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गुजरात हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी बरकरार रखी, 2008 के अहमदाबाद ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसलागुजरात
2 घंटे पहले· 2

गुजरात हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी बरकरार रखी, 2008 के अहमदाबाद ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसला

गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में सेशन कोर्ट की सजा बरकरार रखी, जिसमें 38 दोषियों को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा दी गई है। कोर्ट ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख और घायलों को 1 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश भी दोहराया।

राजेश कुमारराजेश कुमारवरिष्ठ संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। कोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का आदेश भी दोहराया है, जिसके तहत धमाकों में जान गंवाने वाले 56 लोगों के परिजनों को 10 लाख रुपए और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपए मिलेंगे।

49 मिनट में 21 धमाके, पूरा शहर दहल गया था

26 जुलाई 2008 की शाम अहमदाबाद के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। महज 49 मिनट के भीतर शहर में एक के बाद एक 21 बम धमाके हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई थी। हमलावरों ने जानबूझकर सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया था, जिनमें नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर शामिल थे। बम अस्पतालों, सार्वजनिक जगहों, बाजारों और सिटी बसों में रखे गए थे। धमाकों में साइकिलों पर टंगे टिफिन बॉक्स के भीतर बम छिपाए गए थे, ठीक उसी तरीके से जैसे इससे पहले 13 मई 2008 को जयपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट में इस्तेमाल किया गया था। शहर की लोकल बस सेवा एएमटीएस यानी अहमदाबाद म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट सर्विस की कई बसें भी इन धमाकों की चपेट में आईं और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।

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घायलों को भर्ती कराते वक्त अस्पताल में भी हुआ धमाका

इस साजिश की सबसे खौफनाक बात यह रही कि हमलावरों ने शहर के दो अलग-अलग अस्पतालों को भी निशाना बनाया था। शुरुआती सिलसिलेवार धमाकों के करीब 40 मिनट बाद इन अस्पतालों के परिसर में धमाके किए गए। इनमें से एक धमाका ठीक उस वक्त हुआ, जब पहले हुए धमाकों में घायल हुए लोगों को इलाज के लिए वहां भर्ती कराया जा रहा था। यानी हमलावरों ने घायलों और उनकी मदद के लिए पहुंचे लोगों को भी निशाना बनाने की सोची-समझी रणनीति अपनाई थी।

2022 में सेशन कोर्ट ने सुनाई थी ऐतिहासिक सजा

घटना के करीब 14 साल बाद 2022 में सेशन कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए 38 आरोपियों को फांसी और 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी थी। अदालत ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर यानी दुर्लभतम मामला बताते हुए कहा था कि इन दोषियों को मौत की सजा देना ही उचित होगा। यह देश में पहला मौका था, जब किसी एक मामले में एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो। सेशन कोर्ट ने उसी फैसले में मृतकों और घायलों के परिवारों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया था।

दोषियों के साथ-साथ राज्य सरकार भी पहुंची थी हाई कोर्ट

कानून के मुताबिक, फांसी की सजा तभी अमल में लाई जा सकती है जब हाई कोर्ट उस पर अपनी मुहर लगाए। यही वजह थी कि सेशन कोर्ट से सजा पाने के बाद सभी दोषियों ने इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। दिलचस्प यह भी रहा कि गुजरात सरकार ने भी अपनी तरफ से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर फांसी की सजा को कन्फर्म करने की मांग की थी। दोषियों के वकीलों ने अपील में पुलिस की जांच के तरीके, पेश किए गए सबूतों और आरोपियों के कबूलनामों पर सवाल खड़े किए थे और सजा को चुनौती दी थी। मंगलवार को आए फैसले में हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।

इसका आप पर असर

  • भारत में: यह फैसला दिखाता है कि बड़े आतंकी हमलों के दोषियों को अंतिम सजा तक पहुंचाने में भले सालों लग जाएं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के जरिए अदालतें आखिरकार फैसला सुनाती हैं।
  • अहमदाबाद और गुजरात में: 2008 धमाकों में जान गंवाने वाले 56 परिवारों को अब 10-10 लाख रुपए और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपए का मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

सवाल-जवाब

गुजरात हाई कोर्ट ने किस मामले में फैसला सुनाया?
गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में सेशन कोर्ट की सजा को बरकरार रखा।
कितने दोषियों को फांसी और कितने को उम्रकैद की सजा मिली?
38 दोषियों की फांसी की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है।
पीड़ितों को कितना मुआवजा मिलेगा?
मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपए और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा।
2008 में अहमदाबाद में धमाके कब और कैसे हुए थे?
26 जुलाई 2008 को महज 49 मिनट के भीतर शहर में एक के बाद एक 21 बम धमाके हुए थे, जिनमें 56 लोगों की मौत हुई थी।
धमाकों में किन इलाकों को निशाना बनाया गया था?
हमलावरों ने नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों के साथ-साथ अस्पतालों, बाजारों और सिटी बसों को निशाना बनाया था।
सेशन कोर्ट ने पहली सजा कब सुनाई थी?
घटना के करीब 14 साल बाद 2022 में सेशन कोर्ट ने 38 दोषियों को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
मामला हाई कोर्ट क्यों पहुंचा?
कानूनन फांसी की सजा को अमल में लाने से पहले हाई कोर्ट की मंजूरी जरूरी होती है, इसलिए दोषियों की अपील के साथ-साथ राज्य सरकार की पुष्टि याचिका पर भी हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।
राजेश कुमार
लेखक के बारे मेंराजेश कुमारवरिष्ठ संवाददाता उतार प्रदेश
विशेषज्ञताभारत समाचार, राजनीति, सरकारी नीति, अर्थव्यवस्था, ब्रेकिंग न्यूज़, संसद, चुनाव, सामाजिक मुद्दे, बुनियादी ढाँचा, राष्ट्रीय मामले

राजेश कुमार एक वरिष्ठ संवाददाता हैं जो पूरे भारत की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़ी घटनाओं को कवर करते हैं। वे राष्ट्रीय मामलों पर समय पर और भरोसेमंद रिपोर्टिंग देते हैं।

राजेश कुमार एक वरिष्ठ संवाददाता हैं जो भारत की राष्ट्रीय ख़बरों — राजनीति, शासन, अर्थव्यवस्था, सामाजिक मुद्दों और देशभर की बड़ी घटनाओं — में विशेषज्ञता रखते हैं। वे भारत के राजनीतिक परिदृश्य, नीतिगत फ़ैसलों, आर्थिक विकास, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक बदलावों को आकार देने वाली प्रमुख घटनाओं पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, गहराई और संतुलित रिपोर्टिंग पर ज़ोर देते हुए राजेश अहम राष्ट्रीय मुद्दों और नागरिकों पर उनके असर का गहन विश्लेषण देते हैं। उनकी कवरेज में सरकारी योजनाएँ, संसदीय मामले, चुनाव, क्षेत्रीय घटनाक्रम और भारत के महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक रुझान शामिल हैं।

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