हरियाणा के कई इलाकों में मानसून के सक्रिय होने से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। 10 जुलाई को राज्य के विभिन्न हिस्सों में झमाझम बारिश और गरज-चमक के साथ फुहारें देखी गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के 13 जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। विभाग ने करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे प्रमुख शहरों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है, जो भारी बारिश की चेतावनी देता है। पिछले 24 घंटों का रिकॉर्ड देखें तो गुरुग्राम में सबसे अधिक 83.0 MM बारिश हुई है, जबकि करनाल में 79.5 MM पानी बरसा है। सिरसा से गुजरने वाली घग्गर नदी के जलस्तर में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो चिंता का विषय है। इसके अलावा, झज्जर, रेवाड़ी, नारनौल, पलवल, नूंह, यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला को येलो अलर्ट के दायरे में रखा गया है। दूसरी ओर, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, जींद, कैथल और कुरुक्षेत्र को ग्रीन जोन में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि वहां मौसम के सामान्य रहने की उम्मीद है और किसी बड़ी आपदा की आशंका नहीं है।
चंडीगढ़ का हाल और तापमान में गिरावट
चंडीगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह से आमद हो चुकी है। आगामी सोमवार तक रुक-रुककर वर्षा होने का अनुमान जताया गया है, जिसमें कुछ स्थान विशेष रूप से भारी बारिश की चपेट में आ सकते हैं। मंगलवार से हालांकि बारिश की तीव्रता में कमी आने की संभावना है, लेकिन मानसून की सक्रियता बरकरार रहेगी। लगातार दो दिनों की बारिश ने पारे को काफी नीचे गिरा दिया है। चंडीगढ़ का अधिकतम तापमान घटकर 28.9°C रह गया है, जो कि पिछले दिन की तुलना में 3.1 डिग्री सेल्सियस कम और सामान्य से 5.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया है।
IMD के निर्देश और सुरक्षा सुझाव
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने गुरुवार के लिए जारी ऑरेंज अलर्ट को शुक्रवार (10 जुलाई) से सोमवार तक येलो अलर्ट में परिवर्तित कर दिया है। इस अवधि में आंधी-तूफान के साथ बिजली कड़कने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। प्रशासन ने आम जनता के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भारी बारिश की स्थिति में भूस्खलन, मडस्लाइड और नदियों या खड्डों के जलस्तर में अचानक उछाल की संभावना रहती है। इसके अतिरिक्त सड़कों पर यातायात प्रभावित होने, दृश्यता कम होने और फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। स्थानीय प्रशासन की सलाह है कि इस दौरान नदी-नालों के पास जाने से बचें और बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करें।
हिमाचल प्रदेश: 15 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश में भी मानसून अपनी पूरी गति पकड़ चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 15 जुलाई तक राज्य के कई हिस्सों में भारी वर्षा का दौर जारी रहेगा। राजधानी शिमला समेत कई स्थानों पर बारिश का सिलसिला बना हुआ है। किन्नौर जिले के लिप्पा क्षेत्र से पेजर नाले में अचानक बाढ़ आने की तस्वीरें सामने आई हैं। शिमला में हल्की बारिश के बीच मौसम खुशनुमा भी रहा, लेकिन खतरे के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। मौसम केंद्र ने 10 से 15 जुलाई के बीच भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाओं को लेकर चेतावनी दी है। निचले इलाकों में जलभराव, सड़क पर फिसलन और ट्रैफिक जाम की समस्याएं सामने आ सकती हैं।
सिरमौर में जनजीवन पर असर
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों में सिरमौर, मंडी, शिमला, सोलन, कांगड़ा, कुल्लू, चंबा और किन्नौर के विभिन्न क्षेत्रों में भारी बारिश के आसार हैं। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में 15 जुलाई तक 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं चलने की संभावना है। लगातार हो रही बारिश का असर सिरमौर जिले में साफ दिख रहा है, जहां डीसी प्रियंका वर्मा के मुताबिक 34 सड़कें बंद हैं और सबसे ज्यादा असर शिलाई डिवीजन में पड़ा है। वहां 21 सड़कें अवरुद्ध हैं। जिले में 63 ट्रांसफार्मर ठप होने से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है और नाहन में 4 पेयजल योजनाएं भी बाधित हुई हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) को अब तक करीब 87 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। नूरपुर प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट है, जहां एसडीएम अरुण शर्मा ने भूस्खलन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारियां सुनिश्चित कर ली हैं।











