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2002 की वोटर लिस्ट से गायब पूरा परिवार, फरीदाबाद में बीएलओ रोज सुलझा रहे यह अजीब पहेलीहरियाणा
7 जुल॰ 2026, 2:46 pm (45 दिन पहले)· 2

2002 की वोटर लिस्ट से गायब पूरा परिवार, फरीदाबाद में बीएलओ रोज सुलझा रहे यह अजीब पहेली

फरीदाबाद में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में 2002 की पुरानी सूची से नाम गायब होने के मामले बढ़ रहे हैं, बीएलओ रोज सैकड़ों लोगों के फॉर्म भरकर 14 जुलाई 2026 की डेडलाइन से पहले रिकॉर्ड ठीक कराने में जुटे हैं।

हरियाणा के फरीदाबाद में वोटर लिस्ट से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR का काम इन दिनों पूरे जोर पर चल रहा है। बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ की टीम सुबह से लेकर देर रात तक न सिर्फ फॉर्म भरने में जुटी है बल्कि लोगों की तरह-तरह की उलझनें भी सुलझा रही है। इस पूरी कवायद में सबसे बड़ी दिक्कत उन परिवारों के सामने आ रही है जिनका नाम साल 2002 की पुरानी वोटर सूची में कहीं दर्ज ही नहीं मिल रहा।

2002 की पुरानी सूची बनी सबसे बड़ा सिरदर्द

कई लोगों का कहना है कि वे बरसों से लगातार वोट डालते आए हैं, लेकिन जब रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है तो न तो उनका अपना नाम मिल रहा है और न ही उनके माता-पिता का। ऐसे मामलों में बीएलओ दोबारा फॉर्म भरवाकर पूरा रिकॉर्ड नए सिरे से अपडेट कर रहे हैं। इसी वजह से बीएलओ की टीम लगातार अपील कर रही है कि 14 जुलाई 2026 आखिरी तारीख है, इसलिए इससे पहले फॉर्म जरूर जमा करा दिया जाए ताकि आगे चलकर किसी को परेशानी न झेलनी पड़े।

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एक दिन में 400 लोग, सुबह आठ से रात आठ बजे तक ड्यूटी

झाड़सेंतली कम्युनिटी सेंटर में तैनात बीएलओ सुमित्रा बताती हैं कि वह सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक लगातार इसी काम में लगी रहती हैं। एक दिन में करीब 400 लोग उनके पास पहुंच रहे हैं, कोई ऑनलाइन काम लेकर आता है तो कोई ऑफलाइन फॉर्म भरवाने। सुमित्रा के मुताबिक सबसे ज्यादा दिक्कत 2002 की सूची को लेकर ही आ रही है, क्योंकि कई लोगों का नाम सीधे उस लिस्ट में मिलता ही नहीं। ऐसे मामलों में वह सर्च डिटेल और नो लिंक जैसे विकल्पों के जरिए पुराना रिकॉर्ड खोजकर फॉर्म अपडेट करती हैं, जिसके बाद संबंधित व्यक्ति का पूरा डाटा ऑनलाइन दिखने लगता है। उनका कहना है कि बच्चों से जुड़े मामलों में ज्यादा दिक्कत नहीं आती, लेकिन पुराने वोटरों और बुजुर्गों के रिकॉर्ड में परेशानी काफी ज्यादा है।

चाचा का नाम मिला, माता-पिता का सुराग नहीं

सुमित्रा के मुताबिक कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें एक ही परिवार में से किसी का रिकॉर्ड मिल गया तो किसी का पूरी तरह गायब है। एक परिवार में चाचा का नाम तो वोटर सूची में मिल गया, लेकिन उसी परिवार में माता-पिता का नाम कहीं नहीं मिला। ऐसे उलझे हुए मामलों को सुलझाने में काफी वक्त लग रहा है। सुमित्रा अपनी तरफ से फॉर्म ऑनलाइन भर तो देती हैं, लेकिन आगे सेक्टर-12 स्थित कार्यालय में इस पर क्या अंतिम फैसला होगा, यह बाद में ही साफ हो पाएगा। यही वजह है कि वह लगातार लोगों से कह रही हैं कि आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते फॉर्म जमा करा दें।

बार-बार बुलाने पर भी नहीं पहुंच रहे कई लोग

सुमित्रा के मुताबिक अब भी कई लोग ऐसे हैं जो बार-बार बुलाने के बावजूद फॉर्म भरवाने नहीं आ रहे। खासकर झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को कई-कई बार सूचना देनी पड़ रही है। कई लोग यह भी पूछते हैं कि आखिर SIR कराने से उन्हें फायदा क्या मिलेगा। सुमित्रा का कहना है कि लोगों को वोट की अहमियत समझनी चाहिए, क्योंकि अगर समय रहते फॉर्म जमा नहीं हुआ तो आगे चलकर उन्हें सेक्टर-12 कार्यालय के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। फिलहाल बीएलओ खुद गांव में बैठकर लोगों की मदद कर रहे हैं, इसलिए इस मौके का फायदा उठा लेना ही समझदारी है।

अकेले बुजुर्ग की गुहार, बेटा मेरा वोट बनवा दो

बीएलओ निर्मल बताती हैं कि उनके पास करीब 70 साल के एक बुजुर्ग पहुंचे, जो बिल्कुल अकेले हैं। न उनका कोई बेटा है, न पत्नी और न ही परिवार का कोई और सदस्य। उन्होंने बताया कि उनका नाम कहीं नहीं मिल रहा और वह इस बात से काफी परेशान थे। बुजुर्ग ने निर्मल से कहा, बेटा मेरा वोट बनवा दो, मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है। निर्मल ने बताया कि उन्होंने उस बुजुर्ग का फॉर्म ऑनलाइन भर दिया है और अब रिकॉर्ड मिलने और आगे मंजूरी मिलने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। निर्मल के मुताबिक ऐसे मामले उनके पास लगभग रोज सामने आ रहे हैं।

माता-पिता नहीं रहे, तो रिकॉर्ड खोजना और मुश्किल

निर्मल का कहना है कि जिन लोगों के माता-पिता का निधन हो चुका है, उन्हें भी काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। कई बार परिवार के दूसरे सदस्य पूरी जानकारी नहीं दे पाते, जिससे पुराने रिकॉर्ड तक पहुंचना और मुश्किल हो जाता है। इसी गांव की रहने वाली बुजुर्ग महिला हुक्कमा भी इसी परेशानी को लेकर निर्मल के पास पहुंचीं। हुक्कमा के मुताबिक उनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है और वह हमेशा इसी बूथ पर वोट डालती रही हैं। उनके पति का नाम सूरजमल है, लेकिन 2002 की वोटर सूची में उनका अपना नाम नहीं मिल रहा। हुक्कमा के पास पुराना वोटर कार्ड भी मौजूद है, फिर भी रिकॉर्ड में उनका नाम नहीं दिख रहा। निर्मल का कहना है कि ऐसे मामलों में वह हर संभव कोशिश कर रही हैं, फिलहाल हुक्कमा का भी फॉर्म ऑनलाइन भर दिया गया है और अब आगे की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। साथ ही बीएलओ की टीम बार-बार यही अपील कर रही है कि हर कोई 14 जुलाई 2026 से पहले अपना फॉर्म जरूर जमा करा दे।

सवाल-जवाब

फरीदाबाद में वोटर लिस्ट संशोधन के लिए आखिरी तारीख क्या है?
फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 14 जुलाई 2026 है।
सबसे ज्यादा दिक्कत किस वोटर लिस्ट को लेकर आ रही है?
सबसे ज्यादा परेशानी साल 2002 की पुरानी वोटर सूची में नाम न मिलने को लेकर आ रही है।
एक दिन में बीएलओ के पास कितने लोग पहुंच रहे हैं?
झाड़सेंतली कम्युनिटी सेंटर की बीएलओ सुमित्रा के मुताबिक एक दिन में करीब 400 लोग उनके पास पहुंच रहे हैं।
किन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है?
पुराने वोटरों, बुजुर्गों और उन परिवारों को ज्यादा दिक्कत हो रही है जिनके कुछ सदस्यों का रिकॉर्ड मिल रहा है और कुछ का नहीं, जैसे एक मामले में चाचा का नाम मिला लेकिन माता-पिता का नहीं।
जिनके माता-पिता का निधन हो चुका है, उनके लिए क्या दिक्कत है?
ऐसे मामलों में परिवार के दूसरे सदस्य अक्सर पूरी जानकारी नहीं दे पाते, जिससे पुराना रिकॉर्ड ढूंढना मुश्किल हो जाता है।
अगर लोग फॉर्म भरवाने नहीं आ रहे तो बीएलओ क्या कर रही हैं?
बीएलओ बार-बार सूचना देकर, खासकर झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को बुलाकर, उन्हें फॉर्म भरवाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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