सड़कों के किनारे, बंजर जमीनों और शिव मंदिरों के आसपास आसानी से नजर आने वाला मदार का पौधा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा विधाओं में सदियों से इसके विभिन्न अंगों का प्रयोग अलग-अलग बीमारियों के उपचार में किए जाने का ब्योरा मिलता है। हालांकि इस वनस्पति के साथ सबसे बड़ी सावधानी यह जुड़ी है कि इसमें अत्यधिक विषैले रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं। जरा सी चूक या अज्ञानता में किया गया घरेलू प्रयोग शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए विशेषज्ञों की सख्त हिदायत है कि किसी भी स्थिति में इसका खुद से उपचार न करें।
पारंपरिक पद्धतियों में मदार का उल्लेख
आयुर्वेदिक चिकित्सा के जानकारों के अनुसार मदार का उपयोग प्राचीन काल से शारीरिक दर्द, सूजन और त्वचा से जुड़ी कई जटिल परेशानियों को शांत करने के लिए किया जाता रहा है। पुराने नुस्खों में सांस की तकलीफ और दमे के लक्षणों से राहत दिलाने के लिए भी मदार की सूखी डंठल के प्रयोग की चर्चा मिलती है। वैद्य अभिषेक कुमार मिश्र बताते हैं कि पारंपरिक संहिताओं में इन वनस्पतियों के औषधीय गुणों का विस्तृत वर्णन जरूर है, मगर उनका प्रयोग बेहद नियंत्रित और सुरक्षित प्रक्रियाओं के तहत ही अनुशंसित किया गया है।
दमा और सांस के मरीज न करें यह भूल
अक्सर लोक मान्यताओं के आधार पर लोग मदार की डंठल को सुखाकर और जलाकर उसका धुआं सांस के जरिए खींचने का प्रयास करते हैं, ताकि अस्थमा में आराम मिल सके। वैद्य अभिषेक कुमार मिश्र इस तरह के घरेलू प्रयोगों को पूरी तरह असुरक्षित और नुकसानदेह बताते हैं। डंठल को सीधे जलाने से निकलने वाला धुआं श्वसन नलियों में तेज जलन पैदा कर सकता है। इससे सांस लेने में गंभीर रुकावट आ सकती है और फेफड़ों की समस्या पहले से अधिक विकराल रूप ले सकती है। सांस संबंधी विकारों से पीड़ित व्यक्तियों को ऐसे खतरनाक टोटकों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
पायरिया और दांतों के रोगों में जोखिम
दांतों और मसूड़ों से जुड़ी पायरिया की बीमारी के लिए भी कुछ प्राचीन पद्धतियों में मदार की डंठल के उपयोग का संदर्भ मिलता है। इन नुस्खों में डंठल को सीधे प्रयोग करने के बजाय चूने के पानी में शोधित करने का विधान बताया जाता है। इसके बावजूद वैद्य अभिषेक कुमार मिश्र आगाह करते हैं कि चूने के पानी की प्रक्रिया से भी इसके हानिकारक जहरीले तत्व पूरी तरह निष्प्रभावी नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में इसे मसूड़ों या दांतों पर रगड़ना ऊतकों को जला सकता है और मुंह के भीतर गंभीर संक्रमण या घाव का कारण बन सकता है।
घरेलू स्तर पर इस्तेमाल से क्यों बचें
मदार का पूरा पौधा विषैले दूधिया रस से भरा होता है, जिसे छूना या आंखों के संपर्क में लाना बेहद खतरनाक है। इसका दूध त्वचा पर छाले और आंखों में गंभीर सूजन अथवा अंधापन तक पैदा कर सकता है। पौधे के किसी भी हिस्से को चबाना, निगलना या उसका काढ़ा बनाकर पीना आंतरिक अंगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। किसी भी शारीरिक समस्या में बिना योग्य पंजीकृत चिकित्सक की देखरेख के मदार का इस्तेमाल हरगिज नहीं किया जाना चाहिए।





















