माइक्रोसॉफ्ट अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इकोसिस्टम में लंबे समय से चली आ रही उलझन को खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। बाजार में चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लाउड जैसे प्रतिद्वंद्वियों के विपरीत, माइक्रोसॉफ्ट की AI सेवाएं अब तक दो अलग थलग टुकड़ों में बंटी हुई थीं। आम उपभोक्ताओं के लिए केवल कोपायलट नाम का ऐप मौजूद था, जो सीधे तौर पर अन्य व्यक्तिगत AI चैटबॉट्स से मुकाबला करता था। दूसरी ओर, दफ्तरों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट नाम का एक अलग प्लेटफॉर्म चल रहा था, जिसे वर्ड और एक्सेल जैसे वर्कस्पेस टूल्स के साथ जोड़ा गया था। इस विभाजन के कारण नियमित उपयोगकर्ताओं को अक्सर यह समझने में परेशानी होती थी कि कौन सा फीचर और कौन सा सब्सक्रिप्शन प्लान किस ऐप के तहत आता है। इस हफ्ते कंपनी ने घोषणा की है कि वह इन दोनों अलग प्लेटफॉर्म्स का विलय करके एक एकल, एकीकृत कोपायलट ऐप तैयार कर रही है।
दो अलग ऐप्स के विलय से क्या बदलेगा?
इस एकीकरण के बाद, चाहे कोई यूजर दैनिक बातचीत और सवालों के लिए चैटजीपीटी की तरह AI का उपयोग करता हो या फिर वर्ड और एक्सेल में दस्तावेज और स्प्रेडशीट तैयार करने के लिए इसका सहारा लेता हो, हर काम के लिए सिर्फ एक ही कोपायलट ऐप का इस्तेमाल करना होगा। जो लोग रोजाना काम के दौरान कंज्यूमर कोपायलट और माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट के बीच स्विच करते थे, उनके लिए डेस्कटॉप स्क्रीन पर दो अलग विंडोज खुले रखने की झंझट खत्म हो जाएगी। इस नए बदलाव के तहत माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट का इस्तेमाल करने वाले व्यावसायिक यूजर्स को सिर्फ अपने मौजूदा ऐप को अपडेट करना पड़ेगा, जिसके बाद उन्हें कुछ मामूली नेविगेशन बदलाव दिखाई देंगे। इस अपडेट में ऐप का एक नया आइकन शामिल होगा और यूजर्स सीधे ऐप के भीतर से ही कोपायलट चैट तक पहुंच सकेंगे।
व्यक्तिगत खातों के साथ माइक्रोसॉफ्ट AI सेवा का उपयोग करने वाले कंज्यूमर यूजर्स के अनुभव में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिलेंगे। डेस्कटॉप यूजर्स को नए एकीकृत ऐप पर शिफ्ट होना पड़ेगा, जबकि मोबाइल प्लेटफॉर्म पर केवल ऐप अपडेट के माध्यम से यह बदलाव लागू हो जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट ने स्पष्ट किया है कि यूजर्स की पुरानी सभी चैट और सहेजी गई सामग्रियां बिना किसी रुकावट के नए एकीकृत ऐप में ट्रांसफर हो जाएंगी। जो यूजर्स अब तक अपने दोनों खातों या दोनों ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे थे, उनकी चैट हिस्ट्री और डेटा नए ऐप में एक साथ मर्ज हो जाएंगे, हालांकि वे डेटा उन विशिष्ट खातों से जुड़े रहेंगे जिनसे उन्हें मूल रूप से बनाया गया था।
18 अगस्त से बंद हो जाएंगे ये तीन लोकप्रिय फीचर्स
इस बड़े एकीकरण बदलाव के साथ ही माइक्रोसॉफ्ट अपने तीन पुराने फीचर्स को हमेशा के लिए बंद करने जा रहा है। कंपनी के अनुसार, पॉडकास्ट, डीप रिसर्च और ग्रुप चैट मैसेज जैसे फीचर्स नए ऐप का हिस्सा नहीं होंगे। इन तीनों सेवाओं को 18 अगस्त से पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि उपयोगकर्ताओं के पास अपना डेटा सुरक्षित करने के लिए बहुत कम समय बचा है। यदि आप कोपायलट के ग्रुप चैट फीचर का उपयोग करते रहे हैं, तो 18 अगस्त की समयसीमा से पहले अपनी चैट में मौजूद महत्वपूर्ण टेक्स्ट मैसेज और तस्वीरों को कॉपी करके रख लें, क्योंकि इस तारीख के बाद ग्रुप चैट का कोई भी डेटा वापस नहीं मिल सकेगा।
इसी तरह पॉडकास्ट फीचर पर भी यह नियम लागू होता है। 18 अगस्त के बाद यूजर्स न तो नए AI पॉडकास्ट जनरेट कर पाएंगे और न ही पहले से तैयार किए गए पॉडकास्ट सुन या एक्सेस कर सकेंगे। इसलिए समय रहते अपनी सभी ऑडियो फाइलों को एक्सपोर्ट कर लेना ही बुद्धिमानी होगी। वहीं डीप रिसर्च फीचर की बात करें तो 18 अगस्त से पहले तैयार की गई रिसर्च रिपोर्ट आगे भी देखी और एक्सेस की जा सकेंगी। हालांकि, इस तारीख के बाद नए सिरे से डीप रिसर्च फीचर का उपयोग करने के लिए यूजर्स के पास माइक्रोसॉफ्ट 365 प्रीमियम का सब्सक्रिप्शन होना अनिवार्य होगा, यानी मुफ्त यूजर्स के लिए यह सर्विस बंद हो जाएगी।
विकल्पों की उपलब्धता और AI बाजार का बदलता परिदृश्य
जो यूजर्स इन बंद हो रहे फीचर्स के विकल्पों की तलाश में हैं, उनके लिए बाजार में अन्य साधन मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, गूगल का जेमिनी नोटबुक (जिसे पहले नोटबुकएलएम के नाम से जाना जाता था) AI से पॉडकास्ट तैयार करने की बेहतरीन सुविधा देता है। इसके अलावा, लगभग सभी प्रमुख AI प्लेटफॉर्म अपनी स्वतंत्र डीप रिसर्च सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। गौरतलब है कि AI फीचर्स को बंद करने वाली माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है। इस साल की शुरुआत में ओपनएआई ने भी अपने AI वीडियो जनरेटर सोरा को बंद कर दिया था और अपने अल्पकालिक AI ब्राउजर चैटजीपीटी एटलस की सेवाएं भी समाप्त कर दी थीं। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम उसकी AI सेवाओं को ज्यादा सुव्यवस्थित और व्यावहारिक बनाने की रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम से भी गैर-जरूरी कोपायलट फीचर्स को लगातार हटा रही है।


















