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सात गुना बढ़त और कागजी पैसे पर घटता भरोसा: सोना आखिर क्यों बना रहता है सबसे सुरक्षित तिजोरीगाइड
5 जुल॰ 2026, 4:03 am (45 दिन पहले)· 3

सात गुना बढ़त और कागजी पैसे पर घटता भरोसा: सोना आखिर क्यों बना रहता है सबसे सुरक्षित तिजोरी

सोना सदियों से अपनी खरीद क्षमता बनाए रखता आया है। समझिए कि टिकाऊपन, दुर्लभता और महंगाई से बचाव जैसी खूबियां इसे बाकी संपत्तियों से अलग क्यों बनाती हैं और केंद्रीय बैंक इस पर इतना भरोसा क्यों करते हैं।

किसी भी संपत्ति को "स्टोर ऑफ वैल्यू" तभी माना जाता है जब वह समय बीतने के बाद भी अपनी खरीद क्षमता बनाए रखे। सीधे शब्दों में कहें तो जो चीज आज जितना खरीद सकती है, वर्षों बाद भी उतना ही खरीदने का दम रखती हो। इस कसौटी पर खरा उतरने के लिए किसी संपत्ति का टिकाऊ, दुर्लभ, आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने योग्य और हर जगह स्वीकार्य होना जरूरी है। सोना इन सभी शर्तों को शायद ही किसी दूसरी भौतिक संपत्ति से बेहतर तरीके से पूरा करता है, और यही वजह है कि इसे सुरक्षित पूंजी का प्रतीक माना जाता है।

यह वह कीमत है जो किसी सरकार ने नहीं दी

सोने की कीमत किसी सरकारी आदेश से नहीं बनी, और न ही कोई नीतिगत फैसला इसे मिटा सकता है। किसी संस्था के समर्थन से इसकी यही आजादी वह खास बात है जो इसे बाकी संपत्तियों से अलग खड़ा करती है। यही कारण है कि जब सरकारों या वित्तीय संस्थाओं पर लोगों का भरोसा डगमगाने लगता है, तब निवेशक सोने की तरफ लौटते हैं। इसका मूल्य किसी बाहरी गारंटी का मोहताज नहीं है।

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महंगाई: बचत पर लगने वाला चुपचाप टैक्स

महंगाई असल में आपकी बचत पर लगने वाला एक धीमा टैक्स है। जब किसी करेंसी की खरीद क्षमता घटती है, तो आपके पास पड़े नकद की असली कीमत भी उसके साथ ही गिर जाती है। ऐसे में वे संपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो जाती हैं जिन्हें छापकर या फैलाकर कमजोर नहीं किया जा सकता। सोना ठीक इसी खांचे में फिट बैठता है, क्योंकि इसकी मात्रा किसी के आदेश से नहीं बढ़ाई जा सकती।

महंगाई और शेयर बाजार, दोनों को पीछे छोड़ने वाला रिकॉर्ड

महंगाई के खिलाफ ढाल के तौर पर सोने का इतिहास लंबा और भरोसेमंद रहा है। साल 2000 के बाद से सोने ने कुल महंगाई को काफी बड़े अंतर से पीछे छोड़ा है। इसी दौरान अमेरिका में कुल महंगाई करीब 81 प्रतिशत रही, जबकि सोना सात गुना से भी ज्यादा बढ़ गया।

अकेले जनवरी 2016 से जनवरी 2026 के दस साल की बात करें तो सोने ने 300 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया, जबकि इसी अवधि में एसएंडपी 500 का रिटर्न 238 प्रतिशत रहा। यानी सोने ने सिर्फ खरीद क्षमता को बचाया ही नहीं, बल्कि उसे बढ़ाया भी।

पैसा छापा जा सकता है, सोना नहीं

कागजी करेंसी हमेशा मौद्रिक नीति के अधीन रहती है। केंद्रीय बैंक मुद्रा की आपूर्ति बढ़ा सकते हैं, और इतिहास गवाह है कि ज्यादातर बैंकों ने ऐसा किया भी है। इसका सीधा मतलब है कि समय के साथ हर एक डॉलर की खरीद क्षमता घटती जाती है। दूसरी तरफ सोने की आपूर्ति भूगर्भीय सीमाओं और खनन की लागत से बंधी हुई है, जिसे किसी नीतिगत फैसले से बढ़ाया नहीं जा सकता। सरकारें पैसा छाप सकती हैं, लेकिन सोना नहीं छाप सकतीं। यही बुनियादी फर्क सोने को असली सुरक्षा बनाता है।

केंद्रीय बैंकों का भरोसा सबसे बड़ा सबूत

सोना सचमुच एक भरोसेमंद स्टोर ऑफ वैल्यू है, इसका सबसे मजबूत संकेत यह है कि खुद केंद्रीय बैंक इसके साथ कैसा बर्ताव करते हैं। ये संस्थाएं किसी देश की संपत्ति को दशकों और पीढ़ियों के पैमाने पर संभालती हैं। इनका व्यवहार किसी तात्कालिक सट्टेबाजी को नहीं, बल्कि लंबी अवधि की सोच को दर्शाता है। जब लंबा नजरिया रखने वाली ये संस्थाएं सोने को संजोकर रखती हैं, तो यह अपने आप में इसकी विश्वसनीयता की गवाही है।

2026 में सोने की बदलती भूमिका

हाल के विश्लेषण बताते हैं कि सोने की भूमिका अब सिर्फ महंगाई से बचाव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका दायरा बढ़ रहा है। अब यह "नीतिगत विश्वसनीयता के जोखिम" के खिलाफ भी एक ढाल के रूप में काम कर रहा है। इसका मतलब है सरकारी कर्ज के बढ़ते स्तर, केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता और फिएट मौद्रिक व्यवस्था की लंबी अवधि की भरोसेमंदी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता। सोना अपनी कीमत सिर्फ तब नहीं बचाता जब चीजें महंगी होती हैं, बल्कि तब भी टिका रहता है जब कागजी पैसे के पीछे खड़ी संस्थाओं पर से भरोसा उठने लगता है।

यही बदलाव सोने को एक लंबी अवधि के निवेश के तौर पर पहले से भी ज्यादा प्रासंगिक बना देता है, कम नहीं। जितना ज्यादा भरोसे का संकट गहराता है, उतना ही सोने का महत्व बढ़ता जाता है।

सवाल-जवाब

स्टोर ऑफ वैल्यू आखिर होता क्या है?
यह ऐसी कोई भी संपत्ति है जो समय बीतने के बाद भी अपनी खरीद क्षमता बनाए रखती है। इसके लिए संपत्ति का टिकाऊ, दुर्लभ, आसानी से ले जाने योग्य और व्यापक रूप से स्वीकार्य होना जरूरी है।
सोना दूसरी संपत्तियों से बेहतर स्टोर ऑफ वैल्यू क्यों माना जाता है?
क्योंकि सोना टिकाऊपन, दुर्लभता, ले जाने की सुविधा और स्वीकार्यता जैसी सभी शर्तों को लगभग किसी भी दूसरी भौतिक संपत्ति से बेहतर पूरा करता है। इसकी कीमत किसी सरकारी आदेश पर निर्भर नहीं है।
साल 2000 के बाद सोने का प्रदर्शन कैसा रहा है?
साल 2000 के बाद से सोना सात गुना से ज्यादा बढ़ा है, जबकि इसी दौरान अमेरिका में कुल महंगाई करीब 81 प्रतिशत रही। यानी इसने महंगाई को बड़े अंतर से पीछे छोड़ा।
पिछले दस साल में सोने और एसएंडपी 500 का रिटर्न कितना रहा?
जनवरी 2016 से जनवरी 2026 के बीच सोने ने 300 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया, जबकि इसी अवधि में एसएंडपी 500 का रिटर्न 238 प्रतिशत रहा।
सोना महंगाई के खिलाफ ढाल कैसे बनता है?
कागजी करेंसी की आपूर्ति केंद्रीय बैंक बढ़ा सकते हैं, जिससे उसकी खरीद क्षमता घटती है। सोने की आपूर्ति भूगर्भीय सीमाओं और खनन लागत से बंधी है, इसलिए इसे नीतिगत फैसले से बढ़ाया नहीं जा सकता।
केंद्रीय बैंकों का सोना रखना क्यों मायने रखता है?
क्योंकि केंद्रीय बैंक देश की संपत्ति को दशकों और पीढ़ियों के पैमाने पर संभालते हैं। इनका सोने पर भरोसा तात्कालिक सट्टेबाजी नहीं, बल्कि लंबी अवधि की सोच को दर्शाता है।
2026 में सोने की भूमिका में क्या बदलाव आ रहा है?
अब सोना सिर्फ महंगाई से बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि नीतिगत विश्वसनीयता के जोखिम के खिलाफ भी ढाल बन रहा है, यानी बढ़ते सरकारी कर्ज और फिएट व्यवस्था पर घटते भरोसे के खिलाफ।
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