आईफोन डुओ पर एक प्रेजेंटेशन तैयार करने का वही समान काम सौंपा गया, तो उसका व्यवहार ओपनएआई के टूल से बिल्कुल अलग था।
जेमिनी ने स्लाइड बनाने से पहले उपयोगकर्ता से कुछ जरूरी सवाल पूछे। उसने यह जानने की कोशिश की कि प्रेजेंटेशन की दृश्य शैली कैसी होनी चाहिए, इसके लक्षित दर्शक कौन हैं और किन खास जानकारियों पर ज्यादा जोर दिया जाना चाहिए। हालांकि इस तरह की जानकारियां चैटजीपीटी को भी मैन्युअल तरीके से प्रॉम्प्ट में दी जा सकती हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर द्वारा खुद आगे बढ़कर इस तरह के सवाल पूछना एक बेहतर अनुभव प्रदान करता है।
जेमिनी और गूगल स्लाइड्स ने मिलकर जो प्रेजेंटेशन तैयार की, उसका लेआउट और पूरा माहौल काफी प्रभावशाली था। चैटजीपीटी की तुलना में यह देखने में ऐसी लग रही थी जैसे इसे किसी पेशेवर इंसान ने अपने हाथों से रंगों और लेआउट का सही चुनाव करके डिजाइन किया हो। स्लाइड देखने में ज्यादा सुरुचिपूर्ण और आंखों को भाने वाली थीं।
तथ्यों की सटीकता और तस्वीरों की हकीकत
डिजाइन के मामले में गूगल का पलड़ा भारी रहने के बावजूद सटीकता के मोर्चे पर उससे गंभीर चूक देखने को मिली। जेमिनी ने आईफोन डुओ की स्क्रीन की अधिकतम चमक के तकनीकी आंकड़ों को गलत पेश किया। इसके अलावा जेमिनी ने जो आईफोन डुओ की तस्वीर तैयार की, वह किसी आधिकारिक उत्पाद की नहीं थी, बल्कि ऐसा लग रहा था कि 2021 के दो पुराने आईफोन मॉडलों को आपस में चिपका दिया गया हो। दूसरी तरफ चैटजीपीटी स्लाइड्स ने इस मामले में बेहतर काम किया और इंटरनेट से खोजकर सीधे ऐप्पल की आधिकारिक वेबसाइट से प्रामाणिक तस्वीरें निकाल लीं।
नियंत्रण के मामले में भी दोनों के बीच कुछ बुनियादी अंतर हैं। गूगल स्लाइड्स में आप प्रेजेंटेशन के किसी एक खास हिस्से या तत्व से सीधे एडिट प्रॉम्प्ट को नहीं जोड़ सकते हैं, बल्कि आपको मुख्य प्रॉम्प्ट बॉक्स में ही अपनी बात लिखनी होती है। हालांकि, गूगल स्लाइड्स एक दशक से अधिक पुराना और स्थापित सॉफ्टवेयर है, इसलिए इसमें स्लाइड लेआउट, फॉर्मेटिंग और एडिटिंग के बुनियादी टूल्स चैटजीपीटी के नए टूल से कहीं ज्यादा परिपक्व और मजबूत हैं।
अंतिम फैसला: कौन सा टूल चुनना चाहिए
यदि पूरी कार्यक्षमता, सॉफ्टवेयर की मजबूती और कीमत के संतुलन को देखा जाए, तो इस समय जेमिनी और गूगल स्लाइड्स का तालमेल ज्यादा बेहतर और व्यावहारिक विकल्प साबित होता है। 19.99 डॉलर प्रति माह की कीमत पर यह चैटजीपीटी के 100 डॉलर वाले प्रो प्लान की तुलना में बहुत सस्ता है और इसके द्वारा तैयार की गई स्लाइड पेशेवर रूप से ज्यादा तैयार नजर आती हैं।
चैटजीपीटी स्लाइड्स उन लोगों के लिए एक अच्छा अतिरिक्त फीचर है जो पहले से ही अपने अन्य कामों के लिए हर महीने 100 डॉलर का प्रो प्लान ले रहे हैं। लेकिन सिर्फ प्रेजेंटेशन बनाने के लिए किसी व्यक्ति को चैटजीपीटी के महंगे प्लान पर जाने की कोई जरूरत नहीं दिखती। पारंपरिक रूप से खुद से पावरपॉइंट या गूगल स्लाइड्स में टेम्पलेट्स का उपयोग करके प्रेजेंटेशन बनाना आज भी सबसे ज्यादा सटीक, नियंत्रण योग्य और भरोसेमंद तरीका बना हुआ है।



















