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टॉक्सिक रिव्यू (2026): 4 साल बाद यश की धमाकेदार वापसी, जानिए कैसी है डार्क एक्शन ड्रामामूवी रिव्यू
26 अग॰ 2026, 2:49 pm (3 घंटे पहले)· 1

टॉक्सिक रिव्यू (2026): 4 साल बाद यश की धमाकेदार वापसी, जानिए कैसी है डार्क एक्शन ड्रामा

गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी फिल्म 'टॉक्सिक' में यश का जबरदस्त डबल अवतार, शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक और डार्क क्राइम वर्ल्ड का अनुभव मिलता है। 3.5 स्टार रेटिंग के साथ जानिए फिल्म की खूबियां और कमियां।

इस टॉक्सिक रिव्यू में जानिए कि चार साल के लंबे इंतजार के बाद बड़े पर्दे पर लौटे सुपरस्टार यश और निर्देशक गीतू मोहनदास का यह डार्क क्राइम ड्रामा दर्शकों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है। यदि आप सिनेमाघरों में धमाकेदार एक्शन, गहरी साजिशों और इमोशनल मोड़ों से भरी गैंगस्टर कहानियां देखना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक खास अनुभव साबित हो सकती है। अंडरवर्ल्ड की काली दुनिया, बारूद का धुआं और गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच रिश्तों का उलझाव इस कहानी को सामान्य मसाला एक्शन फिल्मों से अलग बनाता है। यश के पावरफुल डबल अवतार के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी और हुमा कुरैशी की मौजूदगी इस डार्क क्राइम थ्रिलर को और भी इंटेंस बनाती है।

अंडरवर्ल्ड का साम्राज्य और कहानी का ताना-बाना

फिल्म का मुख्य प्लॉट 'राया' नाम के एक बेखौफ गैंगस्टर के इर्द-गिर्द घूमता है। राया ने अपनी निडरता, रणनीतिक दिमाग और वफादारी के दम पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और अंडरवर्ल्ड में अपना एकछत्र राज कायम किया है। कहानी में नया और अप्रत्याशित मोड़ तब आता है जब उसका बेटा 'टिकट' भी इसी खतरनाक और आपराधिक रास्ते पर कदम बढ़ा देता है। टिकट का इस क्राइम वर्ल्ड में प्रवेश राया के चरित्र के एक बिल्कुल नए पहलू को दर्शकों के सामने लाता है। टिकट की मौजूदगी के कारण फिल्म सिर्फ मारधाड़ वाली कहानी बनकर नहीं रह जाती, बल्कि इसमें पारिवारिक रिश्तों की कशमकश, बदले की आग और एक भावुक लव एंगल का समावेश देखने को मिलता है। इस पूरी यात्रा में गंगा और नादिया के किरदार कहानी को भावनात्मक गहराई प्रदान करते हैं, जिससे मुकाबला और भी गंभीर हो जाता है।

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अदाकारों का प्रदर्शन और किरदारों का प्रभाव

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यश का स्क्रीन प्रेजेंस और उनका डबल रोल है। निर्माताओं ने दोनों किरदारों की शारीरिक भाषा, बात करने के अंदाज और हाव-भाव में इतना स्पष्ट अंतर रखा है कि दर्शक तुरंत समझ जाते हैं। यश का ऑन-स्क्रीन एटीट्यूड पूरी फिल्म को संभाले रखता है। नयनतारा ने 'गंगा' के रूप में अपनी भूमिका में जबरदस्त भावनात्मक गहराई भरी है, जो कहानी के तनाव को संतुलित करती है। 'नादिया' के किरदार में कियारा आडवाणी ने अपनी सादगी और शालीनता से छाप छोड़ी है। वहीं जब हुमा कुरैशी 'एलिजाबेथ' बनकर पर्दे पर उतरती हैं, तो उनका नकारात्मक अंदाज और दबंग बॉडी लैंग्वेज पूरे सीन पर भारी पड़ती है। इन सब के बीच रुक्मिणी वसंत का 'मेलिसा' वाला किरदार बेहद दिल को छू लेने वाला है और वह फिल्म की एक अप्रत्याशित हीरो के रूप में उभरती हैं। इसके अलावा तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, डेरेल डी’सिल्वा और सुदेव नायर ने भी अपनी भूमिकाओं से कहानी की पकड़ को मजबूत बनाए रखा है।

निर्देशन, कहानी का प्रवाह और पेसिंग

निर्देशक गीतू मोहनदास ने एक सीधी सपाट कहानी सुनाने के बजाय बहुस्तरीय संरचना का रास्ता चुना है। फिल्म में हर छोटे-बड़े किरदार की अपनी एक पृष्ठभूमि और उद्देश्य है, जिसे मुख्य कथानक के साथ धीरे-धीरे जोड़ा गया है। रहस्य को अचानक उजागर करने के बजाय निर्देशक ने सही समय पर परतें खोलने की शैली अपनाई है। फिल्म की शुरुआत सीधे एक्शन से करने के बजाय पहले हाफ में राया के साम्राज्य, उसके संबंधों और सहयोगी किरदारों की नींव रखी जाती है। पहला हाफ थोड़ा समय लेता है, लेकिन इंटरवल के ठीक पहले एक बेहद धमाकेदार और हाई-ऑक्टेन सीक्वेंस के साथ फिल्म की टोन पूरी तरह बदल जाती है। दूसरे हाफ में कदम रखते ही एक्शन कोरियोग्राफी का स्तर बढ़ जाता है, जहां स्क्रीन पर कच्ची हिंसा और आक्रामक दृश्य तेजी से सामने आते हैं।

तकनीकी पहलू, बैकग्राउंड स्कोर और साउंड डिजाइन

तकनीकी मोर्चे पर यह फिल्म बेहद मजबूत नजर आती है। इसका बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की असली रीढ़ की हड्डी है। हर सस्पेंस और एक्शन सीन के दौरान गूंजने वाला संगीत रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव देता है। बैकग्राउंड म्यूजिक दृश्यों के प्रवाह में बाधा नहीं बनता बल्कि भावनात्मक पलों को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। यदि आप इसे डॉल्बी एटमॉस साउंड सिस्टम वाले थिएटर में देखते हैं, तो अंडरवर्ल्ड का माहौल बिल्कुल वास्तविक महसूस होता है। हालांकि, हिंदी भाषी क्षेत्रों के दर्शकों के लिए फिल्म के हिंदी गाने शायद उतने प्रभावी न लगें और थोड़े निराशाजनक साबित हो सकते हैं।

कमियां और कमजोर कड़ियां

तमाम खूबियों के बावजूद फिल्म में कुछ कमजोरियां भी साफ झलकती हैं। सबसे पहली बात, फिल्म की 194 मिनट की कुल अवधि काफी लंबी है, जो कई जगहों पर थोड़ी खिंची हुई और भारी महसूस होती है। पहले हाफ में किरदारों का बैकग्राउंड तैयार करने में लिया गया ज्यादा वक्त उन दर्शकों को धीमा लग सकता है जो शुरुआत से ही तेज तर्रार एक्शन की उम्मीद करते हैं। इसके अलावा, फिल्म में अत्यधिक खून-खराबा और रॉ वायलेंस दिखाया गया है, जिसकी वजह से यह बच्चों या संवेदी दर्शकों के लिए मुफीद नहीं है। स्क्रिप्ट की बुनावट भी बीच-बीच में थोड़ी उलझी हुई लगती है, हालांकि क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते कहानी अपनी पकड़ वापस बना लेती है।

अंतिम फैसला और स्टार रेटिंग

संक्षेप में कहें तो 'टॉक्सिक' केवल अंधाधुंध गोलियों की बौछार नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, बदले और डार्क एक्शन का एक संतुलित कॉकटेल है। अगर आपको बेहतरीन विजुअल्स, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और इंटेंस अंडरवर्ल्ड ड्रामा देखना पसंद है, तो यह फिल्म आपकी सिनेमा सूची में शामिल होने के लायक है। फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार की रेटिंग दी जाती है।

सवाल-जवाब

क्या टॉक्सिक देखने लायक है?
यदि आपको डार्क एक्शन फिल्में, यश का स्क्रीन प्रेजेंस और बेहतरीन बैकग्राउंड स्कोर पसंद है, तो 3.5 स्टार रेटिंग वाली यह फिल्म देखने लायक है।
टॉक्सिक जैसी अन्य फिल्में कौन सी हैं?
टॉक्सिक फिल्म की तुलना केजीएफ (KGF) और एनिमल (Animal) जैसी डार्क अंडरवर्ल्ड एक्शन और पारिवारिक बदले की कहानियों से की जा सकती है।
टॉक्सिक फिल्म की कुल अवधि (रंटाइम) कितनी है?
फिल्म की कुल अवधि 194 मिनट (3 घंटे 14 मिनट) है।
टॉक्सिक फिल्म के निर्देशक कौन हैं और मुख्य सितारे कौन हैं?
फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है और इसमें यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत मुख्य भूमिकाओं में हैं।
क्या टॉक्सिक फिल्म बच्चों के लिए उपयुक्त है?
नहीं, फिल्म में अत्यधिक खून-खराबा, रॉ वायलेंस और डार्क थीम्स होने के कारण यह छोटे बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है।
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